Brain-Eating Amoeba: कहां से आया दिमाग खाने वाला अमीबा, कैसे करें बचाव?

Brain-Eating Amoeba: केरल के अलप्पुझा जिले में दिमाग खाने वाले 'अमीबा' जैसे दुर्लभ मस्तिष्क संक्रमण के कारण एक 15 साल के युवक की मौत हो गयी है। वह 'प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस'(पीएएम) से संक्रमित था। इस मामले पर जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को दूषित पानी में न नहाने की सलाह दी है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस मामले पर कहा कि पहले भी राज्य में इस दुर्लभ बीमारी के पांच मामले सामने आ चुके हैं।

पहला मामला 2016 में अलप्पुझा के तिरुमला वार्ड में सामने आया था। उसके बाद 2019 और 2020 में मलप्पुरम में दो मामले सामने आये थे और 2020 में कोझिकोड में एक और 2022 में त्रिशूर में एक मामला पाया गया था। इसके संक्रमण का असर केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में देखा जा रहा है। साल 2023 के मार्च महीने में ही अमेरिका के फ्लोरिडा में रहने वाले एक शख्स की इसी संक्रमण के कारण कुछ ही दिनों में मौत हो गयी थी।

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पीएएम क्या है?

पीएएम, नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा के जरिये फैलता है। यह अमीबा मुख्य रूप से झीलों, नदियों के ताजे पानी में रहता है। अमेरिका स्वास्थ्य एजेंसी, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक इस अमीबा के जरिये ब्रेन इंफेक्शन तभी होता है जब यह नाक के जरिये शरीर में प्रवेश करता है।

एक बार कोई शख्स इससे संक्रमित हो जाता है तो आमतौर वह जानलेवा ही साबित होता है। हालांकि कुछ लोगों का एम्फोटेरिसिन बी, एजिक्थ्रोमाइसिन, फ्लुकोनाजोल, रिफैम्पिन, मिल्टेफोसिन और डेक्सामेथासोन जैसी दवाओं के जरिए इलाज हुआ है। हालांकि, नेगलेरिया फाउलेरी से संबंधित कोई पुख्ता जानकारी दुनिया की किसी भी संस्था या सरकार के पास नहीं है।

क्या है इसका इतिहास

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा पब्लिश रुक्कैया सिद्दीकी और नाविद अमहद खान के रिसर्च पेपर 'Primary Amoebic Meningoencephalitis Caused by Naegleria fowleri: An Old Enemy Presenting New Challenges' में बताया गया है कि नेगलेरिया फाउलेरी को पहली बार 1899 में खोजा गया था। लेकिन, डॉक्टरों के पास इससे संबंधित कोई भी जानकारी नहीं थी।

इसके बाद साल 1937 में नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण के बारे में अमेरिका के वर्जीनिया शहर में पता चला। साल 1965 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में इस संक्रमण का पता चला, जहां वैज्ञानिक जानकारी के साथ इस मामले को दर्ज किया गया। उसके बाद से अब तक दुनियाभर में सैंकड़ों लोगों की मौत इस नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा से हो चुकी है, लेकिन आजतक इसकी दवा वैज्ञानिक व डॉक्टर नहीं बना पाये हैं।

दुनियाभर में इसके सबसे ज्यादा केस संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप (फ्रांस) में दर्ज किये गये हैं। हालांकि, पूरी दुनिया में इससे संबंधित मौतों का आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। जबकि कोरिया रोग नियंत्रण एवं रोकथाम एजेंसी (केडीसीए) के मुताबिक साल 2018 तक दुनियाभर में 381 लोगों की मौत के मामले सामने आये थे।

अमेरिका में अब तक 153 लोगों की हुई मौत

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक इस संक्रमण के कारण मृत्युदर 97% से भी ज्यादा है। अमेरिका में साल 1962 से लेकर 2022 तक कुल मिलाकर 157 केस दर्ज किये गये हैं। जिसमें से अब तक केवल 4 लोगों को ही बचाया जा सका है।

पीएएम के लक्षण क्या है?

पीएएम के पहले लक्षण संक्रमण के एक से 12 दिनों के भीतर दिखने लगते हैं। शुरुआत में यह मेनिनजाइटिस के लक्षणों के समान हो सकते हैं, जो सिरदर्द और बुखार हैं। बाद के चरणों में व्यक्ति गर्दन में अकड़न, दौरे पड़ना, मतिभ्रम और यहां तक कि मरीज कोमा में भी जा सकता है। यह संक्रमण इंसान के दिमाग में तेजी से फैलता है और औसतन लगभग पांच से सात दिनों के भीतर उसकी मृत्यु हो जाती है।

पीएएम कहां आसानी से फैलता है?

सीडीसी के मुताबिक नेगलेरिया फाउलेरी प्राकृतिक रूप से मीठे पानी की झीलों, नदियों और गर्म झरनों और मिट्टी में होता है। इस अमीबा के झीलों, तालाबों और नदियों के तल में रहने की अधिक संभावना होती है। इसलिए लोगों को उथले, गर्म ताजे पानी में खुदाई करने या तलछट को हिलाने से बचना चाहिए।

यह संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब उस क्षेत्र का तापमान या पानी का तापमान गर्म हो और पानी का लेवल कम होता है। जैसे अमेरिका में अधिकांश संक्रमण फ्लोरिडा और टेक्सास जैसे दक्षिणी राज्यों में पाया गया है। जबकि थाईलैंड और मालदीव जैसे द्वीपों (देश) के किनारों पर भी पानी का लेवल कम होने के साथ-साथ दोपहर के वक्त वहां का पानी गर्म हो जाता है, जहां खतरा ज्यादा हो सकता है।

वैसे बहुत ही दुर्लभ ही ऐसा देखने को मिलता है कि नेगलेरिया फाउलेरी स्विमिंग पूल, स्प्लैश पैड, सर्फ पार्क, या अन्य मनोरंजक स्थानों में पाया गया है। जिनका रखरखाव खराब है या उनमें पर्याप्त क्लोरीन नहीं होती है।

सीडीसी के मुताबिक नेगलेरिया फाउलेरी 46°C तक के उच्च तापमान में सबसे अच्छा बढ़ता है और कभी-कभी इससे भी अधिक तापमान पर भी जीवित रह सकता। हाल के विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता के कारण झीलों और नदियों के तापमान में वृद्धि हुई है। ये परिस्थितियां 'अमीबा' को बढ़ने के लिए अधिक अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। अब तक, नेगलेरिया फाउलेरी दुनिया के सभी महाद्वीपों में पाया गया है।

कैसे करें इस जानलेना बीमारी से बचाव?

हालांकि, इस संक्रमण की कोई दवा तो नहीं है लेकिन सीडीसी के मुताबिक यह संक्रमण ज्यादातर जुलाई, अगस्त, सितंबर के महीने में ही होता है और ज्यादातर नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। इसलिए इस मौसम में नदी, तालाब, झरनों या फिर स्वीमिंग पूल में नहाने से बचें। जब इंसान साफ पानी के अंदर अपना मुंह डालता है तब यह अमीबा नाक के जरिये शरीर में प्रवेश कर जाता है।

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