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Jan Aushadhi Kendra: कब शुरू हुए जन औषधि केंद्र, कैसे मिल रहा है लोगों को लाभ

Jan Aushadhi Kendra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से घोषणा कर बताया कि जन-जन तक सस्ती दवा उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत 'जन औषधि केन्द्रों' की संख्या बढ़ायी जायेगी। अभी तक भारत में लगभग 10,000 'जन औषधि केंद्र' कार्यरत हैं। जिनकी संख्या 2.5 गुना बढ़ाने यानि 25,000 करने का लक्ष्य प्रधानमंत्री ने रखा है। जिसके चलते आमजन को इसके आर्थिक व स्वास्थ्य संबंधी अनेकों लाभ होंगे।

क्या है प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना

भारत के सभी नागरिकों, खासकर मध्यम वर्ग व गरीबों को सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार ने नवंबर 2008 में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) शुरू की थी। जिसको क्रियान्यवन रूप फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो आफ इंडिया (पीएमबीआई) देती है। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे विस्तार रूप दिया और इसको प्रधानमंत्री जन औषधि योजना कर दिया।

When did the Jan Aushadhi Kendra start, how are people getting benefits

बाद में नवंबर 2016 को इस योजना का नाम फिर से प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना कर दिया गया। फिलहाल इसके तहत सस्ती, गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाईयां व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए भारत के लगभग सभी जिलों में जन औषधि केंद्र खोले गये हैं। 31 मार्च 2023 तक देश भर में 9303 जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं, जिन पर लगभग 1800 प्रकार की दवाईयां व 285 मेडिकल उपकरण मौजूद है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों का ब्यौरा

अपने शुरूआती वर्ष यानि 2008 में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत मात्र 4 जन औषधि केंद्र खोले गये, जिनकी संख्या 2014 तक यानि लगभग 6 वर्षों में केवल 86 तक ही पहुंची। इसके साथ-साथ इन केंद्रों पर वार्षिक बिक्री लगभग ₹3 करोड़ तक रही।

2015 में इस परियोजना को फिर से विस्तार दिया गया और वित्तीय वर्ष 2015-16 में जन औषधि केंद्रों की संख्या 240 तक हो गई और वार्षिक बिक्री भी बढ़ती हुई ₹12 करोड़ तक पहुंच गई। वर्ष 2020-21 में जन औषधि केंद्रों की संख्या 7557 और वार्षिक बिक्री लगभग ₹666 करोड़ हो गयी।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में जन औषधि केंद्रों की संख्या 8640 और लगभग ₹893 करोड़ वार्षिक बिक्री हुई। वहीं 2022-23 में जन औषधि केंद्रों की संख्या बढ़कर 9188 हो गयी और वार्षिक बिक्री भी ₹1094.84 करोड़ हुई। यानि वर्ष 2015-16 से 2022-23 तक यानि इन 7 वर्षों में जहां जन औषधि केंद्रों की संख्या में लगभग 38.28 गुना वृद्धि हुई वहीं वार्षिक बिक्री में भी बेहताशा वृद्धि (91.23 गुना) हुई है।

जन औषधि केंद्रों का उद्देश्य

जन औषधि केंद्र के प्रमुख उद्देश्यों में भारत के सभी वर्गों, विशेषकर गरीबों तथा वंचितों को गुणवत्तापूर्ण व सस्ती दवा पहुंचाना है। इसके साथ-साथ शिक्षा और प्रचार के माध्यम से जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा कर, इस धारणा का खंडन करना है कि गुणवत्ता केवल उच्च कीमत पर ही मिलती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों द्वारा रोजगार के अवसर पैदा करना भी है।

जन औषधि केंद्रों से आमजन को फायदा

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर 1800 प्रकार की दवायें तथा 285 प्रकार के मेडिकल उपकरण मिलते हैं। ये सभी उत्पाद व उपकरण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रमाणित एजेंसियां/कंपनियों से ही खरीदे जाते हैं। कहने का मतलब यह है कि इन जन औषधि केंद्रों पर जो भी दवाईयां व उपकरण होते हैं, वे सभी गुणवत्तापूर्ण होते हैं। साथ-ही-साथ बहुत सस्ते भी होते हैं। जिससे मध्यम और गरीब लोग भी इन केंद्रों से उच्च कीमत वाली दवाइयां कम पैसों में आसानी से खरीद सकते हैं।

अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लाल किले के संबोधन में बताया कि बाजार में मधुमेह (शुगर) के इलाज हेतु 3,000 रुपये प्रति माह खर्च करना पड़ता है, जबकि इन दवाओं की कीमत 100 रुपये है। ये दवा जन औषधि केंद्रों पर 10 रुपये से लेकर 15 रुपये में उपलब्ध हो जाती है।

इसके साथ-साथ इस योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने पर सरकार द्वारा वित्तीय सहायता 2 से 2.5 लाख रूपये भी मिलती है। प्रत्येक दवा बिक्री पर 20 प्रतिशत लाभ भी मिलता है और प्रत्येक साल की कुल बिक्री पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव भी मिलता है। कुछ विशेष क्षेत्र जैसे- उतर पूर्वी राज्यों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों वाले लाभार्थी को 15 प्रतिशत इंसेंटिव मिलता है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र महिला सशक्तिकरण में भूमिका निभा रहा है। लगभग 2200 से अधिक जन औषधि केंद्र महिला उद्यमियों द्वारा चलाए जा रहे हैं और उनमें से कई केंद्रों में महिला कर्मचारी हैं। महिलाओं के लिए बाजार में जहां सैनिटरी नैपकिन 15-20 रूपये प्रति पैड मिलता है वहीं इन केंद्रों पर सैनिटरी नैपकिन केवल 1 रुपये/प्रति पैड में उपलब्ध है। पिछले 4 वर्षों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर लगभग 36.37 करोड़ से अधिक के सेनेटरी पैड बेचे गए हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों से लोगों को नये रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जो बेरोजगारी को कम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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