Zakir Naik: आतंकी विचार फैलाने का आरोप है जाकिर नाइक पर, भगोड़े पर कस रहा शिकंजा
विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक की विचारधारा से प्रभावित होकर कट्टरपंथी लोग दुनिया भर में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।

हाल ही में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत सरकार भगोड़े विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक को भारत लाने का हर संभव प्रयास करेगी। बागची ने कहा कि भारत में जाकिर नाइक के खिलाफ कई मामलों में केस दर्ज हैं। कानून की नजरों में वह भारत का भगोड़ा है। उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में ओमान सरकार के संपर्क में हैं।
नाइक के प्रत्यर्पण के सवाल पर बागची ने कहा कि जहां तक प्रत्यर्पण का संबंध है, जिन देशों के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि है, उनकी लिस्ट पहले से ही पब्लिक डोमेन में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओमान सरकार ने जाकिर नाइक को रमजान के दौरान अपने देश में लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया है। भारत सरकार को यह उम्मीद है कि ओमान सरकार जाकिर नाइक को हिरासत में लेकर भारत को सौंप सकती है। इस उम्मीद के पीछे का कारण यह है कि दिसंबर 2004 में भारत और ओमान ने मस्कट में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे और इसे जून 2006 में भारत के राजपत्र में भी प्रकाशित किया गया था।
इससे पहले कतर में आयोजित फीफा विश्व कप के दौरान भी जाकिर नाइक को कतर में देखा गया था। इस पर भारत ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, कतर ने अपनी सफाई में कहा था कि जाकिर नाइक सरकारी आमंत्रण पर नहीं आया है।
जाकिर नाइक पर एजेंसियों ने कसा शिकंजा
दरअसल, जुलाई 2016 में बांग्लादेश की आर्टिसन बेकरी पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 25 से ज्यादा लोग मारे गए थे। मरने वालों में अधिकतर विदेशी थे। जांच के बाद पता चला कि इस हमले में शामिल तीन आतंकी जाकिर नाइक से प्रभावित थे और उनमें से एक आतंकी ने उसके कट्टर इस्लामिक सिद्धांतों का प्रसार फेसबुक के जरिए किया था।
इसके बाद, बांग्लादेश सरकार ने जाकिर नाइक द्वारा स्थापित 'पीस टीवी' पर प्रतिबंध लगा दिया। जाकिर नाइक इसी टीवी के जरिए कट्टर इस्लामिक सिद्धांतों का प्रचार करता था और दूसरे धर्मों के खिलाफ भड़काऊ तकरीरें करता था। इन्हीं भड़काऊ तकरीरों के चलते कनाडा, श्रीलंका, भारत और ब्रिटेन ने पहले ही इस टेलीविजन चैनल पर प्रतिबंध लगा दिया था।
नवंबर 2016 में एनआईए ने जाकिर नाइक के खिलाफ यूएपीए और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद, केंद्र सरकार ने जाकिर नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर पांच वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया। साल 2021 में इस प्रतिबंध को पांच साल के लिए और बढ़ा दिया गया।
हालांकि, एनआईए ने पूछताछ के लिए कई बार जाकिर नाइक को समन भी जारी किया। लेकिन वह जांच एजेंसी के सामने कभी पेश नहीं हुआ। इसके बाद, एनआईए ने जाकिर नाइक के विभिन्न ठिकानों पर छापामारी शुरू कर दी। छापामारी के दौरान एनआईए को जाकिर की 37 संपत्तियों की जानकारी मिली। इनमें से 25 फ्लैट मुंबई में होने का पता चला। इन संपत्तियों का मूल्य 100 करोड़ से भी अधिक का बताया जाता है। इसके बाद, जांच एजेंसियों ने जाकिर नाइक से संबंधित विभिन्न बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया।
इसके अतिरिक्त, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की 18.37 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली। ईडी द्वारा जिन संपत्तियों को जब्त किया गया, उनमें ₹9.41 करोड़ का म्युचुअल फंड, ₹68 लाख का गोदाम और इस्लामिक एजुकेशन ट्रस्ट के तहत स्कूल की बिल्डिंग शामिल है।
मलेशिया से जाकिर को लाने का प्रयास
जुलाई 2016 में बांग्लादेश में हुए आतंकी हमले के आरोपियों का संबंध जब जाकिर नाइक से जुड़ने लगा तो वह गुप्त रूप से भारत से फरार हो गया। इसके बाद पता चला कि जाकिर नाइक सऊदी अरब में रह रहा है। फिर जानकारी मिली कि जाकिर नाइक मलेशिया भाग गया है और वहां की सरकार ने उसे नागरिकता भी प्रदान कर दी है।
