अयोध्या राम मंदिर: 'जज साहब' को जब ईरान,इराक से मिलने लगी थी धमकियां
Ayodhya Ram Mandir News Uttar Pradesh: वर्तमान समय में अयोध्या में होने जा रहे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की पूरे देश में चर्चा है। आज हम बात करेंगे एक ऐसे खास व्यक्तित्व की जिन्होंने राम मंदिर का ताला खोलने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।जी, हां हम बात कर रहे हैं फैजाबाद के तत्कालीन जज कृष्ण मोहन पांडेय की। यह गोरखपुर के जगन्नाथपुर के रहने वाले थे। वन इंडिया हिंदी ने इनके भतीजे सुजीत पांडेय से विस्तार से चर्चा की। जिन्होंने कई रोचक बातें बताई।
उन्होंने बताया कि गोरखपुर कर्म भूमि रही। चाचा ने पीसीएमजे टॉप किया था। वकालत भी करते थे। ऐतिहासिक फैसले के पहले कोई भी चीज बिना प्रयोजन के नहीं होती। ये मामला श्रीराम से जुड़ा है। ईश्वरीय खेल में आप किसी रहस्य को नहीं जानते। फैसले को लेकर के मैं जानता हूं राम मंदिर का जो निर्माण हो रहा है, इस पर मैं कभी सोचता हूं कि इसकी बुनियाद कैसे पड़ी।

छोटी जगह पर जाना होगा लेकिन मना मत करना
इसकी बुनियाद के लिए मैं यह कहूंगा कि वह लॉ सेक्रेटरी थे । चाचा जी की मुलाकात उस दौरान एक पॉमिस्ट से हुई। उन्होंने उनका हाथ देखा तो बताया कि आप को छह माह के बाद आप एक छोटे जगह पर बतौर जिला जज के रुप में भेजा जाएगा। लेकिन आप मना मना करियेगा। वहीं से मैं देख रहा हूं कि वो स्थान आपको चर्चित बनाएगा। चाचा जीन ने भी यह बात सुन ली।
6 माह बाद बनाए गए फैजाबाद के जिला जज
6 माह बाद पॉमिस्ट की बात सही हुई और वो फैजाबाद के जिला जज बना दिये गए। इसी समय राम मंदिर के ताला खोलने का मामला चल रहा था।
दादी से कही थी यह बात
सुजीत पांडेय ने बताया कि फैसला सुनाने से पहले चाचा कृष्ण मोहन पांडेय ने दादी से कहा था कि मां मैं बहुत महत्वपूर्ण कार्य करने जा रहा हूं। अगर मुझे कुछ हो जाए तो तुम चिंता मत करना। इसके अतिरिक्त परिवार के किसी अन्य सदस्यों से कोई बात नहीं की।
बदल गयी दिनचर्या
दादी से यह सारी बात कहने के बाद उनकी दिनचर्या पहले से पूरी तरही बदल गयी। उन्होंने राम मंदिर मामले की गहन जानकारी के लिए उस पर पूरी तरह केंद्रित कर दिया।रात में जल्दी अपने कमरे में चले जाना। इस मामले से संबंधित फाइलों व अन्य का गहनता से अध्ययन करना,ये सब उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया। मानों यही उनके जीवन का लक्ष्य हो। इस केस के एक-एक पन्नों को पढ़ डाला।
यह बना फैसले का आधार
उन्होंने बताया कि चाचा कृष्ण मोहन पांडेय ने जब गहनता से अध्ययन किया तो पाया कि किसी ने भी राम मंदिर में ताला बंद करने का आदेश ही नहीं दिया है,तो फिर इसमें ताला कैसे बंद रह सकता। इसके बाद ही एक फरवरी,1986 में उन्होंने राम मंदिर का ताला खोलने का आदेश दिया था।
परिवार की बढ़ा दी गयी सुरक्षा
सुजीत पांडेय बताते हैं कि यह फैसला अति संवेदनशील था। फैसले के तुरंत बाद ही परिवार की सुरक्षा बढा दी गयी। गोरखपुर से लेकर फैजाबाद तक परिवार के लोग जहां थे,उन्हे तत्काल कडी सुरक्षा मुहैया करा दी गयी।
ईरान- इराक से मिलने लगी थी धमकियां
उन्होने बताया कि इस फैसले के बाद जज साहब को ईरान,इराक सहित अन्य कई देशों से जना मारने की धमकियां मिलनी शुरु हो गयी थी। वे तरह तरह की बातें करते और डराने का प्रयास करते रहते।
लेकिन इन सबसे ऊपर शहरवासियों व देशवासियों में खुशी की लहर थी। उन्होंने जज साहब के निर्णय का स्वागत किया। आज जब प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने जा रहा है तो यह हम सबके लिए हर्ष का विषय है।
वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में फैजाबाद के पूर्व जिला जज कृष्ण मोहन पांडेय के भतीजे सुजीत पांडेय ने इन बातों को रखा। इसमें जज कृष्ण मोहन पांडेय के कोई विचार नहीं हैं। उनका देहांत पूर्व में हो चुका है।












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