Chess: शह-मात का खेल है ‘शतरंज’, जानें इसका पूरा इतिहास
शतरंज की शुरुआत भारत में हजारों साल पहले हुई लेकिन आज यह खेल पूरी दुनिया में खेला जाता है।

Chess: कजाकिस्तान के अस्ताना में भले मौसम सर्द है लेकिन वहां चल रही विश्व शतरंज चैंपियनशिप के टूर्नामेंट हॉल में माहौल पूरी तरह से गरमाया हुआ है। 9 अप्रैल 2023 को शुरू हुई विश्व खिताब के दोनों दावेदार खिलाड़ी (चीन के डिंग लीरेंन और रूस के यान नेपोमनिशी) अपनी-अपनी चालों से एक दूसरे को टेंशन देने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।
वैसे अब तक दोनों के बीच 11वें राउंड के खेल खत्म हो चुके हैं। जिसमें रूस के यान नेपोमनिशी शानदार खेल दिखाते हुए एक प्वाईंट बढ़त पर चल रहे हैं। वहीं अभी तीन और राउंड बचे हुए हैं। नेपोमनिशी को विश्व खिताब हासिल करने के लिए 1.5 अंकों की जरुरत है। जबकि डिंग के लिए लगातार जीत ही उन्हें विश्व खिताब दिलवा सकती है। 30 अप्रैल 2023 तक यह चैंपियनशिप खेली जाएगी।
2 मिलियन यूरो है प्राइज मनी
इस साल की प्राइज मनी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) ने 2 मिलियन यूरो ($ 2.17 मिलियन) का पुरस्कार रखा है। यदि यह मैच 14 राउंड के भीतर समाप्त हो जाता है, तो पुरस्कार राशि का 60 प्रतिशत विजेता को और 40 प्रतिशत उपविजेता को मिलेगा। यदि टाई-ब्रेक की आवश्यकता होती है, तो पुरस्कार पूल को 55 से 45 प्रतिशत विभाजित किया जाएगा।
कब से विश्व शतरंज चैंपियनशिप की हुई शुरुआत?
विश्व शतरंज चैंपियन की अवधारणा 19वीं सदी में उभरी और खिताब 'विश्व चैंपियन' 1845 में दिखाई दिया। उस समय के बाद से विभिन्न खिलाड़ी विश्व चैंपियन के रूप में प्रसिद्ध थे। पर माना जाता है कि आधिकारिक विश्व चैम्पियनशिप आम तौर पर 1886 में शुरू की गयी थी। जब यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के दो प्रमुख खिलाड़ियों जोहान ज़ुकेर्तोर्त और विल्हेम स्टेनिज ने एक मैच खेला था। वहीं 1948 तक विश्व चैंपियनशिप प्रतियोगिता का अर्थ खिलाड़ियों के बीच निजी तौर पर व्यवस्थित किये मैच थे, क्योंकि उस दौरान खिलाड़ियों को धनराशि की खुद व्यवस्था करनी पड़ती थी।
विश्व शतरंज चैंपियनशिप का वर्तमान विजेता
वहीं आज के मौजूदा दौर की बात करें तो इस समय विश्व चैंपियनशिप का खिताब नार्वे के ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन के पास है। जिन्होंने साल 2013 में चेन्नई में हुए विश्व शतरंज चैंपियनशिप में तत्कालीन चैंपियन विश्वनाथन आनंद को हराने के बाद यह खिताब जीता था। इसके बाद से वह लगातार पांच बार इस खिताब पर कब्जा कर चुके हैं। मैग्नस कार्लसन अंतिम बार साल 2021 में रूस के खिलाड़ी यान नेपोमनिशी को दुबई में हराकर विजेता बने थे। यान नेपोमनिशी वही खिलाड़ी हैं जो इस साल चैंपियनशिप खेल रहे हैं।
भारत से जुड़ा है शतरंज का इतिहास
शतरंज दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला एक बौद्धिक और मनोरंजक खेल है। इसकी शुरुआत कब और कैसी हुई इसपर कई मत हैं। हालांकि सभी मत भारत से जुड़े हैं। जिसके अनुसार चतुरंग नाम के शिरोमणि ब्राह्मण ने पांचवीं-छठी सदी में यह खेल संसार के बुद्धिजीवियों को भेंट में दिया था। जिसका प्राचीन नाम - 'चतुरंग' था। जो भारत से अरब होते हुए यूरोप गया और फिर 15-16वीं सदी में तो पूरे संसार में लोकप्रिय और प्रसिद्ध हो गया।
वहीं, दूसरे मत के अनुसार शतरंज लगभग 2000 साल पहले खेला जाता था। यानी यह खेल 280-550 ईसवीं में शुरू हुआ, जब गुप्त साम्राज्य था। इसके बाद शतरंज का खेल दक्षिण यूरोप में 1200 के आसपास शुरू हुआ, जिसमें 1475 के आसपास इस खेल में बड़े बदलाव किये गये, जो आज हम खेलते हैं। इस खेल को स्पेन और इटली में बदलाव के साथ अपनाया गया था।
एक मान्यता यह भी है कि शतरंज उन प्रारंभिक खेलों में से एक है, जो चार खिलाड़ियों वाले चतुरंग नामक युद्ध खेल के रूप में विकसित हुआ था। यह भारतीय महाकाव्य महाभारत में उल्लिखित एक युद्ध व्यूह रचना का संस्कृत नाम है। चतुरंग सातवीं शताब्दी के लगभग पश्चिमोत्तर भारत में फल-फूल रहा था। इसी के बाद यह दुनिया में फैला।
हड़प्पा सभ्यता की खोज में मिला शतरंज?
