Year of Millets: क्या है मिलेट मिशन 2023? क्यों दे रही सरकार इस पर इतना जोर?
सदियों से भारत का परंपरागत आहार रहे मोटे अनाज, जिन्हें अंग्रेजी में मिलेट्स कहते हैं, के महत्त्व पर फिर से ध्यान दिया जाने लगा है।

Year of Millets: कुछ दिन पहले सभी सांसदों के लिए एक मिलेट्स लंच का आयोजन किया गया जिसमें प्रधानमंत्री सहित सभी पार्टियों के बड़े नेताओं ने विशेष व्यंजनों का स्वाद चखा। देश के लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने साथी विधायकों के साथ मिलेट्स से बना विशेष भोजन कर रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने मिलेट मिशन को बढ़ावा देने के लिए अपने साथी विधायकों के साथ मिलेट लंच का आयोजन किया था।
क्या आपने गौर किया है उसके पीछे का कारण, क्यों सरकार मिलेट्स को इतना बढ़ावा दे रही है और आखिरकार है क्या मिलेट मिशन 2023?
क्या है मिलेट?
मिलेट जिन्हें हिंदी में मोटा अनाज (बाजरा, जुआर, कांगनी, रागी इत्यादि) कहा जाता है। यह पौष्टिक अनाज होते हैं जो फाइबर, खनिज और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। मोटे अनाज अकसर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में उपयोग किए जाते हैं, और दलिया, ब्रेड, और साथ ही साइड डिश के रूप में भी पकाया जाता है। मोटे अनाजों को दुनिया भर में व्यापक रूप से उगाया एवं भोजन में इस्तेमाल किया जाता है।
क्या है मिलेट मिशन 2023?
भारत की मांग पर संयुक्त राष्ट्र ने 5 मार्च 2021 को वर्ष 2023 को 'इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट' घोषित किया था और भारत की इस मांग को दुनिया के 72 देशों का समर्थन मिला था। 3 मार्च 2021 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाए गए एक संकल्प में 2023 को 'इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट' घोषित करने का निर्णय लिया। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने कुछ दिनों पहले ही इटली के रोम में 'इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट-2023 (IYM-2023)' की शुरुआत की है।
'मिलेट मिशन' पर किस-किस ने क्या-क्या कहा?
● प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि "भारत दुनिया भर में IYM2023 समारोह का नेतृत्व करेगा और मोटे अनाज की खेती और खपत को बढ़ावा देने के लिए अभियान आयोजित करेगा।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 'मोटे अनाजों के लिए वैश्विक हब' के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ IYM 2023 को 'जन आंदोलन' बनाने के लिए अपना दृष्टिकोण भी साझा किया है।
● केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि "IYM2023 फूड बास्केट के एक प्रमुख घटक के रूप में मोटे अनाज के वैश्विक उत्पादन और प्रचार को बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा"। नरेंद्र तोमर ने यह भी कहा कि "मोटे अनाज का उत्पादन और खपत बढ़ाने के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय मिशन मोड में काम कर रहे है।"
● कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि "राष्ट्रों को एक स्थायी भविष्य विकसित करने के लिए सहयोग करने की आवश्यकता है, और मोटे अनाज इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।"
● FAO के डायरेक्टर जनरल ने कहा कि "IYM2023 हमें जलवायु कार्रवाई में तेजी लाने के साथ-साथ वैश्विक पोषण, खाद्य सुरक्षा, अच्छी नौकरियों और अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने की क्षमता वाली फसलों का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा।"
भारत में मिलेट की स्थिति
भारत में लगभग 6 से 7 तरीके के मिलेट उगाए जाते हैं, जिसमें पर्ल मिलेट (बाजरा), फिंगर मिलेट (रागी), फॉक्सटेल मिलेट (कंगनी), प्रोसो मिलेट (बारगु), सोरघुम (जुआर), लिटिल मिलेट (समाई), कोदो मिलेट (अरका) शामिल हैं। FAO का डेटा बताता है कि, भारत में वर्ष 2020-21 में 12 मिलीयन टन मोटे अनाजों का उत्पादन हुआ और भारत 41% की हिस्सेदारी के साथ दुनिया में मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक है। आंकड़े यह भी बताते है कि भारत दुनिया में मोटे अनाज का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत ने वर्ष 2021-22 में $64.28 मिलियन मूल्य के मोटे अनाजों का एक्सपोर्ट किया जो कि वर्ष 2020-21 में $59.75 मिलीयन था। पूरे एशिया में मोटे अनाज के उत्पादन में भारत का 80% हिस्सा है। अगर बात की जाए देश में सबसे ज्यादा मोटा अनाज उगाने वाले राज्यों की तो वे राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश हैं।
विश्व में मिलेट की स्थिति
मिलेट एक प्रकार का अनाज है जो दुनिया के कई हिस्सों में उगाया जाता है, विशेष रूप से सूखे देशों में जहां अन्य फसलों का पनपना मुश्किल है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के आंकड़ों के अनुसार, मोटे अनाज के मुख्य उत्पादक में भारत, चीन, नाइजर, अफ्रीका, नाइजीरिया, रूस, अमेरिका शामिल हैं। मोटे अनाज का प्रोडक्शन साल दर साल बढ़ रहा है, वर्ष 2021 में मोटे अनाज का कुल प्रोडक्शन 45 मिलयन टन था।
IYM2023 के लिए सरकार क्या कर रही?
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि मिलेट की खपत, बाजार और जागरूकता फैलाने के लिए 66 से ज्यादा स्टार्टअप्स को ₹6.25 करोड़ से ज्यादा की राशि दी गई है, जबकि 25 स्टार्टअप्स को और फंडिंग की मंजूरी दी गई है। भारत में मोटे अनाज की वैल्यू चेन के लिए 500 से भी अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च (IIMR) ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 250 स्टार्टअप को इनक्यूबेट किया है। मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए रेलवे और विमान कंपनियों द्वारा यात्रा के दौरान मिलेट सर्व किए जाएंगे और अलग-अलग देशों के भारतीय दूतावास भी मिलेट फूड फेस्टिवल का आयोजन करेंगे। सरकार ने देश के सभी राज्यों को भी मिलेट फूड फेस्टिवल का आयोजन करने के लिए पत्र लिखे हैं। ऐसे कई दसियों प्रयास हैं जो सरकार मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए कर रही है।
भारत मोटे अनाजों पर इतना ज़ोर क्यों दे रहा?
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हाल ही में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मोटे अनाज को G20 मीटिंग्स के मेनू में भी शामिल किया जाएगा और कुछ दिनों पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के सांसदों के साथ मिलेट लंच का लुत्फ उठाया था। लेकिन भारत मोटे अनाज पर इतना ज़ोर क्यों दे रहा है? यह संभव है कि भारत कई कारणों से मोटे अनाजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि मिलेट सूखा-प्रतिरोधी फसल है जिसे खराब मिट्टी और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। जिससे यह भारत के उन हिस्सों में एक महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत बन जाता है जहाँ अन्य फसलें नहीं पनप सकती हैं। भारत के कुछ हिस्सों में बाजरा एक मुख्य भोजन है, और इसकी खेती और खपत को बढ़ावा देने को स्थानीय समुदायों का समर्थन करने और पारंपरिक खाद्य संस्कृतियों को संरक्षित करने के तरीके के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ा कारण है मिलेट्स में पाए जाने वाले पोषक तत्व जो अनेक रोगों से बचाव करते हैं।
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