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Moringa Benefits: क्या होता है मोरिंगा, क्यों बढ़ रही है दुनिया भर में इसकी मांग?

Moringa Benefits: मोरिंगा अर्थात सहजन एक ऐसा पौधा है जिसकी हजारों वर्षों से स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रशंसा की जाती रही है। इसका वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा है। मोरिंगा को ड्रम स्टिक्स, हॉर्सरैडिश ट्री, बेन ऑयल ट्री, बेंजोलिव ट्री के नाम से भी जाना जाता है। भारत में इसे सहजना, सेंजन, मुनगा इत्यादि नामों से जानते हैं। यह स्वस्थ एंटीऑक्सिडेंट और बायोएक्टिव प्लांट यौगिकों में बहुत समृद्ध है।

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मोरिंगा के सैकड़ों फायदे

यह विटामिन A, विटामिन B1, विटामिन B2, विटामिन B3, विटामिन B6, विटामिन C, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, जिंक का समृद्ध स्रोत है और कुपोषण से लड़ने में बहुत सहायता करता है। इसकी पत्तियां में 25 प्रतिशत प्रोटीन और 25 प्रतिशत फाइबर होता है।

इस पौधे को एक शक्तिशाली सुपरफूड माना जाता है, और पृथ्वी पर सबसे पोषक तत्वों से भरपूर पौधों में से एक है। यह सूखा प्रतिरोधी पेड़ प्रतिरक्षा और चयापचय में मदद करता है।

यह कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करने के लिए एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम करता है। मोरिंगा दर्द और सूजन को कम करने में भी मदद कर सकता है और इसमें एंटीफंगल, एंटीवायरल, एंटीडिप्रेसेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं।

यही नहीं, यह इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में बहुत मदद करता है, हार्मोन प्रोडक्शन को विनयमित करता है, कैंसर और डायबिटीज से लड़ने में मदद करता है, दांतों को मजबूत करने में मदद करता है, मसूड़े की बीमारी और दांतों की सड़न से बचने में मदद करता है, यह सांसों को भी तरोताजा करता है, बीमार होने की संभावना को कम करता है।

मोरिंगा को नियमित रूप से लेने पर कोई भी घाव जल्दी भर जाता है, एनर्जी लेवल को बहुत हद तक बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है, लीवर की रक्षा करता है। मोरिंगा की पत्तियां पाचन संबंधी विकारों के खिलाफ फायदेमंद होती हैं, और जो लोग गैस्ट्रिक, कब्ज जैसी समस्याओं से पीड़ित है उन्हें मोरिंगा संयमित मात्रा में जरूर लेनी चाहिए।

मोरिंगा की पत्तियों में एंटीबायोटिक और रोगाणुरोधी गुण होते हैं और पाचन में सुधार करने में मदद करती है। एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्वों की प्रचुरता के कारण मोरिंगा की पत्तियां स्वास्थ्य और त्वचा और बालों की उपस्थिति में सुधार करती हैं। मोरिंगा की पत्तियां डैंड्रफ और बाल झड़ने की समस्या को कम करती है। अध्ययनों से पता चलता है कि मोरिंगा की पत्तियां अल्जाइमर रोग के लक्षणों से सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।

मोरिंगा के नुकसान

मोरिंगा से बहुत कम नुकसान होता है। हालाँकि, कुछ मामलों में सावधानी बरतने की जरुरत होती है। जैसे मोरिंगा को ज्यादा मात्रा में लेने से पेट खराब, गैस की समस्या, दस्त और सीने में जलन पैदा हो सकती है। इसकी जड़ों, फूलों और छाल में पाए जाने वाले कुछ कैमिकल गर्भवती महिलाओं के लिए समस्या पैदा कर सकते और कई मामलों में गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है। जो महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती है उन्हें मोरिंगा से दूर रहना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चों के लिए सही नहीं है। मोरिंगा के बीजों को खाने से बचना चाहिए क्योंकि वे इम्यून सेल्स में विषाक्तता पैदा कर सकते हैं।

मोरिंगा की बढ़ती मांग

भारत में, मोरिंगा को शोभंजना कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'बहुत शुभ वृक्ष'। गौरतलब है कि भारत मोरिंगा का बड़ा बाजार है और यह ₹700 करोड़ का मार्केट बन सकता है। दरअसल, मोरिंगा का 80 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता है, जिससे देश को करोड़ों की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। भारत के अलावा इसके पेड़ अब घाना, फिलीपींस, नाइजीरिया, केन्या, रवांडा, नाइजर, मोजाम्बिक, कंबोडिया और हैती में उगाये जाते हैं।

भारत में मोरिंगा की खेती मुख्य रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश के साथ-साथ मध्य भारत में भी होती है। इसके पत्तों का निर्यात तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और ओडिशा में एक महत्वपूर्ण उद्योग है, जो सालाना 26-30 प्रतिशत की गति से बढ़ रहा है। इसके पत्तों के मुख्य आयातक चीन, अमेरिका, कनाडा, दक्षिण कोरिया और जर्मनी सहित यूरोपीय देश हैं।

यह भी पढ़ें: Mangrove Forests: मैंग्रोव वन क्या होते हैं और जलवायु परिवर्तन में इनका क्या योगदान है?

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