BBC: क्या है बीबीसी का इतिहास, कौन है इसका मालिक?
बीबीसी अपने शुरुआती समय से ही भारत के खिलाफ अपना एजेंडा चलाने को लेकर सुर्खियों में बना रहता है। इस कारण कई बार बीबीसी पर शिकंजा भी कस चुका है।

मंगलवार (14 फरवरी) को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित ऑफिस में सर्वे अभियान के कारण फिर से यह ब्रिटिश मीडिया खबरों की सुर्खियों में है। वैसे बीबीसी का विवादों से पुराना नाता रहा है। साथ ही भारत विरोधी खबरों को लेकर वो हमेशा से सुर्खियों में रहा है। इसे लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी समेत कई प्रधानमंत्री इस पर एक्शन भी ले चुके हैं। वहीं बीबीसी पर भारत ही नहीं दुनिया के अनेक देशों के खिलाफ एजेंडा चलाने के आरोप लगते रहे हैं और ऐसे में इसकी फंडिंग को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
क्या है बीबीसी का इतिहास?
बीबीसी यानी ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कंपनी की स्थापना यूनाइटेड किंगडम में अक्टूबर, 1922 को एक प्राइवेट संस्था के तौर पर हुई थी। इसके बाद 1926 की हड़ताल के दौरान इसने खूब सुर्खियां बटोरी। तभी एक पार्लियामेंट्री कमेटी की सिफारिश में कहा गया कि इस निजी कंपनी को एक सार्वजनिक क्षेत्र क्राउन-चार्टर्ड संगठन के रूप में रिप्लेस किया जाना चाहिए। फिर साल 1927 में एक पब्लिक कॉरपोरेशन के तहत बीबीसी की स्थापना की गई। इस सिफारिश के बाद बीबीसी एक स्वायत संस्था तो बनी लेकिन ब्रिटिश पार्लियामेंट के प्रति इसकी जवाबदेही तय की गई। इसके ट्रस्ट के सदस्यों को ब्रिटिश क्राउन के द्वारा नियुक्त किया जाता है।
गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे विश्वयुद्ध से पहले साल 1932 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की शुरुआत हुई थी। जो आज दुनियाभर में 40 से ज्यादा भाषाओं में प्रसारित की जाती है। वहीं दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान बीबीसी की टेलीविजन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। फिर, साल 1946 में इसे फिर से शुरू किया गया। इसके बाद साल 1964 में बीबीसी का दूसरा चैनल लॉन्च हुआ। वहीं साल 1967 में बीबीसी ने पहली बार रंगीन टेलीविजन का प्रसारण शुरू किया।
कौन है बीबीसी का मालिक?
कंपनी को बीबीसी ट्रस्ट, इसके एग्जीक्यूटिव बोर्ड और ब्रिटेन सरकार द्वारा अप्रूव्ड रेगुलेटरी अथॉरिटी रेगुलेट करती थी, जिसे ऑफकैम कहा जाता है। हालांकि, साल 2016 में एक स्वतंत्र समीक्षा के बाद ट्रस्ट में कमियां पाई गई और इसे डिजॉल्व कर दिया गया। तब कंपनी को संचालित करने के लिए बीबीसी बोर्ड की स्थापना की गई थी, वहीं ऑफकैम की एकमात्र जिम्मेदारी इसे रेगुलेट करने की रही। अभी फिलहाल कार्यकारी बोर्ड ही इसके काम करने के तौर तरीके की देखरेख करता है। बीबीसी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया कि ट्रस्ट से कार्यकारी मंडल अलग है। वहीं महानिदेशक पद पर बैठा शख्स इसका संचालन करता है। साथ ही सारे प्रोग्राम के डिस्ट्रीब्यूशन की कमांड भी उनके हाथों में ही है।
भारत में बीबीसी पर कब-कब मचा हंगामा?
