क्या है मध्य प्रदेश का व्यापमं घोटाला? विस्तृत रिपोर्ट
मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं में एक बड़ा घोटाला हुआ है। भ्रष्टाचार के गलियारे में बिछे शतरंज में हर एक प्यादे से लेकर 2 हजार करोड़ रुपए के वारे-न्यारे करने वाले वजीर और राजा तक के लिये यह घोटाला मौत का साया बन चुका है। 7 जुलाई तक 42 मौतों का कारण बन चुका है। यह वो घोटाला है, जिससे सीधे या फिर कथित तौर पर जुड़े लोगों को मौत का डर सताने लगा है। आइये जानते हैं क्या है यह व्यापमं घोटाला।
व्यापमं एक प्रोफेशनल एजुकेशन का संक्षिप्त रूप है, जिसके तहत राज्य में प्री मेडिकल टेस्ट, प्री इंजीनियरिंग टेस्ट और कई सरकारी नौकरियों के एग्जाम होते हैं। यह एक मंडल के रूप में काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में व्यापमं परीक्षा घोटाले में तब्दील तब हो गया। घोटाले की शुरुआत हुई कॉन्ट्रैक्ट टीचर वर्ग-1 और वर्ग-2 और मेडिकल एग्जाम से। इसमें ऐसे लोगों को पास किया गया, जिनमें एग्जाम में बैठने तक की योग्यता नहीं थी। और तो और तमाम सरकारी नौकरियों से लेकर पुलिस भर्ती तक हजारों लोगों की भर्तियां नियमों को ताक पर रखकर की गईं। खासकर वो नौकरियां व प्रवेश जो 2011 के बाद परीक्षाओं के तहत दिये गये।
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इस घोटाले में बड़े-बड़े मंत्रियों, आईएएस अधिकारियों और व्यापारियों से लेकर क्लर्क ग्रेड तक के लोगों के नाम आ रहे हैं। ऐसे लोगों के नाम आ रहे हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर घूस लेकर लोगों को नौकरियां व प्रवेश परीक्षाओं में हाई रैंक दिलायी है।
व्यापमं से जुड़ी मुख्य बातें
- व्यापमं के तहत प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों की शुरुआत 1990 के दशक से ही शुरू हो चुकी थीं।
- पहली एफआईआर साल 2000 में छतरपुर जिले में दर्ज हुई। 2004 में खंडवा में 7 केस दर्ज हुए।
- वर्ष 2009 तक एक भी बड़ा मामला सतह पर नहीं आया, सारी मछलियां तालाब के अंदर बैठक कमाई करती रहीं।
- 2009 में पीएमटी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे, जो वाकई में गंभीर थे। कमेटी बनायी गई और 100 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं।
- 2012 में एसटीएफ का गठन किया गया। जिसने 2013 में बड़े नामों के होने का जिक्र किया लेकिन, खुलासा नहीं किया।
- पहला नाम पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का आया। उनके साथ 100 से ज्यादा नाम दर्ज हुए।
- व्यापमं में तैयार की जा रही चार्जशीट में सिर्फ नेताओं के नहीं, बल्कि बिचौलियों, छात्रों, पुलिसकर्मियों, अभिभावकों के भी नाम दर्ज हैं।
- व्यापमं में एक-एक परीक्षा पर सरकारी अफसर, बिचौलिये और छात्रों व आवेदकों के बीच बड़े तार पाये गये हैं।
- व्यापमं के अंतर्गत पास हुए 1020 अभ्यर्थियों के फॉर्म गायब हैं।
- नितिन महेंद्र नाम का कर्मचारी है, जो बंद कमरे में कंप्यूटर ऑन कर रिकॉर्ड बदलने का काम करता था।
- एसटीएफ के मुताबिक 92,175 अभ्यर्थियों के डॉक्यूमेंट्स में बदलाव किये गये, ताकि घूस देने वालों को हाई रैंक दिलायी जा सके।
परीक्षा के बाद जला दिये जाते थे फॉर्म
