Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

विधानसभा चुनावों में फिर सिकंदर साबित हुए मोदी और बीजेपी

नई दिल्‍ली। अभी ज्‍यादा समय नहीं हुआ है जब उत्‍तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के साथ ही राजस्‍थान और गुजरात की कुछ सीटों पर उपचुनाव हुए। इन उपचुनावों के नतीजों के बाद हर बड़े राजनीतिक विश्‍लेषक की ओर से नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी के भविष्‍य पर तरह- तरह के सवाल उठाए जाने लगे।

bjp-celebrates-the-grand-victory

सभी सवालों पर लगाया फुलस्‍टॉप

लोकसभा चुनावों के बाद इन उपचुनावों के नतीजों के बाद बीजेपी के करिश्‍मे पर सवाल उठना लाजिमी था क्‍योंकि लोकसभा चुनावों के नतीजों ने पार्टी को एक तरह से देश की राजनीति का बादशाह करार दिया गया था। उपचुनावों में पार्टी को 11 में से सिर्फ तीनों सीटों पर ही विजय हासिल हो सकी थी और वह भी यूपी में।

पार्टी को उत्‍तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 72 सीटें हासिल हुई थीं। इस प्रदर्शन के बाद भी पार्टी यूपी और बिहार के उपचुनावों में कुछ खास नहीं कर सकी।

अभी और सिर चढ़ेगा मोदी का जादू

लेकिन महाराष्‍ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के नतीजों के पर एक बार फिर से मोदी के जादू के साथ ही बीजेपी की बादशाहत साफ नजर आ रही है।

नतीजों से साफ है कि मोदी का जादू अभी तक लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। जो लोग सोच रहे हैं कि आनेजो वाले समय में इस जादू का असर फीका होगा या कम होगा तो वह गलत हैं क्‍योंकि भविष्‍य में मोदी और उनकी पार्टी का रंग लोगों के जेहन में और पक्‍का होने को है।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों का गणित हमेशा ही अलग होता है। विधानसभा चुनाव हमेशा से ही काफी अलग होते हैं।

बीजेपी के केंद्रिय नेतृत्‍व को इस बात का श्रेय देना होगा कि पार्टी ने इन चुनावों के नतीजों पर भी उसी जादू या असर को कायम रखा है जिसका नतीजा पांच माह पूर्व देश ने लोकसभा चुनावों में देखा था।

हरियाणा में एतिहासिक जनादेश

हरियाणा में बीजेपी को 99 में से 47 सीटें हासिल हुई हैं। यह वही राज्‍य है जहां पर वर्ष 2009 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को सिर्फ चार सीटें ही हासिल हो सकी थीं। रविवार को जो नतीजों इस राज्‍य में आए हैं वह साफ दर्शाते हैं कि कैसे पार्टी के केंद्रिय नेतृत्‍व और इसकी राज्‍य इकाई ने मिलकर अपनी पूरी ताकत इन चुनावों में झोंकी।

इस बात से कुछ हद तक सहमत हुआ जा सकता है कि दिल्‍ली के करीब होने पर पार्टी को हरियाणा में थोड़ा बहुत फायदा जरूर मिला लेकिन इसके बावजूद नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने जो कमाल इन चुनावों मे दिखाया है, उसका पूरा श्रेय इस जोड़ी को जरूर मिलना चाहिए।

महाराष्‍ट्र में जूनियर से सीनियर एक्‍टर बनी बीजेपी

महाराष्‍ट्र में भी बीजेपी को 120 से ज्‍यादा सीटें हासिल हुईं और बीजेपी राज्‍य की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। महाराष्‍ट्र में पार्टी ने शिवसेना ने अपना गठबंधन तोड़ने और चुनावों में अकेले लड़ने का एक साहसिक फैसला लिया। सीटों के बंटवारें पर लेकर पार्टियों में नहीं बनी और नतीजा शिवसेना राज्‍य में दूसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई।

बीजेपी ने साबित कर दिया कि वह राज्‍य में अभी तक जूनियर एक्‍टर के तौर पर आंकी जा रही थी लेकिन अब वह राज्‍य में एक सीनियर एक्‍टर है जिसके बिना राज्‍य की किसी भी पिक्‍चर की कल्‍पना भी नहीं हो सकती है।

सिर्फ इतना ही नहीं पार्टी पिछले दो दशकों में अपने दम पर 100 से ज्‍यादा सीटें हासिल करने वाली पार्टी बनी।

बीजेपी महाराष्‍ट्र में न सिर्फ एक बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है बल्कि उसने कांग्रेस और एनसीपी की तुलना में तीनगुना ज्‍यादा सीटें हासिल कीं। साथ ही शिवसेना के मुकाबले में उसकी सीटें दोगुनी हैं।

