Raju Pal: कौन था राजू पाल, जिसके शरीर से निकली 19 गोलियां? क्यों दोस्त से दुश्मन बना अतीक अहमद?
डॉक्टरों ने जब विधायक राजू पाल की डेडबॉडी का पोस्टमार्टम किया तो उसके शरीर से तकरीबन डेढ़ दर्जन गोलियां निकाली गयी थी।

Raju Pal: आज से तकरीबन 18 साल पहले 25 जनवरी 2005 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक ऐसे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था, जिसकी गोलियों की गूंज आजकल यूपी विधानसभा में भी सुनाई दे रही है। उस हत्याकांड में मारे गये शख्स का नाम था राजू पाल और मुख्य आरोपी था माफिया अतीक अहमद। जब डॉक्टरों ने राजू पाल की डेडबॉडी का पोस्टमार्टम किया तो उसके शरीर से तकरीबन डेढ़ दर्जन गोलियां निकाली गयी। इस हत्याकांड को पूरी तरह से फिल्मी स्टाइल में अंजाम दिया गया था।
ये कहानी है साल 2003 की, जब प्रदेश की सत्ता बदली और समाजवादी पार्टी की सरकार बनी। तब तक अतीक अहमद इलाहाबाद पश्चिमी सीट से 5 बार विधायक बन चुका था और उसकी गुंडागर्दी और वर्चस्व कायम था। कोई भी उसके खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत नहीं करता था। वक्त आया साल 2004 का, जब लोकसभा का चुनाव हुआ। मुलायम सिंह यादव अब अतीक अहमद को प्रदेश की राजनीति से ऊपर उठाना चाहते थे। इसलिए फूलपुर सीट से उसे सांसद का चुनाव लड़वाया और अतीक अपने खौफ के दम पर विधायक से सांसद बन गया। तब अतीक की पारंपरिक सीट इलाहाबाद पश्चिम खाली हो गई और यही से शुरू हुई अतीक और राजू पाल के बीच संघर्ष की कहानी।
कौन था राजू पाल?
राजू पाल भी इलाहाबाद पश्चिमी का ही रहने वाला था। उस वक्त राजू पाल पर भी लूट, अपहरण जैसे अपराधों में शामिल होने के आरोप लगे हुए थे। राजू पाल इलाहाबाद के धूमनगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर भी था। दरअसल, उस दौर में राजू पाल, अतीक अहमद का सबसे खास हुआ करता था और अपराध की दुनिया में उसका दाहिना हाथ माना जाता था।
फिर, एक समय ऐसा आया कि वर्चस्व की लड़ाई के कारण दोनों के बीच खटपट शुरू हो गई। दरअसल, साल 2002 में राजू पाल ने अतीक अहमद की देखादेखी राजनीति में एंट्री कर ली। इसके बाद से दोनों के बीच दुश्मनी और बढ़ गई। साल 2004 में अतीक अहमद फूलपुर से सांसद बना तो इलाहाबाद शहर पश्चिमी सीट खाली हो गई। उधर अतीक ने इस सीट से सपा के टिकट पर अपने छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ को प्रत्याशी बनाया। दूसरी तरफ बसपा की टिकट पर राजू पाल ने भी पर्चा भरा। दोनों के बीच तल्खी बढ़ती गई। इस उपचुनाव में राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ को हरा दिया। पहली बार अतीक को किसी ने टक्कर दी, अब बात रसूख की थी।
शादी के 10 दिन बाद राजू को मारी 19 गोलियां
विधायक बनने के 3 महीने बाद 15 जनवरी 2005 में राजू पाल ने पूजा पाल से शादी कर ली। शादी के ठीक 10 दिन बाद 25 जनवरी को विधायक राजू पाल एसआरएन हॉस्पिटल से निकला। उसके साथ दो गाड़ियां - क्वालिस और स्कॉर्पियो भी चल रही थीं। राजू पाल काफिले की क्वालिस कार खुद चला रहा था। बगल वाली सीट पर उनके एक दोस्त की पत्नी रुखसाना बैठी थी। जो उन्हें रास्ते में मिल गई थीं।
काफिला जीटी रोड पर था, तभी बगल से तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने राजू पाल की गाड़ी को ओवरटेक किया। राजू पाल कुछ समझ पाता इसके पहले ही एक गोली सामने का शीशा चीरते हुए उसके सीने में घुस गई। गाड़ी धीमी हुई। स्कॉर्पियो से 5 हमलावर उतरे। तीनों राजू पाल पर दनादन गोलियां बरसाने लगे। बाकी दो हमलावरों ने पीछे चल रही गाड़ियों पर गोलियां बरसाईं।
जब उनके समर्थकों ने गोली चलने के बाद राजू पाल को एक टेम्पो में लादा और अस्पताल लेकर जाने लगे तो इसी दौरान अपराधियों को लगा कि राजू पाल अभी जिंदा है तो उन सबने तकरीबन 5 किलोमीटर तक उस टेम्पो का पीछा किया और घेर कर फिर गोलियां बरसाईं।
वे सभी हर हाल में राजू पाल को मारना चाहते थे। इस हमले में राजू पाल और उनके साथ बैठे संदीप यादव और देवीलाल की भी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में डॉक्टरों ने राजू के शरीर से कुल 19 गोलियां निकाली थीं।
बवाल, हंगामा व आगजनी से कांप उठे थे शहरवासी
विधायक को गोली मारने की घटना पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। अतीक का खौफ इतना था पुलिसवालों ने पोस्टमार्टम के बाद रातोंरात शव का अंतिम संस्कार करवा दिया। इस हत्याकांड से लोग आक्रोशित हो उठे थे। राजू पाल की हत्या के बाद कई दिनों तक शहर में बवाल, हंगामा और आगजनी की घटनाएं हुईं। दिनदहाड़े हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। इस हत्याकांड का मुख्य गवाह था उमेश पाल। जिसकी बीते सप्ताह अतीक के गुर्गों ने गोली मार कर और बम फेंक कर हत्या कर दी।
इस हत्याकांड में राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने सीधे तौर पर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का नाम लिया था। लेकिन सरकार सपा की थी, तो पुलिस ने इन्हें हाथ भी नहीं लगाया। विधायक की मौत के बाद चुनाव हुए, तब तक पूजा के हाथों की मेंहदी के रंग भी नहीं उतरे थे वो उपचुनाव में पति की जगह उतरीं लेकिन इस बार अतीक अहमद का खौफ इतना बढ़ गया था कि उसका भाई अशरफ विधायक बन गया।
सपा ने पार्टी से निकाला और मायावती ने जेल में डाला!
साल 2007 में यूपी की सत्ता बदली और मायावती मुख्यमंत्री बन गईं। सत्ता जाते ही सपा ने अतीक को पार्टी से निकाल बाहर किया। मायावती की सरकार ने अतीक को मोस्ट वांटेड घोषित कर दिया। आखिर कोई चारा न पाकर अतीक ने 2008 में आत्मसमर्पण किया। वहीं साल 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार अतीक अहमद और राजू पाल की पत्नी पूजा पाल का आमना-सामना हुआ और इस चुनाव में पूजा पाल की जीत हुई।
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