Team Jorge: क्या है इजराइल की जासूसी फर्म "टीम जोर्ज"? कैसे हुआ इसका खुलासा?

इजराइल की एक जासूसी फर्म पर दुनिया के 30 से अधिक देशों के चुनावों में दखल देने का आरोप है, जिसे टीम जोर्ज के एक्जीक्यूटिव ने स्वीकार किया है।

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दुनियाभर में अपनी तकनीक का लोहा मनवाने वाले इजराइल की एक फर्म पर एक बार फिर से गंभीर आरोप लगे हैं। पहले पेगासस और अब टीम जॉर्ज, जी हां! ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' ने अपनी एक रिपोर्ट में इजरायली फर्म 'टीम जोर्ज' पर दुनिया के 20 से ज्यादा देशों में 30 से ज्यादा चुनावों को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। यह रिपोर्ट 'इंवेस्टिगेशन' पर आधारित है, जिसके कुछ स्टिंग वीडियो भी रिपोर्ट में दिखाये गये हैं।

यह रिपोर्ट कई विदेशी पत्रकारों के एक कंसोर्टियम की जांच के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि 'टीम जोर्ज' ने एक सॉफ्टवेयर बनाया है। उसके जरिए पूरी दुनिया में हैकिंग, हेरफेर और फेक न्यूज फैलाकर संबंधित देश के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की है। वैसे इस कथित 'टीम जोर्ज' के मुखिया का नाम तल हनान है। अब सवाल ये है कि आखिर क्या है ये 'टीम जोर्ज' और क्या ये किसी सॉफ्टवेयर के जरिए किसी देश के चुनाव को भी प्रभावित कर सकता है? गौर करने वाली बात ये है कि इससे पहले पेगासस (इजराइली स्पाई सॉफ्टवेयर) का मामला भी दुनिया के सामने आ चुका है।

क्या 20 देशों में चुनावों को किया प्रभावित?
'द गार्डियन' की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि इजराइली फर्म सोशल मीडिया पर फर्जी कैंपेन चलाकर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करती थी। 'टीम जोर्ज' के अधिकारियों ने यह कबूल किया है कि उन्होंने हैकिंग के जरिए दुनियाभर के 20 देशों के चुनावों में हस्तक्षेप किया है। इनमें मुख्य रूप से जिन देशों के चुनावों को प्रभावित करने की बात सामने आ रही है। उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, मैक्सिको, सेनेगल, भारत और सऊदी अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?
ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक आठ महीने की जांच के बाद यह पता चला कि इजरायली फर्म 'टीम जोर्ज' ने दुनियाभर में 30 से ज्यादा चुनावों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। इस फर्म का मुखिया तल हनान है जो तेल अवीव में रहता है और वो इजराइल की स्पेशल फोर्स में काम कर चुका है। वो नकली नाम 'जोर्ज' (Jorge) के नाम से फर्म चला रहा था और इसलिए उसकी यूनिट को 'टीम जोर्ज' के नाम से जाना जाता है। यह जांच पेरिस के एक नॉन-प्रॉफिट संगठन 'फॉरबिडन स्टोरीज' और 'द गार्डियन' से जुड़े 30 पत्रकारों की एक टीम यानि इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईसीजे) ने की है। रिपोर्ट में यह बताया गया कि 'टीम जोर्ज' एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर फेक कैंपेन चलाता था। इसकी टीम में कई खुफिया हैकिंग एक्सपर्ट हैं। ये सभी हैकिंग, फेक न्यूज, डिफेंस, खुफिया जानकारी वैश्विक सुरक्षा, रक्षा और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में माहिर हैं। वहीं 'टीम जोर्ज' मामले का खुलासा करने वाले पत्रकारों के संगठन में ले मोंड, डेर स्पीगेल और एल पैस समेत दुनिया के 30 बड़े पत्रकार शामिल थे।

