तो आप खुद कहेंगे कि हमें नहीं चाहिए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
बेंगलुरु। कहते हैं कि भारत में भले ही इंसान की कद्र न हो लेकिन उसकी बनी पत्थर की मूर्ति की कद्र खूब होती है और खूब पैसे खर्च करके जगह-जगह पर कई मूर्तियां भी लगवा दी जाती है। ऐसा ही कुछ सरदार पटेल की मूर्ति के साथ हो रहा है। इंडिया स्पेंड डॉट कॉम की रिपोर्ट ने कुछ तथ्य उजागर किये, जिन्हें पढ़ने के बाद बाद आप कहेंगे कि हमें स्टेच्यू ऑफ यूनिटी नहीं बिजली के लिये सोलर प्लांट चाहिये।

सिर्फ मूर्ति पर खर्च हो जाएंगे 2,979 करोड़ रुपए
देश के महान नेताओं में शुमार और पूर्व उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की भी मूर्ति अब गुजरात में बनाई जा रही है। 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' की तर्ज पर बन रही है 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी,' जिसे बनाने में करीब 488 मिलियन डॉलर यानी 2,979 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। जी हां, इतनी रकम सिर्फ एक मूर्ति बनाने में खर्च हो जाएगी।
इतनी रकम कि बदल सकती है देश की सूरत
क्या आप जानते हैं कि इस रकम से प्रधानमंत्री अगर चाहे तो अपना एक सपना पूरा कर सकते हैं। वह सपना जिसका जिक्र उन्होंने खुद किया था और जो देश में बेहतर वैज्ञानिक और सर्वश्रेष्ठ रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़ा है। एक नजर डालिए कि इस रकम से भारत में क्या-क्या किया जा सकता है।
भारत के पास 5 'मॉम'
भारत इतनी रकम से एक नहीं दो नहीं बल्कि पूरे पांच मार्स ऑर्बिटर मिशन यानी मॉम को तैयार कर सकेगा। एक मिशन पर करीब 450 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

इतनी सोलर एनर्जी की बिजली की कमी नहीं
देश में बिजली की काफी कमी है और खुद पीएम मोदी ने इसके लिए सोलर एनर्जी का जिक्र बतौर विकल्प किया है। अगर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की बात करें तो भारत में इतनी रकम से 425 सोलर प्लांट्स तैयार किए जा सकते हैं। हर सोलर प्लांट्स पर 7.7 करोड़ का खर्च आने की संभावना है।

अमेरिका से मिल सकेगी हारपून मिसाइलें
अमेरिका की हारपून मिसाइलों को दुनिया में सबसे एडवांस मिसाइल माना जाता है। भारत को इस रकम से हारपून मिसाइल हासिल हो सकेगी जो भारत के डिफेंस सेक्टर को कई कदम आगे ले जा सकती हैं। एक हारपून मिसाइल की कीमत करीब 400 मिलियन डॉलर यानी 2,440 करोड़ रुपए है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी या मेट्रो कोच
दिल्ली मेट्रो जिसके एक कोच की कीमत करीब 1.1 मिलियन डॉलर है, इस रकम से उसके लिए करीब 425 मेट्रो कोच आ सकते हैं।

तीन और IIT
प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि देश में ज्यादा से ज्यादा युवा और प्रतिभावान वैज्ञानिक तैयार हो सकें। जो रकम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर खर्च की जा रही है, उसका प्रयोग अगर इस मकसद से किया जाए तो देश में तीन उन्नत आईआईटी तैयार की जा सकेंगी। एक आईआईटी को तैयार करने में करीब 760 करोड़ रुपए का खर्च आता है।

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