व्यापमं के अंतर्गत आवेदन करने वालों को प्रवेश पत्र जारी किये जाते हैं। लेकिन अधिकारियों-कर्मचारियों-बिचौलियों की सांठ-गांठ के चलते प्रवेश पत्र जारी करते वक्त सारी डीटेल छात्र की होती थी, लेकिन फोटो परीक्षा देने वाले पढ़े-लिखे परीक्षार्थी का। परीक्षा पूरी होने के बाद कंप्यूटर के डाटाबेस में जाकर बाकायदा फोटो बदली जाती थी।
इस परीक्षा को देने के लिये मेधावी छात्रों को 2 से 5 लाख रुपए तक दिये जाते थे। इसके अलावा ओएमआर शीट में फर्जीफिकेशन करके और मेधावी छात्र को पैसा देने वाले छात्र के बगल में बिठा कर नकल करवायी जाती थी। सबसे अहम बात यह है कि एडमिट कार्ड का मिलान नहीं हो सके, इसलिये कंप्यूटर में डाटा फीड करने के बाद फॉर्म जला दिये जाते थे। परीक्षाएं कराने के नायाब तरीके विस्तार से पढ़ने के लिये click करें।
व्यापमं से जुड़ी गड़बड़ियां
- 2007-08 में व्यापमं में भारी वित्तीय अनियमितताएं पायी गईं।
- 2009 में पीएमटी की परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे और एक और एफआईआर दर्ज हुई।
- 2011 में व्यापमं के अंतर्गत पीएमटी परीक्षा के दौरान 145 लोगों पर शक गहरा गया।
- 2011 में 8 छात्र पीएमटी परीक्षा में रंगे हाथों पकड़े गये। ये वो थे जो 3-4 लाख रुपए लेकर परीक्षा में बैठे थे।
- उसी के बाद व्यापमं ने बायोमीट्रिक के जरिये फोटो के साथ-साथ उंगलियों के निशान भी मिलाने शुरू किये।
- काउंसिलिंग के दौरान भी उन्हीं उंगलियां के निशान मिलाये जाने लगे, ताकि फर्जी परीक्षार्थी को पकड़ सकें।
कब शुरू हुई बड़ी जांच?
इंदौर के आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद राय ने 2008 में व्यापमं घोटाले में गहन जांच की मांग करते हुए पीआईएल दाखिल की। उसी के तुरंत बाद 2009 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच के लिये एसआईटी गठित कर दी। एसआईटी की कमान राज्य के मेडिकल एजूकेशन के ज्वाइंट डायरेक्टर को सौंपी।
क्या निकला कमेटी की रिपोर्ट 2011 में
- 114 छात्रों ने फर्जी परीक्षार्थियों को अपनी जगह बिठाकर पीएमटी की परीक्षा पास की।
- फर्जी परीक्षा देने आये अधिकांश छात्र मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश के धनाड्य परिवारों से थे।
- बिचौलियों ने एक-एक छात्र से 10 से 14 लाख रुपए लिये, यानी फॉर्म भरने वाले छात्र भी अमीर घरों के थे।
- फर्जी डॉक्टर तैयार करने वाले व्यापमं के अधिकारी भी इस धंधे में शामिल थे।
- 2011 में सरकार ने उन सभी प्रवेशों को खारिज कर दिया, जिन पर जांच कमेटी ने सवाल उठाये थे।
- 7 जुलाई 2015 में को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने व्यापमं घोटाले की सीबीआई जांच के लिये हाईकोर्ट से अपील की।
क्या हुआ जब पुलिस हुई सक्रिय
2013 में पुलिस सक्रिय हुई और इंदौर के तमाम होटलों से एक ही रात में 20 लोगों को धर दबोचा। इनमें 17 लोग तो यूपी के थे। जो 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए लेकर दूसरों की जगह परीक्षा देने आये थे। तब पता चला कि यह एक बड़ा रैकेट है, जिसकी कमान जगदीश सागर के हाथ में है, जिसे मुंबई में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने गहन पूछताछ की तो उसने 317 नाम उगले। ये सभी मेडिकल के छात्र थे, जिनका करियर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया।
व्यापमं में 2012 की इन परीक्षाओं में हुआ घोटाला?
