China: चीन में मंत्रियों की बर्खास्तगी से जिनपिंग की विश्वसनीयता दांव पर
चीन के मंत्री लगातार सरकार छोड़ रहे हैं। कोई गायब हो रहा है तो किसी को जबरन रिटायर करवा दिया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री सरकार से हटे या हटाए जा चुके हैं। उसके पहले शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री को भी बदल दिया था। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की यह हालत देखकर अब राष्ट्रपति शी जिनपिंग की क़ाबलियत और सही आदमी चुनने के उनके तरीके पर सवाल उठया जाने लगा है। इसे जिनपिंग सरकार के शीर्ष स्तर पर संकट के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

विदेश मंत्री के बाद रक्षा मंत्री बर्खास्त
अभी तीन दिन पहले ही चीन के रक्षा मंत्री के रूप में काम कर रहे ली शांगफू को बर्खास्त कर दिया गया। वह लगभग दो महीने से सार्वजनिक जीवन से गायब थे। इसी तरह शी जिनपिंग ने विदेश मंत्री रहे किन गैंग को भी कुछ सप्ताह पहले बर्खास्त किया था। चीन के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइलों की देखरेख करने वाली एक विशिष्ट इकाई के दो प्रमुखों को भी बर्खास्त कर दिया गया है। चीन में अब यह आम राय बन रही है कि राष्ट्रपति गलत लोगों को चुनते हैं। पहले गायब होना और फिर उन्हें हटा दिया जाना एक रहस्यमय फैसला माना जा रहा है, क्योंकि सरकार पूरी प्रकिया गुप्त रखती है। जिनपिंग इसमें जरा भी पारदर्शिता नहीं रखते।
रक्षा मंत्री के पद से बर्खास्त किए गए ली शांगफू चीन के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह चीन के पांच राज्य पार्षदों में से एक रहे हैं। राज्य पार्षद ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष पदों पर रहते हैं। कहा जा रहा है कि ली सेना के उपकरण की खरीद में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए थे। ली को जिनपिंग का कट्टर वफादार भी माना जाता था। ली शांगफू को आखिरी बार 29 अगस्त को सार्वजनिक रूप से देखा गया था, जब उन्होंने बीजिंग में चीन-अफ्रीका सुरक्षा मंच के एक कार्यक्रम में भाग लिया था। पहले तो बताया गया कि ली बीमार हैं, लेकिन पिछले सप्ताह की रिपोर्टों से ऐसा लगता है कि वास्तव में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही थी। हालांकि इसकी पुष्टि सरकारी सूत्रों ने नहीं की।
पिछले महीने ली की तरह ही रहस्यमय तरीके से विदेश मंत्री के पद पर रहे किन गैंग भी लापता हो गए थे। उन्हें भी 25 जून 23 जून को आखिरी बार सार्वजनिक रूप से देखा गया था। उनके बारे में यह अफवाह उड़ाई गयी कि उनका किसी विदेशी महिला के साथ विवाहेतर संबंध है और उसी के कारण वह अचानक गायब हुए। अब यह अफवाह थी या सच्चाई किसी को पता नहीं, क्योंकि किन गैंग सार्वजनिक रूप से सामने आए ही नहीं।
गहन जांच के बाद ही होती है नियुक्ति
टाइम मैगजीन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर विक्टर सिंह के हवाले से लिखा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वोच्च रैंकों के बीच इस तरह का नाटकीय उथल-पुथल काफी असामान्य बात है, क्योंकि नियुक्तियों या पदोन्नतियों से पहले चीन में बड़े पैमाने पर जांच परख की जाती है। ऐसा सिस्टम में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। ली और किन के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा। उन दोनों को चीन की शीर्ष प्रशासनिक संस्था, स्टेट काउंसिल में पहले पदोन्नत किया गया था।
चीन में इस समय उन लोगों को वरिष्ठ पद पर लाया ही नहीं जा सकता जो राष्ट्रपति शी जिनपिंग के वफादार नहीं हैं। फिर ली और किन के अचानक निष्कासन के क्या निहितार्थ हो सकते हैं? क्या यह सब किसी साज़िश के तहत किया जा रहा है। टाइम पत्रिका का आकलन है कि महत्वपूर्ण मंत्रियों के इस रहस्यमयी निष्कासन से चीन का विदेशी व्यवसायियों और विदेशी सरकारों के साथ काम करना और कठिन एवं चुनौतीपूर्ण हो जायेगा।
चीन के प्रति बढ़ता अविश्वास
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में ईस्ट एशिया इंस्टीट्यूट के उप निदेशक चेन गैंग का कहना है कि व्यवसायियों को किसी भी प्रकार की अनिश्चितता पसंद नहीं आती। चीन में पहले से ही पारदर्शिता की कमी है। सरकार का सार्वजनिक डेटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसे ही देर से पहुँचता है। चीन ने पिछले जून से ही युवा बेरोजगारी दर या अन्य आर्थिक संकेतकों का प्रकाशन बंद कर दिया है। निवेशकों में चीन के प्रति आत्मविश्वास पहले से कम हुआ है। विदेशी निवेशक कोई बड़ा जोखिम नहीं लेना चाहते।
चेन गैंग का कहना है कि प्रमुख राजनयिक भूमिकाओं में काम करने वाले दो अधिकारियों को अचानक बिना स्पष्ट कारण बताए हटाए जाने से चीन के साथ व्यापार करने की अनिश्चितता को बढ़ावा देगा। कई लोग विदेशी संबंधों के प्रति चीन के मौजूदा दृष्टिकोण से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि वह कई देशों के लिए शत्रुतापूर्ण हो गया है। इसका यह भी मतलब निकाला जा रहा है कि राष्ट्रपति शी ने इस हद तक सत्ता पर अपनी पकड़ बना ली है कि उनके अलावा किसी भी मंत्री का पद सुरक्षित नहीं है।
चीन का कम्युनिस्ट शासन हमेशा से ही एक बंद व्यवस्था रहा है। जैसे -जैसे चीन की वैश्विक शक्ति बढ़ती गई, उसी अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी अपनी गोपनीयता भी बढ़ाती गई। अब वही गोपनीयता चीन के लिए अधिक समस्या पैदा कर रही है। दुनिया चीन की तरफ सशंकित निगाहों से देखती है। लंदन विश्वविद्यालय में एसओएएस चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक स्टीव त्सांग ने कहा था, "गोपनीयता वैसे भी कम्युनिस्ट पार्टी की डिफ़ॉल्ट स्थिति है, लेकिन शी के तहत इसे स्टेरॉयड पर रखा गया है।"












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