एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर, चिकमंगलूर
बैंगलोर। भारतीय राजनीति में नारे (स्लोगन) किसी भी दल की योजना और सोंच का प्रदर्शन करते हैं। जैसे अभी हाल ही में भाजपा ने अपना नया चुनावी पोस्टर 'नई सोंच नई उम्मीद' के साथ लांच किया था। जिसमें पार्टी ने अपनी भावी योजनाओं और नये विकल्प को जनता के सामने पेश किया। ठीक इसी तरह समय समय पर कभी जन भावनाओं को आंदोलित करने तो कभी अपनी सोंच को लोगों तक पहुंचाने के लिए राजनीति में नारो का प्रचलन रहा है।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में प्रसिद्ध हुए नारे 'इंकलाब जिंदाबाद'। जिसका मतलब है कि एक ऐसा आंदोलन जो दबे कुचले लोगों की ओर से अपने अधिकार पाने के लिए हमेशा चलता रहे, ने लोगों में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक जबर्दस्त आक्रोश भर दिया। वहीं स्वतंत्र भारत की राजनीति ने इन नारों के प्रचलन को आगे बढ़ाया। कई बार तो इन नारों ने सरकार की नीतियों तक को बड़ी ही आसानी से आम जनता तक पहुंचा दिया।
एक ऐसा ही नारा 'एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर चिकमंगलूर' था। यह वो नारा था जिसने 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार की वापसी तय की। देखें ऐसे कौन कौन से नारे है, जो भारत वर्ष में जन जन में प्रचलित रहे हैं।

जय जवान जय किसान
यह वो ऐतिहासिक नारा था, जिसने 1965 के दशक में देश की सबसे महत्वपूर्ण बातों को रेखांकित किया था। लाल बहादुर शास्त्री ने इस नारे से देश के जवानों और किसानों का आह्वान किया था। उस समय देश अन्न की कमी से जूझ रहा था। इस नारे के द्वारा भारत के प्रधानमंत्री का कहना था कि किसानों खूब मेहनत कर देश में अधिक अन्न उपजाएं जिससे कि देश खाद्य जरूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भर बन सके।

गरीबी हटाओ
सत्ता में आने के लिए कांग्रेस द्वारा दिया गया यह नारा आंदोलनकारी साबित हुआ। इंदिरा गांधी ने अपने भाषण में जनता से कहा था कि विपक्ष का कहना है कि 'इंदिरा हटाओ'। हमारा कहना है कि 'गरीबी हटाओ'। अब आपको तय करना है कि आप क्या चाहते हैं? इस नारे ने 1971 में कांग्रेस को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जय जवान जय किसान जय विज्ञान
पोखरण में किये गये परमाणु परीक्षण के बाद भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने इस नारे के द्वारा देश के विकास में विज्ञान की महत्ता बताई थी, साथ ही किसान, जवान और विज्ञान को भी रेखांकित किया था।

इंदिरा हटाओ देश बचाओ
देश में इमर्जेंसी लगने की घटना के बाद जय प्रकाश नारायण ने कांग्रेस सत्ता से मुक्त होने के लिए यह नारा दिया था। इस नारे के प्रभाव और लोगों में आक्रोश के बाद ही 1977 में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।

नई सोंच नई उम्मीद
देश के राज्य गुजरात में विकास के नये प्रतिमान गढ़ने वाले भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ पोस्टर पर 'नई सोंच नई उम्मीद' नारे के द्वारा पार्टी ने सत्ता में आने पर विकास करने का वादा जनता से किया है।

एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर, चिकमंगलूर
इस नारे ने कांग्रेस के 1980 में सत्ता में आने की भूमिका तैयार की। उस चुनाव इंदिरा गांधी ने कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट से चुनाव लड़ा था।

जब तक सूरज चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में कांग्रेस द्वारा दिया गया नारा। जिसके बाद पूरे देश में चली सांत्वना की लहर ने कांग्रेस को चुनाव में बड़ी जीत दिलाई।

बारी बारी सबकी बारी अबकी बारी अटल बिहारी
1996 में लखनऊ में दिया गया यह नारा। इन चुनावों में भाजपा की सरकार अटल बिहारी के नेतृत्व में पहली बार 13 दिनों के लिए बनी।

जांचा, परखा, खरा
1996 में लखनऊ में दिया गया यह नारा। इन चुनावों में भाजपा की सरकार अटल बिहारी के नेतृत्व में पहली बार 13 दिनों के लिए बनी।

कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ
सन 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी द्वारा दिये गये इस नारे से कांग्रेस सहयोगी दलों के साथ मिलकर सत्ता में आने में कामयाब रही।

भारत उदय
भाजपा ने 'भारत उदय' नारा देकर सत्ता में आने का ख्वाब देखा लेकिन मामूली अंतर से पार्टी कांग्रेस की सीटों से पीछे रह गयी। कांग्रेस ने जहां 145 सीटें जीत अपनी सरकार बनाने में सफलता पाई। वहीं भाजपा 136 सीटें ही पा सकी और उसके सहयोगी दल भी हार गये। इस नारे ने भाजपा के लिए चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, पर ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा अपनी पकड़ बनाने में नाकामयाब रही।












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