जुलाई 2017 में भारतीय विदेश मंत्रालय ने जाकिर नाइक का पासपोर्ट रद्द कर दिया। भारत सरकार ने जाकिर को वापस लाने के लिए कई बार मलेशिया सरकार से संपर्क किया। लेकिन वहां की सरकार कोई न कोई बहाना बनाकर उसमें अडंगा डालती रही और जाकिर नाइक को भारत को सौंपने से बचती रही।
हालांकि, भारत और मलेशिया के बीच साल 2010 में ही प्रत्यर्पण संधि हुई थी। साल 2019 में मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा कि जाकिर को भारत को सौंपने या न सौंपने का अधिकार मलेशिया के पास है, क्योंकि जाकिर को लगता है कि भारत में उसके साथ न्याय नहीं होगा। बाद में महातिर ने कहा कि वे जाकिर को भारत के अलावा किसी भी देश को सौंप सकते हैं। लेकिन कोई भी देश जाकिर को लेने के लिए तैयार नहीं है।
इसके बाद, भारतीय जांच एजेंसियों ने इंटरपोल का सहारा लिया। भारतीय एजेंसियों ने तीन बार इंटरपोल से जाकिर नाइक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की अपील की। हालांकि एजेंसियों के ये प्रयास विफल ही रहे। इंटरपोल का कहना है कि भाषणों में चंदा मांगना और धर्म का प्रचार करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।
जाकिर नाइक का आतंकवाद से संबंध
जाकिर नाइक को सुन्नी संप्रदाय की कट्टर वहाबी विचारधारा का प्रचारक माना जाता है। वह अपनी तकरीरों में अन्य धर्मों के साथ-साथ इस्लाम को मानने वाले शियाओं और अहमदियों पर भी हमला करता है। कट्टर वहाबी विचारधारा के प्रचार और प्रसार करने के कारण ही उसे सऊदी अरब की सरकार ने साल 2015 में 'किंग फैजल इंटरनेशनल अवार्ड' से भी नवाजा था।
जाकिर नाइक सिर्फ कट्टर इस्लामिक विचारधारा को ही बढ़ावा नहीं देता है, बल्कि वह अपनी तकरीरों के जरिए मुस्लिम युवकों को आतंकवादी बनने के लिए भी प्रेरित करता है। आतंकी गतिविधियों में भाग लेने वाले कई आतंकियों का संबंध जाकिर नाइक से पाया गया है। यही नहीं साल 1998 में जाकिर नाइक ने खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन का भी समर्थन करते हुए कहा था कि "अगर ओसामा बिन लादेन सबसे बड़े आतंकवादी अमेरिका से लड़ रहा है, तो मैं उसके साथ हूं और हर मुसलमान को आतंकवादी होना चाहिए।"
साल 2016 में एनआईए की पूछताछ में हैदराबाद के आईएसआईएस से जुड़े एक आतंकी मोहम्मद इब्राहिम याजदानी ने बताया कि जाकिर नाइक की तकरीरों को सुनकर ही उसने आतंकवाद का रास्ता अपनाया है। याजदानी 2010 में मुंबई में 10 दिनों तक जाकिर के कैंप में रहकर आया था, जहां से उसका झुकाव मुस्लिम कट्टरपंथ की ओर हुआ। इसी तरह से जयपुर में आईएसआईएस के एक एजेंट सिराजुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद भी यह बात सामने आई थी कि वह जाकिर नाइक के भाषणों से प्रभावित था।
साल 2009 में न्यूयॉर्क के सबवे में आत्मघाती हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार नजीबुल्लाह जाजी के दोस्तों ने बताया कि वह जाकिर की तकरीरों को टीवी पर देखा करता था। इसी तरह से साल 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सीरियल बम बलास्ट का मास्टर माइंड राहिल शेख भी जाकिर से प्रभावित था।
साल 2007 में बेंगलुरु का एक व्यक्ति कफील अहमद स्कॉटलैंड स्थित ग्लासगो एयरपोर्ट को उड़ाने की कोशिश करते हुए घायल हो गया था। जांच में पता चला कि जिन लोगों की बातों से वह प्रभावित था, उसमें जाकिर नाइक भी शामिल था।
मुंबई एटीएस ने इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के एक कर्मचारी फिरोज देशमुख को 2006 में औरंगाबाद में हथियार बरामदगी मामले में गिरफ्तार किया था। इसी संगठन का एक अन्य कर्मचारी अयाज सुल्तान महाराष्ट्र से भागकर अफगानिस्तान चला गया था और बाद में वह आईएसआईएस की आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया था।
इसी तरह से साल 2016 में जाकिर नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के एक कर्मचारी अर्शी कुरैशी को मुंबई पुलिस ने केरल के 21 मुस्लिम युवकों को आईएसआईएस में भर्ती होने के लिए प्रेरित करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि, सितंबर 2022 में सबूतों के अभाव में एनआईए कोर्ट ने अर्शी कुरैशी को बरी कर दिया। इस तरह से जाकिर नाइक के विचारों से प्रभावित और समर्थित आतंकियों की सूची काफी लंबी हैं।
इसके अतिरिक्त, जाकिर नाइक अपने मंच का इस्तेमाल गैर-मुसलमानों को इस्लाम में धर्मांतरित करवाने और दूसरे धर्मों को नीचा दिखाकर इस्लाम को सर्वश्रेष्ठ बताने में भी करता है।
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