Bihar Hooch Tragedy: आखिर क्या है बिहार और देश में जहरीली शराब का पूरा मामला
जब यूरिया, ऑक्सीटोसिन, गुड़ और पानी को मिलाकर फर्मेंटेशन किया जाता है तो इथाइल अल्कोहल की जगह मिथाइल अल्कोहल बन जाता है। यह मिथाइल अल्कोहल ही शराब के जहरीला होने का कारण बनता है।

बिहार में जहरीली शराब पीकर मरने वालों का ग्राफ दिल दहला देने वाला है। इंसानों की जान ऐसे जा रही है, जैसे उसकी कोई कीमत ही नहीं है। आमतौर पर कच्ची शराब की बोतल की कीमत महज 20, 30 या 50 रुपये तक ही रहती है। गौरतलब है कि ये लोग इतने गरीब हैं कि इनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार करने के लिए भी परिवारों को कर्ज लेना पड़ रहा है। अब सवाल उठता है कि बिहार में अगर शराबबंदी है तो शराब आती कहां से है और क्या इतनी आसानी से शराब उपलब्ध हो जाती है? वहीं और किन राज्यों में जहरीली शराब पीने से मौतें हो रही हैं? जहां-जहां शराबबंदी का कानून लागू है, वहां की क्या स्थिति है?
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कैसे शराब बन जाती है जहरीली?
कच्ची यानि देशी शराब बनाने के लिए गुड़, पानी, यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कई खतरनाक केमिकल का भी इस्तेमाल होता है। इस विधि से तैयार शराब को लंबे समय तक रखने से इसमें कीड़े भी पड़ जाते हैं। ऐसे में शराब जहरीली हो जाती है।
दरअसल, कच्ची शराब बनाने वाले गुड़ को सड़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा नौसादर और यूरिया भी मिलाया जाता है। यह सभी पदार्थ जानलेवा होते हैं। जब यूरिया, ऑक्सीटोसिन, गुड़ और पानी को मिलाकर फर्मेंटेशन किया जाता है तो इथाइल अल्कोहल की जगह मिथाइल अल्कोहल बन जाता है। यह मिथाइल अल्कोहल ही शराब के जहरीला होने का कारण बनता है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि शराब बनाने के लिए टेंपरेचर का ख्याल नहीं रखने पर भी इथाइल अल्कोहल के साथ मिथाइल अल्कोहल भी बन जाता है।
ऐसी शराब शरीर में जाकर फार्मेल्डिहाइड (फॉर्मिक एसिड) बना देती है। जो आंखों की रोशनी जाने के अलावा मौत का कारण भी बन जाता है। वहीं मिथाइल अल्कोहल नर्वस सिस्टम ब्रेक डाउन भी कर सकता है, जिससे हार्टअटैक आने के चांस बढ़ जाते हैं।
आखिर बिहार में क्या हुआ?
बीते दिनों बिहार के छपरा, सिवान, बेगूसराय इलाके में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की हालत गंभीर हो गई थी। इसके बाद 17 लोगों ने दम तोड़ दिया और धीरे-धीरे करके यह आंकड़ा बढ़ता गया। खबरों के मुताबिक अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, यह आंकड़ा ऊपर नीचे भी हो सकता है क्योंकि बिहार सरकार द्वारा स्पष्ट रुप से कोई आंकड़ा पेश नहीं किया गया है।
'शराब पीकर मरने वालों से कोई हमदर्दी नहीं'
इस बीच विपक्ष ने जहरीली शराब पीकर मरने वालों का मुद्दा बिहार विधानसभा में उठाया तो सीएम नीतीश कुमार गुस्से में जवाब देते हुए कहा कि जहरीली शराब पीने से मरने वालों के परिजनों को उनकी सरकार कोई मुआवजा नहीं देगी। जहरीली शराब पीने से मरने वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं बरती जानी चाहिए। हम बिहार में सभी को कहेंगे, 'दारू पिया तो मरा। मत पियो, नहीं तो मर जाओगे।' हम इसका और विज्ञापन करेंगे। क्या हम शराब पीकर मरने वाले को मुआवजा देंगे? इसका कोई सवाल ही नहीं है। साथ ही कहा कि जहरीली शराब पीने से मरने वालों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।
बिहार में कब हुई शराब बंदी और कितनी हुईं मौतें
बिहार में साल 2016 से पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू है। तब से लेकर अब तक शराब पीकर मरने वालों का आंकड़ा लगभग एक हजार से भी ज्यादा है। बीते दिन ही राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बताया कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद 6 साल में 1000 से ज्यादा लोग जहरीली शराब पीने से मरे, 6 लाख लोग जेल भेजे गए और केवल शराब से जुड़े मामलों में हर माह 45 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में रोजाना 10 हजार लीटर और महीने में 3 लाख लीटर शराब जब्त की गई।
वहीं बिहार पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो उनके अनुसार साल 2016 के बाद से 6 वर्षों में 2,09,78,787 लीटर शराब जब्त की गई है। जबकि पुलिस मुख्यालय द्वारा मीडिया के साथ साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल जनवरी से अक्टूबर के बीच 62,140 लोगों को शराब के व्यापार में शामिल होने के कारण गिरफ्तार किया गया था।
2021 में सबसे ज्यादा 90 मौतें
जहरीली शराब से होने वाली मौतों के सही आंकड़े तो सामने नहीं आते और सरकारी आंकड़ों पर विश्वास करना कठिन होता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में जहीरीली शराब पीने की वजह से सबसे ज्यादा 90 मौतें वर्ष 2021 में हुई थी। राज्य में 2020 में 6, 2019 में 9, 2018 में 9, 2017 में 8 और 2016 में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं आधिकारिक रूप से 2022 में अब तक 67 लोग जहरीली शराब पीने की वजह से मारे गए हैं। अधिकांश मौतें गोपालगंज, छपरा, बेतिया और मुजफ्फरपुर जिले में हुई हैं।
क्या कहता है शराबबंदी पर बिहार का कानून
शराबबंदी कानून संशोधन विधेयक 2022 के अनुसार, पहली बार शराब पीकर पकड़े जाने पर 5,000 तक का जुर्माना या एक महीने की जेल हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार शराब पीकर पकड़ा जाता है तो पकड़े गए आरोपी पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रकार के मामलों की सुनवाई के लिए एक साल तक का समय तय किया गया है। अगर पुलिस भारी मात्रा में अवैध शराब पकड़ती है तो अवैध शराब का सैंपल रखकर बाकी बची शराब को नष्ट कर सकती है। शराबबंदी कानून संशोधन विधेयक 2022 में दंडनीय सभी अपराध धारा 35 के अधीन अपराधों को छोड़कर सुनवाई स्पेशल कोर्ट द्वारा की जाएगी। वहीं ऐसे मामलों में गिरफ्तार व्यक्ति अभी भी जेल में है तो उसे रिहा कर दिया जाएगा।
देश में बीते 6 साल में हुईं 6000 से ज्यादा मौतें
केंद्र सरकार के मुताबिक 2016 से 2022 के बीच पूरे भारत में जहरीली शराब पीने से 6,172 लोगों की मौत हुई है। दरअसल लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि 2016 में 1054, 2017 में 1510, 2018 में 1365, 2019 में 1296 और 2020 में 947 लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हुई है। जहरीली शराब पीने से केवल बिहार में नहीं बल्कि देश के कई राज्य हैं जहां मौतें हो रही हैं। इन राज्यों में नाम सबसे ऊपर है मध्य प्रदेश और पंजाब। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, असम, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी और उत्तराखंड भी शामिल है।












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