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पानीपत की लड़ाई में जो हुआ था हू-ब-हू वही हुआ लोकसभा चुनाव 2014 में

[अजय मोहन] लोकसभा चुनाव 2014 की इस जंग में जिस तरह भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी अपने सैनिकों के साथ आगे बढ़ रही हैं, उससे ऐसा साफ लगने लगा है कि 1526 का पानीपत का प्रथम युद्ध एक बार फिर दोहराने जा रहा है। तब मुगलों और अफगानों के बीच जंग हुई थी, आज भाजपा और कांग्रेस के बीच जंग है। अगर आप गहरायी में जाकर देखें तो आज के चुनाव की बहुत सारी ऐसी बाते हैं, जो पानीपत की जंग से मिलती-जुलती हैं।

वर्तमान चुनाव में मुगलों की जगह पर भारतीय जनता पार्टी नजर आ रही है, जबकि यूपीए वो लोधी साम्राज्य है, जिस पर बाबर ने हमला बोला था। आइये एक नजर डालते हैं दोनों की समानताओं पर-

1. जंग के हथ‍ियार

पानीपत की लड़ाई-भारत की पहली ऐसी जंग थी, जिसमें गोला-बारूद, गन पॉवडर और तोपों का इस्तेमाल किया गया था।

चुनाव 2014- पहला लोकसभा चुनाव है, जिसमें सोशल मीडिया यानी फेसबुक, ट्व‍िटर और गूगल प्लस का इस्तेमाल हथ‍ियार के रूप में किया जा रहा है।

2. जंग का समय

पानीपत की जंग- अप्रैल-मई के महीने में हुई थी। मई के मध्य में नये साम्राज्य की स्थापना हुई थी।

चुनाव 2014-भी अप्रैल-मई के महीने में हो रहे हैं। भारत में नये साम्राज्य की स्थापना भी 16 मई को चुनाव परिणाम आने पर ही होगी।

3. जंग का फोकस

पानीपत की लड़ाई- का पूरा फोकस उत्तर भारत था, जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की अहम भूमिका थी।

चुनाव 2014-में भी यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

4. वन मैन आर्मी

पानीपत की लड़ाई- बाबर और लोधी साम्राज्य के बीच हुई थी। इतिहास की किताबों पर कभी भी यह नहीं लिखा गया कि यह जंग बाबर और इब्राहिम लोधी के बीच हुई थी, हमेशा से सभी ने बाबर को वनमैन आर्मी के रूप में माना।

चुनाव 2014- नरेंद्र मोदी और यूपीए के साम्राज्य के बीच है। वर्तमान चुनाव प्रचारों से साफ है कि यह चुनाव मोदी बनाम कांग्रेस पार्टी है। भाजपा ने खुद अपने विज्ञापनों में 'अबकी बार भाजपा सरकार' के बजाये 'अबकी बार मोदी सरकार' के नारे लगा रही है।

5. जनता की परेशानी

पानीपत की जंग- की चिंगारी तब उठी थी, जब इब्राहिम लोधी के शासन से परेशान आम जनता ने बाबर के दरबार में जाकर अपनी व्यथा सुनायी थी। तभी बाबर ने लोधी साम्राज्य को खत्म करने का बीड़ा उठाया था।

चुनाव 2014- आज यूपीए सरकार की नीतियों से देश का हर नागरिक परेशान है। इस समय ट्विटर, फेसबुक के माध्यम से जुड़े लोग हर रोज मोदी को ढेरों श‍िकायतें भेज रहे हैं।

6. सेनाओं का साइज

पानीपत की जंग- के दौरान बाबर की सेना में मात्र 15000 सैनिक और 20 से 24 जमीनीं तोपें थीं, जबकि लोधी के पास 1 लाख सैनिक थे, जिनमें 40 हजार लड़ाके शामिल थे और 1000 युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हाथी।