बीते दिनों ही बीबीसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात दंगों (2002) को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज की थी, जिस पर भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई और उसे बैन कर दिया। बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री को लेकर पूरे देश में बवाल मच गया था। वहीं केंद्र सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को एक प्रौपेगैंडा पीस बताया था। हालांकि, बीबीसी द्वारा इस तरह का कृत्य कोई नया नहीं है। आज कांग्रेस नेता राजनैतिक उद्देश्यों के लिए चाहे जो पक्ष लें, लेकिन एक समय था जब इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के प्रधानमंत्री इस मीडिया संस्थान की गलत और प्रोपेगंडा आधारित प्रसारणों के खिलाफ दर्जनों बार शिकायत और कड़े कदम भी उठाते थे।
जब इंदिरा गांधी ने बीबीसी को किया था बैन
साल 1970 में इंदिरा गांधी सरकार ने बीबीसी को दो साल के लिए बैन कर दिया था। दरअसल फिल्म निदेशक लुईस माल (Louis Malle) ने 'कलकत्ता' और लेखक डॉम मोरेज ने 'The Bewildered Giant' दो शीर्षकों के साथ दो फिल्मों का निर्माण किया। जिसमें भारत की गलत छवि को पेश करते हुए डॉक्यूमेंट्री सीरीज बीबीसी ने बनाई गई थी। जिसके प्रसारण के बाद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को इन दोनों के खिलाफ कई पत्र प्राप्त हुए थे। उच्चायोग ने बीबीसी और ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के समाने मुद्दा उठाया। बावजूद इसके, बीबीसी ने उस साल 22 जुलाई को लुईस माल की एक और फिल्म 'Ghost of India' का प्रसारण कर दिया। इसके तुरंत बाद, भारतीय उच्चायोग ने संज्ञान लेते हुए फिर से बीबीसी और ब्रिटिश विदेश मंत्रालय को आगाह किया कि यह दोनों देशों के आपसी संबंधों को ध्यान में रखते हुए ठीक नहीं है।
तब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं। इन दोनों डॉक्यूमेंट्रीज में भारत में रोजाना की जिंदगी बिगाड़ कर दिखाई गई थी। भारत सरकार ने इस फिल्मांकन को पूर्वाग्रह से ग्रसित और भारत को गलत रूप से पेश करने वाला करार दिया था। इसके बाद इंदिरा सरकार ने बीबीसी को भारत से 2 सालों के लिए बाहर कर दिया गया था। फिर, 1972 में केंद्र सरकार ने बताया कि बीबीसी के लंदन मुख्यालय ने भारत सरकार से संपर्क कर उसके दफ्तरों को खोलने का अनुरोध किया था। उन्होंने भारतीय नियम-कानूनों का पालन करना भी स्वीकार कर लिया है, अतः बीबीसी पर लगाया प्रतिबंध अब हटा लिया गया है।
भारत के खिलाफ बीबीसी के कार्यक्रम पर विवाद
- बीबीसी ने भारतीय टेक्सटाइल को बदनाम करने के लिए एक प्रोग्राम बनाया था। जिस पर राज्यसभा में 3 मार्च 1981 वाणिज्य राज्यमंत्री खुर्शीद आलम खान ने बताया कि भारतीय उच्चायोग के माध्यम से भारत सरकार की विरोधात्मक प्रतिक्रिया बीबीसी के अधिकारियों को पहुंचा दी गयी है। कुछ दिनों बाद, बीबीसी पर 4 अप्रैल 1981 को एक प्रोग्राम टेलीकास्ट हुआ। जिसमें भारत में अंधे लोग, बंबई पुलिस में भ्रष्टाचार, ड्रग व्यापार, गोवा में हिप्पी, महाराष्ट्र में किसान आन्दोलन, कर्नाटक के तंबाकू किसानों की समस्याएं सहित भारत की तत्कालीन स्थिति को नकारात्मक रूप से दर्शाया गया था।