'टीम जोर्ज' कैसे प्रभावित कर रही थी चुनाव?
दरअसल टीम जोर्ज अपने क्लाइंट को एक सॉफ्टवेयर मुहैया करवाता था। इसका नाम एडवांस इम्पैक्ट मीडिया सॉल्यूशन (AIMS) था। जांच के दौरान टीम जोर्ज से जुड़े कुछ लोगों का स्टिंग भी किया गया था। जांच टीम और तल हनान के बीच तकरीबन 6 घंटे से ज्यादा लंबी चली सीक्रेट मीटिंग में खुलासा हुआ कि किस तरह से इंटेलिजेंस और हैकिंग तकनीक से जीमेल और टेलीग्राम अकाउंट का एक्सेस लिया जाता था। AIMS के अलावा, हनान ने जांच करने वाले रिपोर्टर्स को एक 'ब्लॉगर मशीन' के बारे में भी बताया, जो एक वेबसाइट बनाती थी। उसके बाद वे इसे AIMS से कंट्रोल होने वाली सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए इंटरनेट पर फेक न्यूज फैलाने का काम करते थे। टीम जोर्ज का सबसे सीक्रेट टूल AIMS है। यह ट्विटर, लिंक्डइन, फेसबुक, टेलीग्राम, जीमेल, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर हजारों फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर उसे नियंत्रित करता है। इसके अलावा उसने क्रेडिट कार्ड्स, बिटकॉइन वॉलेट और एआईआरएनबी पर अमेजन एकाउंट भी बना रखे हैं।

कैसे हुआ 'टीम जोर्ज' का खुलासा?
इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईसीजे) की जांच में शामिल एक रिपोर्टर को उसके किसी सोर्स ने जानकारी दी थी कि इजरायल में एक कंपनी है, जो लाखों डॉलर लेकर चुनावों में एजेंडा फैलाने का काम करती है। हालांकि, सोर्स को ये नहीं पता था कि इस कंपनी का नाम क्या है, उसे चलाता कौन है और इसमें कौन-कौन शामिल हैं? क्योंकि जोर्ज उर्फ तल हनान अपने क्लाइंट से बात करने के लिए कई सारे ईमेल अकाउंट्स का इस्तेमाल करता है। वहीं उसका मोबाइल नंबर भी इंडोनेशिया में रजिस्टर्ड था। जबकि तल हनान अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल पर खुद को एक कारोबारी, सिक्योरिटी और एक्सप्लोसिव का एक्सपर्ट बताता है।

गार्डियन की खबर के मुताबिक संभावित ग्राहक बन कर रिपोर्टर्स की टीम ने जोर्ज से संपर्क किया। जांच कर रहे रिपोर्टर्स को लंबे समय तक नहीं पता चला कि 'जोर्ज' का असली नाम क्या था? तभी अंडरकवर रिपोर्टर्स से आखिरी मीटिंग के दौरान जोर्ज ने बातों-बातों में कह दिया कि वो पहले कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ा था। इस आधार पर जांच आगे बढ़ी। तब खुलासा हुई कि जोर्ज का नाम तल हनान है और वह डेमोमैन इंटरनेशनल का सीईओ है।

लाखों डॉलर लेता है तल हनान?
तल हनान ने अंडरकवर रिपोर्टर्स के सामने खुलासा किया उसने प्रेसिडेंट लेवल के 33 चुनावों में कैंपेन चलाया है और 27 में उसे कामयाबी मिली है। साथ ही उसने कहा कि वह विभिन्न मुद्राओं में भुगतान स्वीकार करता है, जिसमें बिटकॉइन, या नकद जैसी क्रिप्टोकरेंसी शामिल है। उसने कहा कि वह चुनाव में हस्तक्षेप के लिए 6 मिलियन यूरो से 15 मिलियन यूरो तक के बीच चार्ज करेगा।

हालांकि, गार्डियन को कुछ लीक हुए ईमेल से पता चला कि तल हनान ने साल 2015 में एक लैटिन अमेरिकी देश में आठ सप्ताह के अभियान में शामिल होने के लिए अब बंद हो चुकी ब्रिटिश कंसल्टेंसी कैंब्रिज एनालिटिका से 160,000 डॉलर मांगे थे। जबकि साल 2017 में फिर से कैंब्रिज एनालिटिका के लिए काम करने के लिए उसने 4 लाख डॉलर से 6 लाख डॉलर प्रति माह की मांग की थी।

कांग्रेस का मोदी सरकार पर सवाल
अब इस मामले पर भारत में एक बार फिर से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इजराइल की टीम जोर्ज ने भारत सहित कई देशों में नकली सोशल मीडिया अभियान संचालित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है। हम चाहते हैं कि मोदी सरकार अपनी चुप्पी तोड़ें और बताएं कि देश में लोकतंत्र को बचाने में उसका क्या योगदान रहा है। भारत की चुनावी प्रक्रिया में इसका सीधा असर पड़ रहा है और इसकी जांच होनी चाहिए। इस दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, अगर सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है, तो इसका मतलब है कि वह देश के लोकतंत्र और चुनावों में हस्तक्षेप करने के लिए विदेशी फर्मों से मदद मांग रही है। भारतीयों के डेटा को एक विदेशी फर्म को सौंपकर समझौता किया जा रहा है।

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