- प्री-मेडिकल टेस्ट यानी पीएमटी परीक्षा
- प्री-पीजी परीक्षा जो राज्य स्तर पर करायी गई।
- फूड इंस्पेक्टर सेलेक्शन टेस्ट
- मिल्क फेडरेशन टेस्ट
- सूबेदार, सब इंस्पेक्टर भर्ती
- प्लाटून कमांडर भर्ती
- पुलिस कॉन्सटेबल भर्ती
- फॉरेस्ट सब-इंस्पेक्टर भर्ती
व्यापमं से जुड़े रहस्य
- प्री-पीजी टेस्ट में परीक्षा नियंत्रक डा. पंकज त्रिवेदी और सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा ने अभ्यर्थियों को आनसर शीट की फोटोकॉपी मुहैया करायीं।
- चार परीक्षाओं में परीक्षा देने के बाद ओएमआर शीट बदली गईं।
- 2012 से पहले 286 छात्रों ने फ्रॉड करके पीएमटी परीक्षा पास की। कई छात्रों को निष्कासित कर दिया गया।
बड़े नाम जो व्यापमं घोटाले में आये
भाजपा नेता व पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा: आरोप है कि इन्होंने शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की और कॉन्सटेबल की भर्ती में 15 लोगों की सिफारिश की। लक्ष्मीकांत का कहना है कि उन पर लगे आरोप झूठे हैं। अगर व्यापमं में इतनी ही पकड़ होती, तो खुद की बेटी पीएमटी में दो बार फेल क्यों होती।
ओपी शुक्ला, ऑफीसर ऑन स्पेशल ड्यूटी, टेक्निकल एजूकेशन: जैसे ही व्यापमं घोटाला उजागर हुआ, ये अंडरग्राउंड हो गये। लेकिन दो महीने बाद आत्मसमर्पण कर दिया। आरोप है कि इन्होंने पीएमटी परीक्षा में 85 लाख रुपए कमाए।
सुधीर शर्मा, खनन व्यापारी: ओएसडी के रूप में कार्यरत रह चुके हैं। आरोप है कि इन्होंने कॉन्सटेबल भर्ती के दौरान जमकर कमायी की। ये फरार हुए, लेकिन फिर आत्मसमर्पण कर दिया। फिर फरार हुए, लेकिन ईनाम घोषित किये जाने पर कोर्ट में सरंडर किया।
आरके शिव हरे, आईपीएस अधिकारी: सब इंस्पेक्टर भर्ती में जमकर कमायी की। साथ ही अपनी बेटी और दामाद का मेडिकल कॉलेज में दाखिला करवाया। ये भी फरार हुए, लेकिन बाद में आत्मसमर्पण कर दिया।
रमाकांत द्विवेदी, ज्वाइंट कमिश्नर (रेवेन्यू): इनके घर में 70 करोड़ रुपए कैश, ज्वेलरी आदि बरामद हुए। इन्होंने पीएमटी में दाखिले करवाये।
डा. जगदीश सागर: इंदौर का रहने वाले जगदीश ने मेडिकल में प्रवेश करवाये। ये 1990 से बड़ा रैकेट चला रहा था। इस वक्त ये रीयल इस्टेट का बिजनेस करता है। करोड़ों की संपत्ति जुटा ली है।
डा. संजीव शिल्पकार: ये जगदीश सागर का जूनियर था। जगदीश से प्रेरित होकर इसने अपना खुद का रैकेट शुरू कर दिया। इसने करोड़ों की कमायी की।
सुधीर राय, संतोष गुप्ता, तरंग शर्मा: यह एक और गैंग है, जो जगदीश सागर को टक्कर देता था। इसकी जड़ें कर्नाटक और महाराष्ट्र तक फैली हुई थीं।
पंकज त्रिवेदी: व्यापमं का परीक्षा नियंत्रक, जिसके घर से ढाई करोड़ रुपए नकद बरामद हुए।
सीके मिश्रा, व्यापमं अधिकारी: ये वो अधिकारी हैं, जो सागर, संतोष गुप्ता और संजीव के लिये काम करता था। एक रोल नंबर पर 50 हजार रुपए लेता था।
नितिन मोहिंद्रा, प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट, अजय सेन सीनियर सिस्टम एनालिस्ट: ये दोनों बंद कमरे में कंप्यूटर पर बैठकर ओएमआर शीट से खेलते थे और लाखों रुपए सीधे करते थे।
