किन कामों में शर्माती हैं भारतीय महिलाएं?

नई दिल्‍ली। हम आधुनिक भारत का हिस्सा है। देश की आधी आबादी देश की तरक्की में कदम से कदम मिला तक चल रही है। देश के शीर्ष पदों पर महिलाएं विराजमान हैं। दुनिया की ताकतवर महिलाओं की सूची में 4 भारतीय महिलाएं शामिल हैं। बावजूद इसके भारत में महिलाओं की स्थिति कमोबेश आजादी से पहले वाली है। खासकर जब हम बात करते हैं ग्रामीण भारत की।

भारत के कई गाँवों के साथ-साथ शहरों और महानगरों के घर की छतों पर महिलाएं अपने अंडरगार्मेंट्स कुछ इस तरह सुखाती हैं कि किसी की नज़र ना पड़ जाए। ये उनकी शर्म और लज्जा का एक रुप है, लेकिन हम यहां सिर्फ ये बताना चाहते है कि जब बात उनके सेहत से जुड़ी है तो शर्म क्‍यों?

स्‍वास्‍थ्‍य के लिये खतरनाक है यह शर्म

यहां हम कुछ ऐसे मुद्दों की बात करने वाले हैं जिनमें भारतीय महिलाएं आधुनिकता का चोला उतार शर्म का गहना पहन लेती हैं। ये वो घड़ी होती है, जब वो लोकलाज के चक्‍कर में साहस नहीं दिखा पाती हैं। वैसे स्‍लाइडर में जिन बातों पर हम चर्चा करने जा रहे हैं, उनकी सबसे बड़ी वजह है पुरुषों द्वारा उनका मजाक उड़ाना, गंभीरता से नहीं लेना और बढ़ते यौन अपराध हैं। लिहाजा यह कमी भारतीय महिलाओं में नहीं है, बल्कि समाज का एक विकार है।

सैनिटरी नेपकिन खरीदने में शर्म

सैनिटरी नेपकिन खरीदने में शर्म

भारत में काली पॉलीथीन का रहस्य छुपा नहीं है। किसी भी दवा की दुकान में सैनिटरी नैपकिन मांगने पर उसे काली पॉलीथीन में या किसी अखबार में लपेट कर देना बड़ी आम सी बात है। ये शर्म का वो रुप है जो हमें महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मामले में सहज नहीं होने देता है।

शौचालय संबंधी समस्‍या

शौचालय संबंधी समस्‍या

संयुक्त राष्ट्र की 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मोबाइल फोन ज़्यादा और शौचालय कम है। कई गांवों में बच्चियों के स्कूल ना जाने की वजह वहां शौचालय ना होना है। देश की 80 फीसदी महिलाएं इस समस्या से जूझती हैं।

कंडोम बेचने में आती है लाज

कंडोम बेचने में आती है लाज

भारत में स्वास्थ योजना के तहत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर गर्भ निरोधक बांटने की योजना चलाई जाती है। लेकिन आधिकांश आशा कर्मी इस कार्यक्रम के तहत कंडोम नहीं बांटना चाहती हैं। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस काम को करने में उन्हें शर्मिंदगी होती है।

पीरीयड्स के बारे में बात करने में झिझक

पीरीयड्स के बारे में बात करने में झिझक

पीरीयड्स महिलाओं के शारीरिक विकास से जुड़ी एक साधारण प्रक्रिया है जो हर महिला के होती है। इसमें कोई हंसने या मजा‍क करने वाली बात नहीं है। लेकिन अभी भी समाज में पीरीयड्स को लेकर एक शर्म और झिझक बनी हुई है। महिलाएं इस पर बात करने से कतराती हैं।

सेक्स पर खुलकर नहीं बोल पाती

सेक्स पर खुलकर नहीं बोल पाती

भारतीय महिलाएं सेक्स और सेक्सुअल लाइफ के बारे में खुलकर दूसरों से तो दूर अपने पार्टनर से भी बात नहीं कर पाती। पुरुष प्रधान समाज में महिलाएं सेक्स जैसे विषयों पर शर्म के आगे झुक जाती है। कई बार तो अपने पार्टनर के साथ भी वो इस बारे में बात नहीं कर पाती हैं। कई बार तमाम महिलाएं अपने पति के सामने पीरियड के दौरान भी नतमस्‍तक हो जाती हैं, जो उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर बड़ा आघात पहुंचाता है।

गर्भनिरोधक अपनाने में हिचक

गर्भनिरोधक अपनाने में हिचक

भारतीय युवा दंपती खासकर महिलाएं कपडे बेशक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के पहन लें, लेकिन गर्भनिरोध के सुरक्षित और बेहतरीन तरीकों को अपनाने व उनके बारे में बात करने में शर्म महसूस करती हैं। अधिकतर दंपत्तियों की गर्भनिरोधकों से जुडी जानकारी सीमित रहती है और कई बार गलत भी होती है।

 छुपाकर सुखाती हैं अंडरगार्मेंट्स

छुपाकर सुखाती हैं अंडरगार्मेंट्स

महिलाएं अपने अंडरगार्मेंट्स छुपा कर सुखीती हैं। ब्लाउज़ या पेटिकोट के नीचे और कई बार तो बाथरुम के दरवाज़े के पीछे सूखाती है। उनकी इसी मानसिकता को 'शर्म' कहते हैं जो एक हद के बाद शर्मनाक हो जाती है क्योंकि जाने-अनजाने इससे महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। डॉक्टरों की माने तो ठीक से धूप में ना सुखाए गए हल्के गीले अंडरगार्मेंट्स को पहनने से फंगल इंफ़ेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है जो भारतीय महिलाओं में आम सी बात मानी जाती है।

स्‍तन कैंसर का बड़ा कारण शर्म

स्‍तन कैंसर का बड़ा कारण शर्म

लखनऊ कैंसर इंस्‍टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में स्‍तन कैंसर का बड़ा कारण यह है कि शुरुआती स्‍टेज में जब स्‍तनों में समस्‍याएं उत्‍पन्‍न होती हैं, तब महिलाएं शर्म की वजह से डॉक्‍टर के पास नहीं जाती हैं। आगे चलकर बीमारी गंभीर हो जाती है।

टॉयलेट जाने में शर्म

टॉयलेट जाने में शर्म

भारत में तमाम लड़कियां हैं, जो जब भी किसी के घर जाती हैं, और उन्‍हें टॉयलेट जाना होता है, तो संकोचवश नहीं जाती हैं। इसके पीछे भी सिर्फ एक कारण शर्म है। जबकि यूरीन रोकना सेहत के लिये बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे सीधा प्रभाव किडनी पर पड़ता है।

ब्रा-पैंटी खरीदने में शर्म

ब्रा-पैंटी खरीदने में शर्म

तमाम भारतीय महिलाएं अपने अंडरगार्मेाट्स खरीदने में शर्माती हैं। लिहाजा वो अपनी मां या बड़ी बहन से कहती हैं, कि वो उनके लिये अंडरगार्मेंट्स बाजार से लेकर आये। ऐसे में साइज छोटा होना आम बात है और अगर अंडरगार्मेांट्स बहुत ज्‍यादा टाइट हैं, तो रक्‍त संचार पर असर पड़ सकता है।

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