गुजरात: हार से हिली कांग्रेस में अब बदलाव के संकेत, विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति का ऐलान किया
गांधीनगर। लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद गुजरात कांग्रेस में अब परिवर्तन के संकेत हैं। पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में जुट गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य में फिर से सत्ता में आने के लिये पार्टी का संगठन ज्यादा मजबूत बनाने और उसमें युवाओं को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। राज्य में एक अध्यक्ष की जगह जोन वाइज चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति किए जाने की भी बातें हो रही हैं। सामान्य रूप से देखा जाय तो, गुजरात को चार हिस्सो (उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात, दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ) में बांटा जा सकता है। हर जोन को अपना अध्यक्ष मिले ऐसी प्लानिंग हो रही है।

न विधानसभा और न ही लोकसभा में जीत सकी कांग्रेस
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, गुजरात में कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी कार्यकर्ताओं की है, जो कांग्रेस के पास नहीं है। पार्टी के पास अभी जितने कार्यकर्ता है उसमें बढ़ोतरी नहीं की गई तो 2022 में आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को फिर से सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा। अपनी आंतरिक लडाईयों की वजह से कांग्रेस 2017 में विधानसभा के चुनाव में सत्ता में नहीं आई। कांग्रेस को 77 सीटें मिली थी। सत्ता में आने के लिये पार्टी को 15 सीटें ज्यादा चाहिये थी। माना जा रहा है कि उम्मीदवार के खिलाफ काम करने से कांग्रेस ने ये सीटें गवांई। कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भी कोई फायदा नहीं हुआ। पिछली बार भाजपा को 26 सीटें मिली थी, इस बार भी 26 सीटें मिली है। इस बार सीटों में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत का मार्जिन भी ज्यादा रहा।

गुजरात में पार्टी में कुछ ये बदलाव भी कराएंगे राहुल गांधी
लोकसभा में कांग्रेस की हार के बाद, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात कांग्रेस के नेताओं को एक नई टीम बनाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। इसे देखते हुए आने वाले समय में गुजरात में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए क्षेत्र से लेकर पंचायत तक बदलाव किए जाएंगे। राज्य में ग्राम्य, तालुका, जिला, शहर औऱ स्टेट बोडी तक भारी बदलाव होने की संभावना है। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक नेता कहते हैं कि हम कांग्रेस में परिवर्तन करना चाहते है। गुजरात में काफी कुछ बदलाव होने की उम्मीद है। हम 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे है। पार्टी के खिलाफ जिन्होंने काम किया है उसे हम पार्टी से अलविदा भी कह सकते है, औऱ इसके साथ भाजपा औऱ अन्य पार्टी से कइ नेता औऱ कार्यकर्ता पार्टी से जुडने के लिये तैयार हैं उनको हम आमंत्रित भी करेंगे।

इसलिए भाजपा लगातार जीतती चली गई
संभावना है कि गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति की संरचना एक सप्ताह में रद्द कर दी जाएगी और नई नियुक्तियां की जाएंगी। गुजरात में कांग्रेस के पास पूर्ण सत्ता 1985 से 1990 तक थी। उसके बाद पांच साल गठबंधन की सरकार चलाइ गई, जिसमें चीमनभाइ पटेल मुख्यमंत्री थे। आखिर में वह कांग्रेस से जुड़ गये। राज्य में भाजपा ने 1995, 1998, 2002, 2007, 20012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है और सत्ता में है। यही नहीं, कांग्रेस 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव भी हार गई।

चुनाव से पहले ही हार के कगार पर आ गई थी कांग्रेस
कांग्रेस मुक्त गुजरात बनाने के लिये पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में रणनीति बनाई थी और 2002 से कांग्रेस के नेताओ, पूर्व विधायक औऱ वर्तमान विधायकों को पार्टी में शामिल किया है। कांग्रेस के नेताओं की संख्या की गिनती की जाय तो पिछले 22 सालों में कांग्रेस के कुल 190 से ज्यादा नेता औऱ 25 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का साथ छोडकर भाजपा का दामन थाम लिया। कांग्रेस अपने नेताओं को भी बचा नहीं पाई।












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