इनके अलावा डा. जीएस खनूजा, जिनके बेटे को गलत तरीके से मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला। एमबीबीएस का छात्र मोहित चौधरी, जो यूपी से मध्य प्रदेश सिर्फ पीएमटी का इम्तहान देने आता था। नरेंद्र देव आजाद (जाटव) वो बिचौलिया है जो पीएमटी में बैठने वाले छात्रों को लाता था। डा. विनोद भंडारी, जो घोटाला उजागर होते ही मॉरीशस भाग गया। कोर्ट के आदेश पर लौटा। अनिमेश आकाश सिंह वे बिचौलिया है, जो छात्रों को लाता था।
राज्यपाल राम नरेश यादव का भी नाम
एसटीएफ ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव के खिलाफ भी सबूत जुटाये हैं। उन पर फॉरेस्ट गार्ड रिक्रूटमेंट परीक्षा में फर्जी तरीके से भर्ती कराने के आरोप लगे हैं। वहीं उनके बेटे सैलेश यादव पर शिक्षक भर्ती में घूसखोरी के आरोप लगे, लेकिन कुछ ही दिन बाद उनकी संदिग्ध मौत हो गई।
व्यापमं में मौतें
अगर पुलिस की फाइलें खंगालें तो अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जो कहीं न कहीं व्यापमं से सरोकार रखते थे। इसमें 19 वे बिचौलिये थे। यानी जितनी भी बड़ी मछलियों को खुद के जाल में फंसने का डर सता रहा है, वे छोटी मछलियों यानी बिचौलियों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा डा. अरुण शर्मा, जो कि व्यापमं घोटाले की जांच कर रहे थे, उनकी मौत भी कई सवाल खड़े करती है।
सीबीआई ने मौतों व घोटाले की जांच शुरू कर दी है। अब आप देख सकते हैं मौतों की सूची। हम यहां 10 मौतों की सूची दे रहे हैं। पूरी सूची देखने के लिये click करें- व्यापमं में हुईं मौतों की पूरी सूची।
| कितनी मौतें | कब हुई मौत | मृतक का नाम(in Rs) | मृतक की भूमिका | कैसे हुई मौत |
| 1 | 21 नवंबर 2009 | विकास सिंह ठाकुर | पीएमटी में बिचौलिया | दवा के रिएक्शन की वजह से मौत हुई |
| 2 | 12 जून 2010 | श्यामवीर यादव | पीएमटी में बिचौलिया | सड़क दुर्घटना में मौत |
| 3 | 14 जून 2010 | अंशुल सचान | MBBS छात्र जो बिचौलिया था | सागर जिले में कार-ट्रक के बीच भिड़ंत में मौत |
| 4 | 14 जून 2010 | अनुज यूकी | MBBS छात्र जो बिचौलिया था | रायसेन में सड़क दुर्घटना में मौत |
| 5 | 26 अक्टूबर 2010 | ज्ञान सिंह जाटव | MBBS छात्र जो बिचौलिया था | अत्याधिक शराब पीने से मौत |
| 6 | नवंबर 2010 | दीपक वर्मा | पीएमटी में बिचौलिया | सड़क दुर्घटना में मौत् |
| 7 | जनवरी 2012 | नम्रता दामोर | गलत तरीके से दाखिला प्रवेश पाने वाली छात्रा | लापता हुई और फिर उज्जैन में रेलवे ट्रैक के पास शव मिला |
| 8 | 25 अक्टूबर 2012 | आदित्य चौधरी | पीएमटी में बिचौलिया | सागर में आत्महत्या की |
| 9 | 7 नवंबर 2012 | अनंत राम टैगोर | अपने बेटे को गलत तरीके से RPF में नौकरी दिलायी | किडनी के कैंसर से हुई मौत |
| 10 | 28 नवंबर 2012 | अरविंद शाक्य | पीएमटी में बिचौलिया | ग्वालियर में सड़क दुर्घटना में मौत |
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