Bihar DNA: हर बार बिहार के डीएनए पर राजनीति क्यों?
Bihar DNA: एक बार फिर बिहार के डीएनए पर सवाल उठाया गया है। तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीआरएस के प्रमुख केसीआर के बहाने बिहार के डीएनए को खराब बताया है। अब यह पहली बार नहीं है कि बिहार के बारे में अन्य राज्य के नेता या मंत्री आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए हों। पूर्व में ऐसा कई बार हो चुका है, जब बिहारियों को हीन दृष्टि से देखा गया या कोई अनर्गल टिप्पणी की गई। बिहारियों के बारे में अपशब्द बोलने वालों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली के नेता सबसे आगे रहे हैं।
शीला दीक्षित का 'प्रहार'
दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित ने वर्ष 2007 में दिल्ली में फ्लाइओवर के शिलान्यास के अवसर पर कहा था कि यहाँ बिहार और उत्तरप्रदेश के इतने लोग आ जाते हैं कि सारी सुविधाएं कम पड़ जाती हैं। क्या करें उन्हें यहाँ आने से रोकने का कोई कानून भी तो नहीं है। शीला जी के इस बयान पर काफी हंगामा मचा था। लोगों ने कहा कि शीला दीक्षित बांग्लादेशियों को तो आने देती हैं, लेकिन उन्हें बिहार और उत्तरप्रदेश के लोगों से नफरत है। बाद ने शीला दीक्षित ने अपने बयान से किनारा कर लिया और कहा कि दिल्ली में बिहार के लोगों का स्वागत है।

बाल ठाकरे ने बिहारियों को कहा था 'अनवांटेड'
शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने मार्च 2008 में पुणे मे कहा था - बिहारी सब जगह अवांछित हैं। उन्हें दक्षिण भारत में कोई नहीं चाहता, असम, चंडीगढ़ और पंजाब में भी वे अवांछित हैं। बिहारी जहां भी जाकर बसे हैं, वहाँ के लोगों को उन्होंने नाराज ही किया है। उसके बाद ठाकरे ने सामना में लिखा- यूपी और बिहार से आए यहाँ के सांसदों ने मुंबई और महाराष्ट्र के प्रति कभी उदगार व्यक्त नहीं किया। उन्होंने संसद मे महाराष्ट्र के मामले मे कभी पक्ष नहीं लिया। बिहारी नेता मुंबई के लोगों पर एंटी नेशनल होने का आरोप लगा रहे हैं। यह आग में घी छोड़ने की बात हुई।
डीएमके ने बिहारियों को कम बुद्धि वाला बताया था
तमिलनाडु के डीएमके नेता केएन नेहरू ने बिहारियों को तमिलों की तुलना में कम बुद्धि वाला बताते हुए उन पर तमिलों से नौकरियां छीनने का आरोप लगाया। 2021 के जुलाई में अपने भाषण में के. एन. नेहरू ने कहा कि बिहार और अन्य उत्तर भारतीय लोग तमिलों से नौकरियां छीन रहे हैं, जबकि वे ना तो तमिल जानते हैं ना अंग्रेजी। फिर भी बैंकों और अन्य स्थानों पर काम कर रहे हैं। डीएमके नेता ने यह भी कहा कि रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद यादव ने रेलवे को बिहारियों से भर दिया। लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे, तो उन्होंने अपने सभी साथी बिहारियों को रेलवे की परीक्षा पास कराई और उन्हें रेलवे की नौकरियों में नियुक्त किया। ये लोग न तो तमिल जानते हैं और न ही हिंदी और उनमें हम तमिलों जैसा दिमाग भी नहीं है। फिर भी वे तमिलनाडु में काम कर रहे हैं।
केजरीवाल ने भी बिहारियों पर कटाक्ष किया था
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी बिहारियों पर मुफ्त चिकित्सा के लिए दिल्ली आने का कटाक्ष किया था। फरवरी 2022 में केजरीवाल ने एक सभा में अपने भाषण के दौरान कहा था कि मुफ़्त उपचार के लिए दिल्ली आने वाले पूर्वांचलवासियों, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के कारण दिल्ली वालों के लिए उपयुक्त चिकित्सा व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। उन्होंने यह कहा कि सस्ते इलाज के लिए आने वाले 'बाहरी लोगों' के कारण दिल्ली में रहने वाले नागरिकों को शहर के अस्पतालों में इलाज में देरी होती है। वीडियो में, केजरीवाल को यह कहते हुए साफ सुना जा सकता है कि बिहार का एक व्यक्ति 500 रुपये में दिल्ली का टिकट खरीदता है और 5 लाख रुपये का मुफ्त इलाज कराकर लौट जाता है।
चन्नी ने बिहारियों को पंजाब में ना घुसने की चेतावनी दी थी
पंजाब के मुख्यमंत्री रहे चरणजीत सिंह चन्नी ने उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी श्रमिकों को प्रदेश में ना घुसने देने की चेतावनी दे दी थी। चन्नी की टिप्पणी ने चुनावी राज्य में रहने वाले पूर्वांचलियों के मन में डर भर दिया था। हालांकि बाद में चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी का गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी आम आदमी पार्टी पर लक्षित थी। अनुमान है कि पूर्वांचल के पांच लाख से अधिक लोग पंजाब में बसे हुए हैं और इनमें से लगभग एक लाख लोग अब मतदाता भी हैं।












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