- वहीं 18 जनवरी 1988 को बीबीसी ने फिर एक भारत-विरोधी कार्यक्रम पेश किया। जिसकी भाषा पर तत्कालीन राजीव गांधी सरकार में विदेश मंत्री नटवर सिंह ने लोकसभा में 24 फरवरी 1988 को नाराजगी व्यक्त की थी। इस प्रसारण के खिलाफ तब राजीव गांधी सरकार ने ब्रिटिश सरकार को आगाह किया था।
- बीबीसी ने 12 जून 1984 को खालिस्तानी चरमपंथी आन्दोलन के संस्थापक डॉ. जगजीत सिंह चौहान का एक भड़काऊ और हिंसक इंटरव्यू रेडियो पर प्रसारित किया था। जिसके चलते देशभर में बीबीसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। संसद में भी यह मामला 2 अगस्त 1984 को उठाया गया।
- 17 दिसंबर 1992 को नरसिम्हा राव सरकार में विदेश राज्यमंत्री आर.एल. भाटिया ने राज्यसभा में बताया कि "बीबीसी ने 'Nuclear India: A dream gone sour' नाम से एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई थी।" उन्होंने आगे बताया कि यह फिल्म परमाणु उर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग में भारत की उपलब्धियों को कमतर दिखाने का प्रयास है। इन गलत सूचनाओं के खिलाफ लन्दन में हमारे उच्चायोग ने भारत के खिलाफ लगाये आरोपों का ठीक से खंडन किया है।"
- मार्च, 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट ने बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री को बैन करने के फैसले को सही ठहराया था। तब बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में दिल्ली के निर्भया गैंग रेप के दोषी मुकेश सिंह को दिखाया जा रहा था। इस पर डॉक्यूमेंट्री के इंटरनेट प्रसारण पर भी सरकार ने रोक लगा दी थी।
-
Iran US War: सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत किन शीर्ष नेताओं की हुई मौत? युद्धविराम के बाद बर्बादी का हिसाब -
'मेरे पति ने 9 महिलाओं संग बनाया संबंध', फेमस एक्ट्रेस ने बयां किया दर्द, 14 साल साथ रहे, फिर टूटा रिश्ता -
'Exclusive है, पैसे दो सबकुछ देखो', कौन हैं Vishnu Priya जिनके फोटोज ने मचाई तबाही? क्या है Paid Subscription? -
पिता के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, स्मृति मंधाना-पलाश मुच्छल करेंगे शादी? ब्रेकअप के बाद क्या हो गया पैचअप! -
Iran US Ceasefire: सीजफायर नहीं, तो बर्बाद हो जाता पाकिस्तान! शहबाज शरीफ के 'नापाक' प्लान का हुआ पर्दाफाश -
Iran US Ceasefire: 'तुरंत देश छोड़ें भारतीय', सीजफायर के बाद इंडिया की एडवाइजरी, Helpline Number जारी -
15 की उम्र में Janhvi Kapoor संग हुई थी भयावह घटना, Photos देख श्रीदेवी की बेटी का दिल दहला, क्या हुआ था? -
Ruchi Vira कौन हैं, RSS को 'देश के लिए नासूर' बताने वालीं? Akhilesh Yadav से क्या है 'पावर कनेक्शन'? -
Iran US Ceasefire: 'यह युद्ध का अंत नहीं है', क्या हैं सशर्त युद्धविराम के लिए ईरान की 10 बड़ी मांगें? -
Iran-US War-14 DAYS CEASEFIRE: पाकिस्तानी प्रस्ताव के पीछे Trump की स्क्रिप्ट? शरीफ की बेवकूफी से खुली पोल -
Khamenei Health Update: सीजफायर या धोखा? मोजतबा खामेनेई कोमा में, फिर पर्दे के पीछे किसने पक्की की ईरान की डील -
Crude Oil Price Today: ट्रंप के एक 'सीजफायर' से दुनिया भर में गिरे तेल के दाम! अब कितने पर पहुंचा क्रूड ऑयल?












Click it and Unblock the Notifications