गुजरात में हिंदू बदल रहे अपना धर्म, 5 साल में ऐसे 1789 आवेदन आए, मुस्लिम केवल 4% ही आवेदक
गांधीनगर. गुजरात में हिंदुओं द्वारा दूसरे धर्म बदलने का चलन बढ़ रहा है। यहां कई जिलों में लोग अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म के अनुयायी बन रहे हैं। ऐसे लोगों में हिंदू, मुस्लिम एवं ईसाई धर्म के अनुयायी शामिल हैं। राज्य सरकार से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में पिछले पांच वर्षों में अपना मजहब बदलने की मांग करने हेतु 1,895 आवेदन आए। जिनमें से सर्वाधिक 53% आवेदन सूरत जिले से थे। इन आवेदनों में ज्यादातर हिंदूओं के थे, जो चाहते थे कि वे अपना धर्म बदलकर दूसरा धर्म अपनाएंगे।

सूरत में सर्वाधिक लोगों ने धर्म परिवर्तन किया
राज्य सरकार के डेटा के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने की अनुमति के कुल आवेदनों में 94% से अधिक हिंदुओं के थे, जबकि सिर्फ 4% मुस्लिमों के थे। जबकि, शेष ईसाई एवं अन्य के अनुयायी थे। वर्ष 2014 में जुलाई से 2019 के जून महीने की अवधि तक अकेले सूरत से प्रशासन के पास 1,003 आवेदन आए।

अधिकांश आवेदक हिंदू, दूसरे नंबर पर मुस्लिम
सूरत के अलावा बनासकांठा (196 आवेदक), जूनागढ़ (161), आणंद (92) और सुरेंद्रनगर (80) जिले शामिल हैं। जिनमें से अधिकांश आवेदक हिंदू थे। कुल 1789 लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे मजहब बदलने की बात कही। जबकि, 82 आवेदक मुस्लिम औऱ 22 आवेदक इसाई थे। इस दौरान पांच साल की अवधि में केवल एक सिख आवेदक और एक खुजा आवेदक सामने आया।

सर्वाधिक मुस्लिम आवेदक सूरत शहर से
सर्वाधिक मुस्लिम आवेदक सूरत (20) से ही थे, जो दूसरा मजहब अपनाना चाहते थे। उसके बाद वड़ोदरा (12), राजकोट (10) और अहमदाबाद (8) के थे। उसी प्रकार, ईसाई आवेदक बड़े वडोदरा (5), आनंद (4) और खेड़ा ( 5) से थे। ऐसा देखने को मिला है कि पांच वर्षों की अवधि के दौरान, अपने मजहब को बदलने के इच्छुक हिंदू आवेदकों की संख्या 2014-15 की अवधि की तुलना में 34% बढ़ी है। जिसमें जुलाई, 2018 के दौरान सबसे अधिक आवेदकों (735) का पंजीकरण किया गया।

ईसाई एवं बौद्ध बनने के मामले ज्यादा सामने आए
पिछले सालों में गुजरात में यह भी सामने आया कि आदिवासी जिलो में इसाई मिशनरियों के प्रभाव से अथवा उनके दबाव में कई परिवारों ने अपना मजहब बदल लिया। ऐसे मामलों पर सूरत जिला कलेक्टर धवल पटेल का कहना है कि, हिंदूओं में सबसे ज्यादा लोगों ने बौद्ध धर्म कुबूलने की मांग की। आवेदकों में ज्यादातर अनुसूचित जाति के लोग हैं। इस तरह के रूपांतरण बड़े पैमाने पर वैवाहिक संबंधों के कारण थे। जो लोग अपनी शादी को विशेष विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं कराना चाहते हैं, वे अपनी पसंद के धर्म में रूपांतरण चाहते हैं।

सरकार ऐसे देती है आवेदकों को अनुमति
बीते पांच साल की अवधि के दौरान, राज्य सरकार ने 1,006 आवेदकों को अनुमति दी है। आवेदन कार्यकारी मजिस्ट्रेट और संबंधित पुलिस अधिकारी को भेजे जाते हैं। पुलिस अधिकारी किसी भी प्रकार का बल का उपयोग हुआ है कि नहीं, खरीद हुई है या नहीं, वह देखते हैं। साथ ही पड़ताल भी की जाती है। क्योंकि, अगर व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो ही उसे धर्म बदलने की अनुमति मिलती है। धर्म बदलने वाले व्यक्ति से पुलिस बयान लेती है।
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