अब सिर्फ सरकार बनाना बाकी

महाराष्‍ट्र में बीजेपी को 122 सीटें मिली हैं और पार्टी को बहुमत के लिए 22 सीटें और चाहिए। भले ही शिवसेना और बीजेपी कड़वे अनुभवों के साथ अलग हुए हों लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने जिस तरह से शिवसेना पर सीधा हमला नहीं किया।

साथ ही उन्‍होंने शिवसेना पर किसी भी तरह की कड़ी टिप्‍पणी करने से खुद को पूरी तरह से सुरक्षित रखा।

उससे साफ है कि कहीं न कहीं बीजेपी ने अभी भी चुनावों के बाद होने वाले शिवसेना के साथ गठबंधन की संभावना से मुंह नहीं मोड़ा है। बीजेपी काफी सोच समझकर और एक रणनीति के तहत अपना हर कदम बढ़ा रही है।

सभी तरह की संभावनाओं के बावजूद कि शिवसेना बीजेपी से अपने लिए बड़े हिस्‍से की मांग कर सकती है, यह बात तो तय है कि 25 वर्ष पुराने यह दो साथी एक बार फिर से साथ आ सकते हैं और महाराष्‍ट्र में एक नई सरकार के बनने में ज्‍यादा मुश्किलें नहीं आने वालीं।

एनसीपी का हैरान करने वाला समर्थन देन का ऐलान

रविवार को जब एनसीपी की ओर से बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया गया तो यह काफी हैरानी वाली बात लगी। शरद पवार की पार्टी ने बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया।

जबकि यह बात भी कहीं न कहीं तय है कि बीजेपी एनसीपी का समर्थन नहीं लेगी। इस बात की संभावनाएं अब काफी हद तक बढ़ गई हैं कि बीजेपी और शिवसेना आपस में किसी तरह की बातचीत करें और राज्‍य में उनकी सरकार बन सके।

यूपीए के साथ केंद्र सरकार में रहते हुए और फिर राज्‍य सरकार के तौर पर एनसीपी के मंत्री जिस तरह से सिंचाईं घोटाले और एयर इंडिया को हुए बड़े नुकसान से जुड़े रहे हैं, उसके बाद एनसीपी की ओर से बीजेपी को मिला समर्थन शायद इस बात का इशारा करता है कि एनसीपी अपने मंत्रियों को बचाने के लिए बीजेपी को समर्थन देने को तैयार हुई है।

एनसीपी की मंशा बीजेपी का समर्थन देकर जांच से खुद की जान बचाने की नजर आ रही है।

किधर जा रही है कांग्रेस

जहां बीजेपी देश की सबसे मजबूत पार्टी के तौर पर सामने आई तो वहीं कांग्रेस के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं।

कांग्रेस की हालत जस की तस बनी हुई है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्‍व को अभी तक समझ नहीं आ रहा है कि वह क्‍या करें जिससे उसकी हालत में कुछ सुधार हो और वह गर्त में जाने से बच सके।

सबसे हैरानी की बात उस समय हुई जब पार्टी के उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने नतीजों के बीच ही वाइजैग जाकर हुदहुद तूफान के पीडि़तों से मिलने नुकसान का जायजा लेने का मन बना लिया।

साफ है कि राहुल उन सवालों से बचने के लिए खुद को व्‍यस्‍त रखना चाहते हैं। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस अब इस बात को झेलने में समर्थ नहीं है कि इतनी बड़ी हार के बाद वह सामने आए और इसके कमजोर नेतृत्‍व से जुड़े सवालों के जवाब दे सके।

क्‍या होगा मोदी का अगला कदम

अब जबकि विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आ चुके हैं तो इस बात की संभावना भी बढ़ती दिख रही है कि मोदी सरकार देश में आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने को तैयार होगी ताकि अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाया जा सके।

पिछले कुछ दिनों में अर्थव्‍यवस्‍था में भी सुधार के संकेत दिखे हैं और बाजार भी साहसिक कदमों के साथ पटरी पर लौटता नजर आ रहा है। मोदी सरकार की ओर से हाल ही में डीजल की कीमतों को डिरेगुलेट किया गया है। सरकार ने श्रम कानूनों में भी बदलाव के लिए कदम उठाए हैं।

ऐसे में मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी पर लोगों का भरोसा बढ़ता नजर आ रहा है तो वहीं कांग्रेस के बुरे सपनों का जो दौर शुरू हुआ वह खत्‍म होता नजर ही नहीं आ रहा है।

दूसरी तरफ अमित शाह और उनकी टीम ने अगले विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अगले कुछ वर्षों में होने वाले विधानसभा चुनाव ही बीजेपी के लिए एक अहम मंजिल तय करेंगे।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+