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Trade in Indian Rupee: अब सिर्फ अमेरिकी डॉलर में नहीं, बल्कि भारतीय रुपये में भी होगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार

रूस, श्रीलंका, मॉरिशस, ताजिकिस्तान, क्यूबा, लक्ज़मबर्ग और सूडान उन देशों में शुमार होने वाले हैं जो भारतीय मुद्रा यानि रूपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लेनदेन करेंगे। इससे रूपये का वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्व बढ़ेगा।

Trade in Indian Rupee increase Importance in the global economy

Trade in Indian Rupee: पूरी दुनिया में अगर किसी को International trade (अंतरराष्ट्रीय व्यापार अथवा लेनदेन) में एक सुई भी बेचनी या खरीदनी होती है तो उसे अमेरिकी डॉलर में लेनदेन करना होता है। सरल भाषा में समझें तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में फिलहाल डॉलर का ही रुतबा है। मगर अब इस डॉलर के सामने अन्य कुछ मुद्राएं जैसे यूरो, जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड और चीनी युआन के साथ साथ भारतीय रुपया भी उपयोग होना शुरू हो चुका है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए रुपयों के चलन की कवायद जोर पकड़ने लगी है।

जी हां! बीते दिनों सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका (CBSL) ने बताया कि वह श्रीलंका में भारतीय रूपये को विदेशी मुद्रा के रूप में नामित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी का इंतजार कर रहा था। अब एक रिपोर्ट सामने आई है कि भारत के अपने इस पड़ोसी देश के बैंकों ने विशेष रुपया व्यापार खाते खोले हैं, जिन्हें वोस्ट्रो अकाउंट कहा जाता है।

रूपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ने से भारत को क्या लाभ

श्रीलंका ने सार्क क्षेत्र (SAARC) में व्यापार और पर्यटन को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिए आरबीआई से भारतीय मुद्रा के लिए अनुरोध किया था। निर्दिष्ट देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए विशेष खातों को वोस्ट्रो कहा जाता है। भारत ने ऐसे अकाउंट अब श्रीलंका में खोल दिए हैं। अब एक तरफ जहाँ श्रीलंकाई नागरिक अपने पास एक निश्चित सीमा तक भारतीय मुद्रा रखने के लिए मुक्त हो जायेंगे, वही दूसरी तरफ भारत को भी इसके कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे। सबसे बड़ा फायदा तो यही होगा कि भारत जिन वस्तुओं का आयात करता है, वह पहले की तुलना में अब सस्ता हो जायेगा।

अब सवाल यह आता है कि आखिर सस्ता कैसे मिलेगा? दरअसल, जब हम किसी से व्यापार करते है तो सबसे पहले हम रूपये को डॉलर में एक्सचेंज करवाते हैं, फिर डॉलर को उस देश की करेंसी में बदलवाते हैं, जिससे माल का आयात करना है। यह प्रक्रिया लम्बी होने के साथ-साथ महँगी भी होती है क्योंकि इसमें एक्सचेंज रेट बहुत अधिक देना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार अरबों-खरबों का होता हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि माल आयात में कितना अतिरिक्त पैसा बर्बाद हो जाता होगा, जिसका बुरा असर माल की कीमत पर पड़ता है। अब अगर सीधे भारत की मुद्रा में लेनदेन होगा तो इस पूरी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा और माल की कीमत भी उपभोक्ताओं की जेब को प्रभावित नहीं करेगी।

अभी रुपये में भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार करीब 2 प्रतिशत होता है और यह अगले पांच सालों में 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, रूपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, रूपया मजबूत होगा, दुनिया में रूपये की स्वीकार्यता बढ़ेगी और विदेशी करेंसी पर भारत की निर्भरता कम होगी।

रुपये को अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए भारत के प्रयास

भारत के केंद्रीय बैंक ने रूस के साथ रूपये में व्यापार करने के लिए 12 वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की मंजूरी दी है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक श्रीलंका के साथ व्यापार के लिए पांच और मॉरीशस के साथ व्यापार के लिए छह खातों को अधिकृत करेगा। साथ ही ताजिकिस्तान, क्यूबा, लक्ज़मबर्ग और सूडान से भी रूपये में लेनदेन की बातचीत चल रही है।

भारत के वित्त मंत्रालय ने भारतीय बैंक संघ (IBA) और भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) से रूपये के व्यापार और हितधारकों को जागरूक करने संबंधी जागरूकता अभियान शुरू करने को कहा है। आरबीआई ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निपटारे के लिए नई व्यवस्था को अधिसूचित कर दिया है। इससे न केवल डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूत किया जा सकेगा बल्कि भारतीय मुद्रा का अंतरराष्ट्रीयकरण भी आसान हो जायेगा।

क्या होते हैं वोस्ट्रो अकाउंट (Vostro accounts)

अब इतनी बात हो गई तो आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह वोस्ट्रो अकाउंट क्या होते हैं? दरअसल, यह एक ऐसा अकाउंट होता है जो एक बैंक दूसरे बैंक के लिए खोलता है। उदाहरण के लिए किसी विदेशी बैंक का वोस्ट्रो अकाउंट भारत में किसी बैंक की तरफ से संभाला जाता है। जैसे अमेरिका का कोई बैंक भारत के एसबीआई में अपना खाता खोले लेकिन यह खाता रुपये में लेनदेन करेगा। इसका मतलब है कि खाता विदेशी बैंक का होगा और लेकिन करेंसी उस देश की होगी, जहां वोस्ट्रो अकाउंट खोला गया है।

इस व्यवस्था के जरिए आयात (import) करने वाले भारतीय आयातक (importer) रूपये में पेमेंट भुगतान करेंगे और इस भुगतान को विदेशी बैंकों के स्पेशल वोस्ट्रो अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाएगा। अगर कोई भारत से एक्सपोर्ट (export) कर रहा है तो एक्सपोर्टर (exporter) को इससे जो भुगतान मिलना हैं, वह भी विदेशी बैंक के इसी स्पेशल वोस्ट्रो अकाउंट से हो जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अभी किन मुद्राओं का है दबदबा?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर, यूरो और येन ही मुख्य रूप से वैश्विक मुद्राएं हैं, जिनका दुनियाभर में दबदबा बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा को आरक्षित मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है। गौरतलब है कि दुनिया में 60 प्रतिशत foreign exchange reserves अमेरिकी डॉलर में होता है। जबकि करीब 40 प्रतिशत ग्लोबल ट्रेड का भुगतान भी अमेरिकी डॉलर में किया जाता हैं।

इंटरनेशनल स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन लिस्ट के अनुसार दुनिया भर में कुल 185 मुद्राएं हैं, लेकिन सभी देशों के केंद्रीय बैंकों में जमा कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 64 प्रतिशत अमेरिकी डॉलर है। संसार के समस्त कर्जों में डॉलर की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है। यही कारण है कि अमेरिकी डॉलर सर्वाधिक स्वीकार्य मुद्रा बन गयी है।

यह भी पढ़ें: 2000 Rupee Note: क्या है 2000 रुपये के नोट का चलन कम होने की कहानी, संसद में क्यों गूंजा यह मुद्दा?

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