CPR: चर्चा में क्यों है सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, क्या है उसकी अध्यक्ष यामिनी अय्यर का कांग्रेस कनेक्शन?
कांग्रेस के सीनियर नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी अय्यर की अगुवाई में चलने वाले देश के एक मशहूर थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) का फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इसके बाद यामिनी अय्यर सुर्खियों में हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च लगातार कानूनी नियमों के उल्लंघन के साथ आर्थिक गड़बड़ी कर रही थी। आइए, जानते हैं कि सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर कब-क्या कार्रवाई हुई? यह थिंक टैंक क्या है और क्या काम करता है? साथ ही उसके खिलाफ कौन से आरोप हैं? इसके अलावा यामिनी अय्यर कौन हैं और क्यों सुर्खियों में हैं?

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर क्या कार्रवाई हुई?
भारत के लिए इको सिस्टम विकसित करने का दावा करने वाले इस थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर सितंबर, 2022 में इनकम टैक्स विभाग के सर्वे भी किए गए थे। इसके बाद मार्च, 2023 में गृह मंत्रालय ने सीपीआर के एफसीआरए लाइसेंस को सस्पेंड किया था। जुलाई 2023 में सस्पेंशन खत्म होने के पहले ही छह महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था। इस मामले में थिंक टैंक सीपीआर ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब गृह मंत्रालय के एफसीआरए डिविजन ने इसका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया है।
क्या है सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च?
डॉ. पई पाणिंदिकर द्वारा साल 1973 में स्थापित सेंटर फॉर रिसर्च पॉलिसी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह थिंक टैंक भारत की 21वीं सदी की चुनौतियों पर फोकस करने के साथ ही नीतिगत मुद्दों पर गहन शोध करता है। खुद को नॉन प्रॉफिट, नॉन पार्टिसन और इंडिपेंडेंट इंस्टिट्यूट बताने वाले सीपीआर का दावा है कि इसके मंच पर देश और विदेश के विचारक, नीति निर्माता और उस पर काम करने वाले एक साथ मिलकर नीतिगत मसलों पर एडवांस और इनडेप्थ चर्चा, विचार के बाद फैसले करते हैं।
सीपीआर का दावा है कि इस कवायद का मकसद इंडिया की बेहतरी के लिए ईको सिस्टम को विकसित करना है। इस थिंक टैंक के गवर्निंग बोर्ड में देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व सीजेआई जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ और वीबी वर्गीज जैसे दिग्गजों का नाम शामिल किया जाता है।
सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर क्या हैं आरोप?
रिपोर्ट्स के मुताबिक थिंक टैंक सीपीआर के खिलाफ आरोप है कि उसे कथित तौर पर फोर्ड फाउंडेशन सहित कई विदेशी संगठनों से चंदा मिला था। इसमें नियमों का ख्याल नहीं रखा गया था। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सीपीआर को देश के बाहर से फंड देने वालों में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, हेवलेट फाउंडेशन, वर्ल्ड बैंक, फोर्ड फाउंडेशन, ब्राउन यूनिवम र्सिटी जैसे संस्थान शामिल हैं। साल 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट में गृह मंत्रालय ने दलील दी थी कि सीपीआर की विदेशी फंडिंग को रोकने की जरूरत है। इसे गलत मकसद से विदेशी रकम मिल रही है। इससे देश के आर्थिक हितों पर असर पड़ सकते हैं।
इसके बाद, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) सहित कई एजेंसियों द्वारा इस थिंक टैंक की नियमित तौर पर जांच और ऑडिट की गई। सीपीआर पर देश की राजनीतिक पार्टियों के लिए चंदा इकट्ठा करने और टैक्स चोरी करने के भी आरोप लगे थे। इसके अलावा थिंक टैंक सीपीआर पर गुजरात की विवादित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट को चंदा देने का भी आरोप है। तीस्ता सीतलवाड के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस साल 2016 में ही सस्पेंड कर दिया गया था।
विदेशी फंड को लेकर कई एनजीओ पर सख्ती
देश के एनजीओ को विदेशों से मिलने वाले फंड को लेकर केंद्र सरकार लगातार सख्ती बरत रही है। सीपीआर के अलावा ऑक्सफैम इंडिया, न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक और बेंगलुरु स्थित मीडिया फाउंडेशन समेत कई संस्थान विदेशी फंडिंग को लेकर जांच के दायरे में हैं। देशभर में आदिवासियों, दलितों, मुसलमानों और महिला अधिकारों के लिए काम करने का दावा करने वाली संस्था ऑक्सफैम इंडिया का भी एफसीआरए रद्द किया जा चुका है। गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में एफसीआरए नियमों के गड़बड़ी के आरोप के चलते उसे रिन्यू करने से भी इंकार कर दिया था।
कौन हैं यामिनी अय्यर?
थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की मौजूदा प्रेसिडेंट यामिनी अय्यर कांग्रेस के सीनियर नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट पर अपने बायो में उन्होंने खुद के पॉलिसी रिसर्चर होने का दावा किया है। उन्होंने बताया है कि उनकी रिसर्च खासकर राज्यों की क्षमता, सामाजिक नीतियां, संघवाद और राजनीतिक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में होती है।
यामिनी अय्यर प्रेसिडेंट से पहले सीपीआर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीइओ) भी रह चुकी हैं। एक्स अकाउंट पर उन्होंने अपना एक आर्टिकल पिन किया हुआ है। इसमें उन्होंने नौकरशाहों के सरकार की आवाज बनने से होने वाले खतरे पर लिखा है। सीपीआर के अपडेट्स के अलावा वह लिबरल लोगों के लेखों को रिपोस्ट करती रहती हैं।
सीपीआर से कैसी जुड़ीं यामिनी अय्यर?
सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट यामिनी अय्यर ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से भी डिग्री ली है। यामिनी अय्यर साल 2017 में सीपीआर से जुड़ीं। इस थिंक टैंक में नई दिल्ली की प्रेसिडेंट बनाई गई थीं।
इससे पहले वह यूपीए-2 के शासनकाल में साल 2008 में केंद्र में अकाउंटेबिलिटी इनिशिएटिव की सीनियर रिसर्च फेलो और संस्थापक थी। यामिनी अय्यर ओपन गवर्नमेंट पार्टनरशिप के इंटरनेशनल एक्पर्ट पैनल की संस्थापक सदस्यों में भी शामिल हैं। इसके अलावा वह आर्थिक मंच की ग्लोबल काउंसिल ऑन गुड गवर्नेंस की सदस्य भी रही हैं।












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