SIM Swapping Fraud: साइबर क्रिमिनल्स का नया हथियार, क्या है सिम स्वैपिंग और इससे कैसे बचें?
साइबर अपराध के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। साइबर अपराधी इसके लिए नये-नये तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल की घटनाओं में SIM Swapping के जरिए साइबर अपराधियों ने करोड़ों रुपये की ठगी की है।

डिजिटाइजेशन के दौर में साइबर अपराध की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। साइबर अपराधी लोगों को बहला-फुसलाकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहे हैं। दरअसल, डिजिटल इकोनॉमी की राह में साइबर क्राइम सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। सरकारी संस्थान CERT-In के डाटा के अनुसार, साल 2019, 2020 और 2021 में साइबर क्राइम के क्रमशः कुल 394,499, 11,58,208 और 14,02,809 मामले रिपोर्ट किए गए हैं। साल 2019 के मुकाबले 2020 और 2021 में साइबर अपराध के मामले तीन गुने तक बढ़े हैं। सरकार ने लोकसभा में बताया कि साल 2022 के जून तक कुल 674,021 साइबर अपराध के मामले रिपोर्ट किए गए हैं।
हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली से बड़े और नये तरह का साइबर क्राइम सामने आया है। जिसमें एक सिक्योरिटी सर्विसेज चलाने वाले व्यापारी के अकाउंट से ठगों ने 50 लाख रुपये उड़ा दिये। आमतौर पर साइबर अपराधी बहला-फुसलाकर OTP (वन टाइम पासवर्ड) ले लेते हैं, या फिर किसी लिंक पर क्लिक करवा कर उनके अकाउंट की जानकारी चोरी करवाते है, लेकिन इस घटना में अपराधियों ने व्यापारी को मिसकॉल करके परेशान किया और अकाउंट से इतने बड़ी चोरी को अंजाम दिया। शुरुआती जांच में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इसे SIM Swapping तरीके के जरिए की जाने वाली ठगी बताया है।
क्या है SIM Swapping Fraud?
डिजिटाइजेशन के इस दौर में सभी यूजर्स के बैंक अकाउंट उनके आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से लिंक होते हैं। बिना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के लिंक के यूजर्स UPI और किसी भी तरह का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन नहीं कर सकते हैं। डिजिटल लेन-देन जितना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाता है, उतना ही साइबर ठगों को विभिन्न तरीकों से ठगी को अंजाम देने की सहूलियत भी देता है। जैसा कि हम जानते हैं कि UPI या अन्य किसी डिजिटल लेन-देन के लिए OTP यानी वन टाइम पासवर्ड की जरूरत होती है, जो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही आता है।
सिम स्वैपिंग के जरिए साइबर अपराधी किसी यूजर के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिमकार्ड बदल लेते है, जिसकी वजह से किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए आने वाला OTP साइबर अपराधियों द्वारा एक्टिवेट किए गये नये सिम पर आता है। इसमें यूजर को कानों-कान खबर भी नहीं होती और उसके अकाउंट से पैसे उड़ा लिए जाते है।
इस तरह होती है SIM Swapping
इसके लिए साइबर अपराधी यूजर के सिमकार्ड के डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, यूजर के डॉक्यूमेंट्स का एक्सेस करके अपराधी टेलीकॉम ऑपरेटर से उसी नंबर का डुप्लीकेट सिमकार्ड जारी करवा लेते हैं और इस तरह की घटना को अंजाम देना उनके लिए आसान हो जाता है। गौरतलब है कि सिम स्वैपिंग की वजह से यूजर के बैंक अकाउंट, क्रेडिट कार्ड आदि का कंट्रोल साइबर अपराधी के हाथ में चला जाता है।
अब सवाल पैदा होता है कि सायबर अपराधियों को किसी यूजर के डाक्यूमेंट्स कैसे मिलते है? इसके लिए साइबर अपराधी जिसे ठगना चाहते हैं, उसे कॉल करते है। फिर उस यूजर को नेटवर्क में आ रही दिक्कत अथवा 5G सर्विस की नयी सिम लेने के लिए ऑफर देते है। जब यूजर उनकी बातों में आ जाता है तो सायबर अपराधी उन्हें मोबाइल नंबर पोर्ट (MNP) के जरिए नया सिम इश्यू करवाने के लिए कहते हैं। यूजर्स बढ़िया कवरेज या अच्छे ऑफर्स के लालच में इन साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं और नयी सिम इश्यू करवाने के लिए अपने डॉक्यूमेंटस दे देते हैं। डॉक्यूमेंट प्राप्त होने के बाद साइबर अपराधी टेलीकॉम ऑपरेटर्स से संपर्क करके SIM Swapping को अंजाम देते हैं। इसमें कई बार टेलीकॉम ऑपरेटर्स के एक्जीक्यूटिव्स की मिली-भगत भी होती है।
SIM Swap फ्रॉड से कैसे बचें?
SIM Swap फ्रॉड से बचने के लिए यूजर्स को कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए। सबसे पहले अपने डॉक्यूमेंट्स किसी के साथ शेयर नहीं करने चाहिए। अगर, उन्हें नेटवर्क में दिक्कत आ रही है या फिर अन्य कोई समस्या है, तो टेलीकॉम ऑपरेटर्स के आधिकारिक कस्टमर केयर या इंस्टैंट शिकायत वाले नंबर 198 पर कॉल करना चाहिए और दिए गए सुझाव का पालन करना चाहिए।
सिम बदलवाने के लिए यूजर्स को टेलीकॉम ऑपरेटर कंपनी के नजदीकी ऑथोराइज्ड स्टोर पर जाना चाहिए और डॉक्यूमेंट सबमिट करके सिम इश्यू करवाना चाहिए। ऐसे में डुप्लीकेट सिम साइबर अपराधियों के हाथ लगने की संभावना कम होती है।
अगर, आपके मोबाइल में कुछ देर तक नेटवर्क गायब हो, तो तुरंत नजदीकी स्टोर विजिट करें और टेलीकॉम ऑपरेटर्स से संपर्क करें। साइबर अपराधी जब अपने डिवाइस में डुप्लीकेट यानी स्वैप किया गया नया सिम कार्ड एक्टिवेट करेंगे आपका सिम कार्ड डिएक्टिवेट हो जाता है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स से संपर्क करके आप उस नंबर की सिम को ब्लॉक करा सकते है।
डुप्लीकेट सिम कार्ड जारी करवाने के बाद कई बार साइबर क्रिमिनल्स जान-बूझकर आपको लगातार कॉल करेंगे ताकि आप अपना नंबर स्विच ऑफ कर लें। साइबर अपराधी इसका फायदा उठाकर डुप्लीकेट सिमकार्ड को एक्टिवेट करते हैं। जब आपको बार-बार किसी नंबर से ब्लैंक कॉल आ रहे हों तो अपने फोन को ऑफ या फ्लाइट मोड में न डालें, बल्कि फोन को साइलेंट करें। इसके बाद टेलीकॉम ऑपरेटर को कॉल करके पता लगाएं कि कहीं डुप्लीकेट सिम कार्ड तो जारी नहीं किया गया है।
सबसे आखिरी बात, अगर आपके साथ किसी भी तरह का साइबर फ्रॉड होता है तो आप सरकार द्वारा जारी किए गए वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है।












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