सम्मानित पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह हड़प्पा सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। समय-समय पर इतिहासकारों को हड़प्पा सभ्यता की खुदाई में मोहजोदड़ो से कपड़ों के टुकड़े के अवशेष, चांदी के ढक्कन, तांबे की वस्तुएं मिलते रहते हैं। वहीं इस दौरान उनको पत्थर के बने शतरंज और उनके मोहरे (गोटियां) भी मिले हैं। इसका मतलब यह है कि उस सभ्यता के लोग भी शतरंज जैसा खेल जानते थे।
शतरंज के मोहरों की चाल
हर खिलाड़ी के पास 16-16 मोहरे होते हैं। शतरंज का बोर्ड या बिसात कुल 64 घरों (squares) का होता है 8×8 का। जिसमें 32 चौरस काले या अन्य रंग और 32 चौरस सफेद या अन्य रंग के होते हैं। खेलने वाले दोनों खिलाड़ी भी सामान्यतः काला और सफेद कहलाते हैं।
इसमें दोनों खिलाड़ियों के पास कुल 16 मोहरे होते हैं जिसे वो एक ही तरह से सजाते हैं। दोनों कोने पर हाथी, उसके बाद घोड़ा, फिर ऊंट और अंत में राजा-रानी। गेम का मुख्य लक्ष्य प्रतिद्वंद्वी राजा को शह-मात (चेकमेट) करना होता है और शह-मात तब होता है जब राजा घेर लिया जाता है और वह भाग नहीं सकता है।
कौन करता है शतरंज को नियंत्रण?
विश्वभर में इस खेल का नियंत्रण फेडरेशन इन्टरनेशनल दि एस (FIDE) द्वारा किया जाता है। सभी प्रतियोगिताएं फीडे के क्षेत्राधिकार में है और खिलाड़ियों को संगठन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार क्रम दिया जाता है। यह एक खास स्तर की उत्कृष्टता प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को 'ग्रैंडमास्टर' की उपाधि देता है।
इसकी स्थापना 20 जुलाई 1924 को पेरिस में हुई थी। फीडे के सदस्य के रूप में 150 से अधिक शतरंज यूनियन शामिल हैं। वहीं इसकी स्थापना वाले दिन को ही 1966 से विश्व शतरंज दिवस मनाया जा रहा है। जबकि भारत में इस खेल का नियंत्रण अखिल भारतीय शतरंज महासंघ द्वारा किया जाता है, जो 1951 में स्थापित किया गया था।
भारत में शतरंज के बड़े खिलाड़ी?
वैसे तो भारत में कई शतरंज के खिलाड़ी हैं जिन्हें ग्रैंडमास्टर की उपाधि दी जा चुकी है। लेकिन, इन सबमें सबसे अव्वल दर्जे पर विश्वनाथन आनंद हैं। भारत में प्रसिद्ध भारतीय शतरंज खिलाड़ी की सूची में सबसे पहले विश्वनाथन आनंद हैं। गौर करने वाली बात ये है कि विश्वनाथन आनंद वर्तमान में फीडे के डिप्टी प्रेसिडेंट भी हैं।
विश्व शतरंज चैंपियनशिप के पांच बार विजेता, भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने 2007 से 2013 तक शतरंज की दुनिया में न केवल अपना दबदबा कायम रखा, बल्कि भारत में शतरंज की क्रांति ला दी। पूर्व विश्व शतरंज चैंपियन केवल दो खिलाड़ियों में से हैं, जिन्होंने शास्त्रीय, रैपिड और ब्लिट्ज विश्व चैंपियनशिप जीती है और मैच, टूर्नामेंट और नॉकआउट प्रारूपों में खेलते हुए विश्व चैंपियनशिप जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं।
इनके अलावा भारत में ग्रैंडमास्टर की उपाधि मिले भारतीय खिलाड़ियों में विदित संतोष गुजराती, पेंटाला हरिकृष्णा, एस एल नारायणन, डी गुकेश, कृष्णन शशिकिरन, निहाल सरीन, प्रज्ञानानंद आर, परिमार्जन नेगी, बी आधिबान, हम्पी कोनेरू, द्रोणवल्ली हरिका, आर वैशाली, सौम्य स्वामीनाथन, ईशा करावड़े, पद्मिनी राऊत, विजयलक्ष्मी सुब्बारामन, पी वी नंदीधा ये सब खिलाड़ी हैं।
विश्व में कितने ग्रैंडमास्टर खिलाड़ी?
चेस डिलाइट्स के अनुसार, शतरंज के खिलाड़ियों की संख्या के हिसाब से रूस में दुनिया में सबसे ज्यादा शतरंज खिलाड़ी हैं। 2018 की रिपोर्ट के अनुसार रूस में लगभग 300 चेस ग्रैंडमास्टर्स हैं। वहीं स्पार्क चेस की रिपोर्ट बताती है कि 2018 तक यूक्रेन में 110 चेस ग्रैंडमास्टर्स, अमेरिका में लगभग 100 चेस ग्रैंडमास्टर्स, जर्मनी में लगभग 94 चेस ग्रैंडमास्टर्स मौजूद थे। इस मामले में भारत भी पीछे नहीं है, भारत के पास 53 चेस ग्रैंडमास्टर हैं।












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