Archery World Cup: तीरंदाजी विश्वकप की शुरुआत कब हुई और जानें भारत और दूसरे देशों का प्रदर्शन
Archery World Cup: भारतीय तीरंदाज अभिषेक वर्मा ने अमेरिका के जेम्स लुट्ज को 148-146 से हराकर तीरंदाजी विश्वकप 2023 का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। इस मेडल के साथ अभिषेक ने अपना तीसरा विश्वकप गोल्ड मेडल जीता। तीरंदाजी विश्वकप 2023 में भारत ने अब तक 11 मेडल्स जीते हैं जिनमें से 5 गोल्ड मेडल्स हैं।
तीरंदाजी विश्वकप कब शुरू हुआ?
2003 विश्व चैंपियनशिप और 2004 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में तीरंदाजी को मिली लोकप्रियता के बाद साल 2006 में इसके विश्वकप की शुरुआत हुई। इसका आगाज विश्व तीरंदाजी महासंघ ने किया था। तीरंदाजी विश्वकप को शुरू करने का उद्देश्य इसकी लोकप्रियता बढ़ाना था। गौरतलब है कि 2022 में तीरंदाजी विश्वकप का प्रसारण लगभग 15 करोड़ दर्शकों तक पहुंच गया था। तीरंदाजी फिलहाल भारत, चीन, ताइवान और तुर्किये जैसे देशों में बहुत लोकप्रिय खेल है।

तीरंदाजी विश्वकप सालाना आयोजित होने वाला एक टूर्नामेंट है। यह अप्रैल से अक्टूबर के महीनों में आयोजित होता है। इसमें हर देश के खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं। विश्वकप में अलग-अलग प्रकार के तीरंदाजी मुकाबले होते हैं जैसे रिकर्व और कंपाउंड बो इत्यादि। विश्व तीरंदाजी महासंघ ने इस खेल को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए साल 2010 में इंडोर तीरंदाजी विश्वकप की भी शुरुआत की है। यह हर साल नवंबर से फरवरी के बीच खेला जाता है।
तीरंदाजी विश्वकप में इनाम राशि
तीरंदाजी विश्वकप की पुरस्कार राशि साल-दर-साल बदलती रहती है। अगर बात की जाए 2023 की तो इस वर्ष पुरस्कार राशि ₹3.65 करोड़ है। जबकि 2022 में यह ₹2.95 करोड़ थी। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस साल पुरस्कार राशि लगभग 1.24 गुना बढ़ी है। हालांकि पिछले कई वर्षों से तीरंदाजी विश्वकप की पुरस्कार राशि में काफी वृद्धि हो रही है। उदाहरण के तौर पर 2022 में तीरंदाजी विश्वकप के प्रत्येक चरण के लिए पुरस्कार राशि 2019 से लगभग 220 प्रतिशत बढ़ गई है।
आपको बता दें कि द वेगस शूट में तीरंदाजी विश्वकप के मुकाबले लगभग ₹40 लाख अधिक इनाम राशि दी जाती है। यह दुनिया में सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित इनडोर तीरंदाजी टूर्नामेंट है।
तीरंदाजी विश्वकप में गोल्ड मेडल्स
तीरंदाजी विश्वकप शुरू होने से लेकर अबतक इसमें लगभग 47 देशों के खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं। फिलहाल इसमें रूस, अमेरिका, इटली, फ्रांस और दक्षिण कोरिया का दबदबा बना हुआ है। इन पांचों देशों के तीरंदाजों ने 2006 से लेकर अभीतक 100 से भी ज्यादा मेडल्स अपने नाम किये हैं।
इसमें अमेरिका ने 321 मेडल्स, दक्षिण कोरिया ने 302 मेडल्स, रूस ने 125 मेडल्स, फ्रांस ने 116 मेडल्स और इटली ने 114 मेडल्स जीते हैं। इन सभी विश्वकपों में सर्वाधिक 155 गोल्ड मेडल्स दक्षिण कोरिया के खिलाडियों ने अपने नाम किये हैं। जबकि अर्जेंटीना, बुल्गारिया लिथुआनिया, क्रोएशिया और प्यूर्टो रिको जैसे देशों के खिलाड़ियों तीरंदाजी विश्वकप में सर्वाधिक खराब प्रदर्शन रहा है।
खिलाड़ियों का प्रदर्शन
तीरंदाजी विश्वकप में जिन टॉप 5 खिलाड़ियों का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा उनमें अमेरिका के ब्रैडेन गेलेंथियन, अमेरिका के ब्रेडी एलिसन, कोलंबिया की सारा लोपेज, दक्षिण कोरिया के किम वू-जिन और नीदरलैंड के माइक श्लोएसर, और शामिल हैं। तीरंदाजी विश्व कप में ब्रैडेन गेलेंथियन ने 27 मेडल्स, ब्रेडी एलिसन ने 26 मेडल्स, सारा लोपेज ने 23 मेडल्स, किम वू-जिन ने 20 मेडल्स और माइक श्लोएसर ने 18 मेडल्स जीते हैं। सारा द्वारा जीते 23 मेडल्स में से 18 तो गोल्ड मेडल्स ही हैं।
भारत का तीरंदाजी विश्वकप में प्रदर्शन
भारत का तीरंदाजी विश्वकप में प्रदर्शन औसत से अधिक रहा है। 2006 से लेकर 2022 तक भारतीय खिलाड़ियों ने सभी विश्वकपों में कुल 101 से भी ज्यादा मेडल्स जीते हैं। इसमें 28 गोल्ड मेडल्स हैं। इसके अलवा 39 सिल्वर मेडल्स और 34 ब्रोंज मेडल्स शामिल हैं। विश्वकप में भारत के जिन खिलाड़ियों का प्रदर्शन सबसे जबरदस्त रहा उनमें जयंत तालुकदार, डोला बनर्जी और दीपिका कुमारी के नाम सबसे आगे हैं। जयंत ने कुल 5 मेडल्स, डोला ने 3 मेडल्स और दीपिका ने 2 मेडल्स अपने नाम किये हैं।












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