जानिए शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान के बारे में ये बातें, जिन्हें हेगड़े ने बताया जन बलात्कारी और राष्ट्रपति ने कहा महान योद्धा

नई दिल्ली। आज एक बार फिर से टीपू सु्ल्तान को लेकर सियासत गर्मायी है क्योंकि केंद्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े ने अपने एक ट्वीट के जरिए मैसूर के 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान को जन बलात्कारी और क्रूर हत्यारा बताया है। इतना ही नहीं हेगड़े ने टीपू सुल्तान की जयंती के अवसर पर रखे गए कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उत्तर कन्नड़ डिप्टी कमिश्नर से उन्हें आमंत्रित न करने के लिए कहा और बोला था कि उन्हें एक बलात्कारी, सनकी और हत्यारे के शर्मनाक इवेंट में आमंत्रित न किया जाए, जिसके बाद तो बवाल मचना लाजिमी ही था। राजनैतिक पार्टियां जहां इस पर बवाल मचा रही हैं वहीं हेगड़े के खिलाफ कोलकाता में रहने वाले सुल्तान के वंशज कानूनी कार्रवाई करने के तैयारी कर रहे हैं लेकिन आज देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 18 वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए टीपू सुल्तान को एक ऐसा योद्धा करार दिया जो अंग्रेजों से लड़ते हुए ऐतिहासिक मौत को प्राप्त हुए। चलिए जानते हैं इस योद्दा के बारे में कुछ खास बातें।

जन्म 20 नवम्बर 1750 को

जन्म 20 नवम्बर 1750 को

इतिहासकारों के मुताबिक टीपू सुल्तान (1750 - 1799) मैसूर राज्य का शक्तिशाली शासक था। उनका जन्म 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली (यूसुफ़ाबाद) (बंगलौर से लगभग 33 (21 मील) किमी उत्तर मे) हुआ था। उनका पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब था। उनके पिता का नाम हैदर अली और माता का नाम फ़क़रुन्निसा था। उनके पिता मैसूर साम्राज्य के सेनापति थे। जो अपनी ताकत से 1761 में मैसूर साम्राज्य के शासक बने। टीपू को मैसूर का शेर कहा जाता था। उनकी गिनती एक विद्वान, शक्तिशाली और योग्य कवियों में होती थी।

बेशकीमती भेटें

बेशकीमती भेटें

टीपू सुल्तान ने कई हिंदू मंदिरों को काफी बेशकीमती भेटें दी थी । थालकोट के मन्दिर में सोने और चांदी के बर्तन है, जिनके शिलालेख बताते हैं कि ये टीपू ने भेंट किए थे। 1782 और 1799 के बीच, टीपू सुल्तान ने अपनी जागीर के मन्दिरों को 34 दान के सनद जारी किए। इनमें से कई को चांदी और सोने की थाली के तोहफे पेश किए। ननजनगुड के श्रीकान्तेश्वर मन्दिर में टीपू का दिया हुअा एक रत्न-जड़ित कप है। ननजनगुड के ही ननजुनदेश्वर मन्दिर को टीपू ने एक हरा-सा शिवलिंग भेंट किया था। श्रीरंगपटना के रंगनाथ मन्दिर को टीपू ने सात चांदी के कप और एक रजत कपूर-ज्वालिक पेश करने का भी जिक्र किताबों में मिलता है।

टीपू सुल्तान के रॉकेट

टीपू सुल्तान के रॉकेट

टीपू सुल्तान 15 साल की उम्र से अपने पिता के साथ जंग में हिस्सा लेने लगे थे, जिसके कारण ही उन्हें शेर-ए-मैसूर कहा जाने लगा था। टीपू गुरिल्ला युद्ध से जंग लड़ने मे माहिर थे। यही नहीं टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइल मैन माना जाता है। बीबीसी की एक खबर के मुताबिक, लंदन के मशहूर साइंस म्यूजियम में टीपू सुल्तान के रॉकेट रखे हुए हैं। इन रॉकेटों को 18वीं सदी के अंत में अंग्रेज अपने साथ लेते गए थे।

 4 मई 1799 को टीपू सुल्तान की मौत

4 मई 1799 को टीपू सुल्तान की मौत

लेकिन उनके चरित्र के सम्बंध में विद्वानों ने काफी मतभेद है। कई अंग्रेज विद्वानों ने उसकी आलोचना करते हुए उसे अत्याचारी और धर्मान्त बताया है। जबकि भारतीय इतिहासकारों ने उन्हें काफी चतुर, होशियार और तेज-तर्रार लिखा है, जिनकी नजर में सारे धर्म बराबर थे। अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए 4 मई 1799 को टीपू सुल्तान की मौत हो गई थी। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इतिहास के पन्नों से टीपू सुल्तान का नाम मिटा पाना असंभव है। टीपू की मृत्यू के बाद सारा राज्य अंग्रेज़ों के हाथ आ गया।

 21 करोड़ रुपए में नीलाम हुई

21 करोड़ रुपए में नीलाम हुई

उनकी तलवार अंग्रेज अपने साथ ब्रिटेन ले गए थे, जो कि बाद में 21 करोड़ रुपए में नीलाम हुई। अप्रैल 2010 में लंदन की नीलामी संस्था सोदेबीजज ने नीलाम किया था। इसे उद्योगपति विजय माल्या ने खरीदा था।

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