नरेंद्र मोदी और इंदिरा गांधी में क्या हैं समानताएं
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जो आज जनता का दिलों पर राज कर रहें है और जिनसे जुड़ी हैं जनता की असीम आशाएं। मोदी के व्यक्तित्व की विराटता किसी से छुपी नहीं है। सरदार पटेल और विवेकानंद को अपनी प्रेरणा स्रोत मानने वाले मोदी मौजुदा समय में भले ही अतुलनीय हो पर थोड़ा गौर से देखें तो आज से कुछ दशकों पहले भारत ने एक ऐसे ही विराट व्यक्तित्व को देखा था, जिसमें आत्मविश्वास और दृढ संक्लप का ज़स्बा भरा था वो शक्सियत कोई और नहीं बल्कि गांधी परिवार की मजबूत कड़ी, कांग्रेस की शक्ति और भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी थीं।
कुछ तो था उनमें ऐसा जो स्वयं मोदी ने भी कभी उनकी आलोचना नहीं की। आज मोदी कड़े शब्दों में राहुल और सोनिया गांधी की आलोचना करते हैं, पर इन्दिरा गांधी कभी उनके कड़े शब्दों का शिकार नहीं बनी। हम यह तो नहीं कह सकते की मोदी की प्रेरणा इन्दिरा हैं पर यह अवश्य कह सकते हैं कि भले ही संपूर्ण स्तर पर नहीं मोदी की शख्सियत कई मायनों में इन्दिरा से मेल खाती है।
मोदी का चुनाव प्रचार 2014 इन्दिरा गांधी के चुनाव प्रचार 1971 से कई हद तक समानता रखता है. सबसे बडी़ समानता जो दिखती है वो यह है कि जैसे इन्दिरा गांधी ने सत्ता की पावर पाने के लिए जनशक्ति पर विश्वास जताया। वो जनता के बीच उतरीं, जनता के सार्वजनिक जीवन से जुड़ी ठीक यहीं जनपक्षधरता की चेतना हमें नरेन्द्र मोदी में भी दिखाई देती है। आज मोदी अपनी रैलियों से ज्यादा से ज्यादा जनता से जुड़ते दिखाई दे रहें हैं। वो जनसमर्थन को हासिल करने में प्रयासरत हैं, उनके लिए भी सत्ता को जितने के लिए जनता के दिलों को जीतना सबसे अहम है।
मोदी की जन लहर कहीं न कहीं 1971 की इनिदरा गांधी की जन लहर से मेल खाती है। जिस आत्मविश्वास से मोदी ने लोगों के दिलों में अपने लिए जगह बनाई है और वो जनता के भरोसे का, उनकी उम्मीदों के मसीहा बन गए हैं इन्दिरा जी जनता जे इसी भरोसे की हकदार बनीं और सत्ता पर वो विजयी हुई।
आईये अब हम आपको तस्वीरों के साथ इन दोनों में और भी कुछ समानताएँ बताते हैं-

पार्टी के नारे
जरा गौर कीजिए चुनावी नारे पर आज का नारा है कांग्रेस हटाओ, मोदी लाओ, देश बचाओ। और 1971 का नारा था गरीबी हटाओ, इन्दिरा लाओ, देश बचाओ।

दोनों की सोच
आज मोदी ने स्वयं को केवल गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि भाजपा की सोच के प्रतिनिधि के तौर पर व्यापक -दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। ठीक ऐसे ही इन्दिरा गांधी ने भी कांग्रेस की सोच का व्यापक स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।

नई चेतना
इन्दिरा ने कांग्रेस को नई दिशा दी ऐसे ही मोदी ने भी भाजपा को नई दिशा, नई चेतना दी।

पार्टी की शक्ति
इन्दिरा कांग्रेस की शक्ति थीं मोदी भाजपा की शक्ति हैं।

युग-युग का फर्क
जैसे मोदी ने अपने मिशन 272 और अपनी जनचेतना रैली द्वारा सिर्फ 6 महीनों में पूरे देश पर अपना प्रभुत्व जमा दिया है ठीक वैसे ही 1971 में इन्दिरा गांधी पूर्व टेलिविजन युग में भी अपनी रैलियों से पूरे भारत में छा कर एक नई मिसाल कायम की थी।

जादुई आंकड़े की इच्छा
आज संभावना जताई जा रही है कि मोदी भी 2014 के चुनाव में उसी तरह पूर्ण बहुमत से के जादुई आंकड़े से जीतेंगे जैसे 1971 में इन्दिरा जीतीं थी।

दल खास महत्व नहीं रखता
मोदी और इन्दिरा गांधी दोनों ने ही अपने दल की भौगोलिक सीमा से ऊपर उठ कर अपने प्रभुत्व का विस्तार उन क्षेत्रों तक किया जो उनके दल के विजय के लिए खास महत्व नहीं रखते।

चुनौतियां पसंद
मोदी के व्यक्तित्व की खासियत है चुनौतियों का सामना करना तभी वो गुजरात से ऊपर उठ कर समूचे भारत की बागडोर संभालने की हिम्मत रखते है ऐसे ही इन्दिरा भी चुनौतियों को पंसद करती थी।

लोकनायक
जैसे मोदी आज के लोकनायक हैं जनता के चहीते हैं वैसे ही इनिदरा गांधी की छवि भी लोकप्रिय थी।

यूथ के आइकन
आज मोदी सांस्कृतिक स्तर पर भी अलग- अलग राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहें है वो इंडिया की सांस्कृतिक आईकन बन रहें है यही खासियत हमें इन्दिरा जी में भी दिखाई देती है। उन्होंने भी अखिल भारतीय स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।












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