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Social Drinking: सोशल पार्टी और शराब, बढ़ रहा है चलन जनाब

Social Drinking: आजकल सोशल पार्टी हो या बिजनेस डील शराब का चलन हर जगह होने लगा है। ऐसे में जो शराब नहीं पीते या सार्वजनिक रूप से नहीं पीते, उनके लिए स्थितियाँ बहुत असहज हो जाती हैं। क्या आपको नहीं लगता कि व्यावसायिक साझेदारों के साथ डील पर बातचीत करते समय शराब पीना अनिवार्य सा बन गया है?

क्या यह शहरी संस्कृति का अनिवार्य अंग नहीं बन गया है? क्या आप भी सोच रहे हैं कि अगर आप मना कर दें तो क्या होगा? जानते हैं कुछ लोगों की राय।

Social party and drinking trends in youth increasing nowadays

शराब पार्टी हमारी संस्कृति नहीं

किसी खुशी के मौके पर शराब पीना, भारतीय संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रहा है, बल्कि शराब को नकारात्मक तौर पर लिया जाता है। इटली, रूस, साउथ अफ्रीका, जापान, कोरिया, वियतनाम, चीन और इंग्लैंड में बिजनेस या सोशल मीटिंग्स में शराब परोसना सम्मान की बात मानी जाती है। चीन में पार्टी के दौरान लोग इतनी शराब पीते हैं कि वे गिर जाते हैं या उल्टी कर देते हैं। इन देशों के परिवेश में शराब पिलाना या पीना एक सामुदायिक सम्मान माना जाता है।

शराब पीना अनिवार्य नहीं

अरुण अस्थाना वन इंडिया से बात करते हुए कहते हैं - "मुझे नहीं लगता कि आज किसी बिजनेस डील या सोशल पार्टी में शराब पीना अनिवार्य है। शराब नहीं पीने के कई कारण हो सकते हैं। हो सकता हैं कि कोई खास दवा ले रहा हो। कुछ लोग, जो धार्मिक प्रवृति के होते हैं, वे तो शराब से पूरी तरह परहेज करते हैं। कुछ लोगों को इसका स्वाद भी पसंद नहीं आता। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि किसी पार्टी में जाकर शराब ही पिएं।

अरुण अस्थाना

किसी भी पार्टी में यही अपेक्षा की जाती है कि मेलजोल बढ़े। कुछ ज्यादा समय साथ बिताने के लिए हाथ में ग्लास होना, एक अच्छा विचार है, लेकिन जरूरी नहीं है कि उस ग्लास में शराब ही हो, उसमें फल का रस, नीबू पानी, या सोडा भी हो सकता है। यकीन मानिए ऐसा करना असामान्य नहीं है। आपको मालूम होना चाहिए कि शराब की किस्मों से ज्यादा गैर-अल्कोहल पेय उपलब्ध हैं और उनके साथ एक अच्छा समय निकाल सकते हैं।"

सोशल ड्रिंकिंग में बुराई क्या है

चार्टर्ड अकाउंटेंट मानस पीयूष कहते हैं कि सोशल ड्रिंक में बुराई ही क्या है। "यदि आपको लगता है कि अपने व्यावसायिक साझेदारों के साथ अनुबंध पर बातचीत करते समय या अपने सहयोगियों के साथ किसी दिन लंबी मंत्रणा के लिए शराब पीने की आवश्यकता है तो इसे अनिवार्य की श्रेणी में नहीं ले सकते। मैंने कभी किसी अनुबंध पर बातचीत के लिए शराब जरूरी नहीं माना, लेकिन यदि आयोजक कुछ ऐसा ऑफर करते हैं, तो मैं नखरे नहीं दिखाता।

मानस पीयूष

जहाँ उपलब्ध है और वैकल्पिक भी है और पीने का कोई दबाव भी नहीं है, वहाँ मैं भी परहेज कर लेता हूँ। एक नियोक्ता के रूप में मैं भी अपने कर्मचारियों से शराब पीने की अपेक्षा नहीं करता। यदि आप शराब नहीं पीना चुनते हैं तो शराब कभी भी अनिवार्य नहीं हो सकती है। अधिकांश सभ्य लोग दबाव भी नहीं डालते।"

शराब और कपड़े से किसी को जज करना गलत

पेंटर, फिल्म कलाकार और दि इमेज स्टार की प्रकाशक संध्या आर वैश्य वन इंडिया से बातचीत में कहती हैं- "मैं पार्टियों में शराब से परहेज नहीं करती हूँ, लेकिन कितना पीना है और किस पार्टी में पीना है, यह मैं सावधानी से तय करती हूँ। कोई आपको जबरदस्ती नहीं पिला सकता। मैं बिजनेस वुमन हूँ, इसलिए बिजनेस पार्टी में शराब को गलत नहीं मानती। मैं आधे मीटर से लेकर 16 मीटर के कपड़े पहनती हूँ। शराब और कपड़े से किसी को जज नहीं किया जा सकता।

संध्या आर वैश्य

मेरा अपना पीने का अपना स्टाइल है। मैं एक ग्लास वाइन को दो घंटे में भी खत्म कर सकती हूँ। किसी को एहसास भी नहीं होता कि मैं ड्रिंक नहीं ले रही हूँ। यहाँ कुछ पार्टियों में देखती हूँ कि लड़कियां शराब पी कर होश खो देती हैं। इनसे ही पार्टियां बदनाम होती हैं। पीने का स्मार्ट तरीका आना चाहिए। हाँ मैं शराब पीने वाली भीड़ का हिस्सा नहीं हूँ पर मैं शराब के ख़िलाफ़ नहीं हूं। कुछ पुरुष सहकर्मी चाहते हैं कि मैं उनके साथ शराब पीऊँ, लेकिन यह तय मुझे करना है कि कब और कितना पीना है।"

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