चुनाव 2014- में भाजपा उतनी बड़ी पार्टी नहीं है, जितनी बड़ी कांग्रेस। कांग्रेस देश के प्रत्येक राज्य में सक्रिय है, जबकि भाजपा कुछ ही राज्यों तक सीमित है। कांग्रेस में दिग्गज व अनुभवी नेताओं की फेहरिस्त कॉफी लंबी है, जबकि भाजपा की सूची उतनी बड़ी नहीं है।

7. वंशवाद की राजनीति

पानीपत के युद्ध- के दौरान लोधी साम्राज्य वंशवाद के रूप में स्थापित थी। उत्तर भारत के शासक इब्राहिम लोधी को अपने पूर्वजों- बहलूल लोधी और सिकंदर लोधी से प्राप्त हुई थी।

चुनाव 2014-में वंशवाद की राजनीति से आज हर कोई वाकिफ है।

8. गलतियों से नहीं ली सीख

पानीपत के युद्ध-के पहले इब्राहिम लोधी राजस्थान में एक जंग राणा सांगा से हार गया था, उसके बावजूद उसने उस हार से कोई सीख नहीं ली।

चुनाव 2014- में सत्ताधारी कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान का विधानसभा चुनाव बुरी तरह हारी और उसके बावजूद कोई सबक नहीं लिया।

9. साम्राज्य का घमंड

पानीपत की लड़ाई-के दौरान इब्राहिम लोधी अपने घमंड में चूर था और यही कारण था कि उसने बाबर को हलके में ले लिया और अंत में जंग हार गया।

चुनाव 2014- में कांग्रेस के राहुल गांधी का भी कुछ ऐसा ही हाल है। भले ही घमंड नहीं है, लेकिन हां उनके भाषणों से ऐसा साफ प्रतीत हो रहा है कि वो अब इस जंग में ज्यादा सीरियस नहीं हैं।

10. सेना के मुख्य अध‍िकारी नाराज

पानीपत की लड़ाई- के दौरान इब्राहिम लोधी के शासन से खुद उसके अध‍िकारी नाराज थे और इसीलिये एक दर्जन से ज्यादा अध‍िकारी उसकी सेना छोड़कर बाबर से मिल गये थे।

चुनाव 2014- में कांग्रेस के शासन से तमाम नेता नाराज हैं और एक-एक कर कांग्रेस को छोड़ रहे हैं। इसकी शुरुआत जगदंबिका पाल, सतपाल महाराज के रूप में हो चुकी है।

11- चारों तरफ से घेरा

पानीपत की जंग- में बाबर के सैनिकों ने लोधी की सेना को चारों तरफ से घेरने के लिये अपनी सेना को चार अलग-अलग भागों में बांट दिया था। उन चारों विंग ने चौतरफा वार करके यह जंग जीती थी।

चुनाव 2014- में नरेंद्र मोदी ने अपनी सेना को अलग-अलग भागों में बांट दिया है। एक विंग इंडिया 272+ संभाल रही है, दूसरी अंत्योदय प्रकोष्ठ, तीसरी युवा प्रकोष्ठ, चौथी चाय पर चर्चा जैसे कार्यक्रम और पांचवीं फोरफ्रंट पर डटा हुआ है।

12. सबसे बड़े हथ‍ियार का मिला लाभ

पानीपत की जंग- में बाबर को सबसे बड़ा लाभ तोपों का मिला, जो भारत में पहली बार इस्तेमाल की गई थीं। असल में उन तोपों से लोधी के हाथी डर गये थे और 1 लाख सैनिकों वाली सेना कमजोर पड़ गई थी।

चुनाव 2014 में- साफ नजर आ रहा है कि नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया का जो हथ‍ियार भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिया है, वह हथ‍ियार तेजी से कांग्रेसियों को कमजोर कर रही है।

13. जंग के परिणाम

पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने फतह हासिल की थी।
चुनाव 2014 में......................................... (यह लेख 28 मार्च 2014 को लिखा था, आज यह खाली स्थान भर रहा हूं)- उत्तर है 'नरेंद्र मोदी'।

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