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Gurus of Shri Ram: किन ऋषियों ने दिया था श्रीराम को शास्त्र और शस्त्र का ज्ञान?

Gurus of Shri Ram: 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले श्रीराम के बाल स्वरुप विग्रह की एक तस्वीर वायरल हो गई है। इस मूर्ति के आकर्षण में पूरा भारत डूब गया है।

लाखों बार सोशल मीडिया पर बाल राम की इस मनोभावन प्रतिमा को शेयर किया गया है। सचमुच अद्भूत था भगवान राम का बालजीवन। बालक के रूप में राम की कथाएं भी अनंत हैं और उसका उदाहरण भारत के सभी प्रमुख ग्रंथों में मिलता है।

ram mandir gurus

जानते हैं कैसा रहा श्रीराम का बचपन और किन ऋषियों से उन्हें शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान प्राप्त हुआ।

रामायण का श्लोक...

ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट्समत्ययु:।
ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ।।1.18.8।।
नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु।
ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह।।1.18.9।।
प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्।
कौसल्याऽजनयद्रामं सर्वलक्षणसंयुतम्।।1.18.10।।
विष्णोरर्धं महाभागं पुत्रमैक्ष्वाकुवर्धनम्।

इन श्लोकों का मतलब है कि पुत्रेष्टि यज्ञ समाप्त होने के तकरीबन एक साल बाद राम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र था। राम का जन्म कर्क लग्न में हुआ था, जब बृहस्पति के साथ चंद्रमा, सूर्य, मंगल, शुक्र और शनि जैसे पांचों ग्रह अपने उच्च स्थान में थे। वहीं भरत का जन्म पुष्य नक्षत्र में मीन लग्न में हुआ था।

जबकि जुड़वां लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म अश्लेषा नक्षत्र में कर्क लग्न में हुआ। इनके जन्म के 11 दिन बाद इनका नामकरण संस्कार किया गया। गुरु वशिष्ठ ने कौशल्या के पुत्र का नाम राम, कैकेयी के पुत्र का भरत, सुमित्रा के एक पुत्र का नाम लक्ष्मण और दूसरे का शत्रुघ्न रखा। इन सभी बालकों के चेहरे पूर्वाभाद्रपाद और उत्तराभाद्रपद सितारों की तरह थे।

श्रीराम और उनके भाईयों के गुरु कौन थे?

रामायण कालखंड के 3 बड़े ऋषि हुए हैं। जिनमें उत्तर भारत के महर्षि वशिष्ठ, दक्षिण भारत में महर्षि अगस्त्य और मध्य भारत में महर्षि विश्वामित्र शामिल हैं। भगवान राम और लक्ष्मण को क्रमशः गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र और अगत्स्य मुनि ने युद्ध कौशल व दिव्यास्त्रों की दीक्षा दी थी। जबकि भरत और शत्रुघ्न को युद्ध कौशल व अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा गुरु वशिष्ठ से ही प्राप्त हुई थी।

रामायण के बालकाण्ड खंड के अनुसार महर्षि वशिष्ठ श्रीराम के कुल गुरू थे, इसलिए राम समेत चारों भाइयों को प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने ही दी थी। ऋषि वशिष्ठ ने श्रीराम को राजपाट संभालने का ज्ञान दिया था। इसके साथ ही वेद-पुराण की भी शिक्षा दी थी। यही नहीं भगवान राम का राज्याभिषेक भी ऋषि वशिष्ठ के हाथों ही हुआ था। राजा दशरथ के चारों पुत्रों का अध्ययन महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में हुआ था।

जब चारों राजकुमार अपनी शिक्षा पूर्ण कर अयोध्या लौटे, तब एक दिन ऋषि विश्वामित्र, राजा दशरथ के पास पहुंचे। उन्होंने वहां आकर राजा दशरथ से कहा कि वन में स्थापित हमारे आश्रमों को राक्षस नष्ट कर रहे हैं। वे हमें यज्ञ नहीं करने देते और हमारे ऋषि-मुनियों को परेशान करते हैं। हमारी संस्कृति खतरे में है। इसलिए कृपा कर आप अपने दो पुत्र राम और लक्ष्मण यज्ञादि के रक्षार्थ हमें प्रदान करें। लेकिन राजा दशरथ अपने प्रिय पुत्रों को उनके साथ भेजने के लिए तैयार नहीं थे।

तब गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ से कहा कि इन्हें विश्वामित्र के साथ भेज दीजिए, क्योंकि व्यावहारिक ज्ञान उन्हें उनसे ही प्राप्त होगा। दशरथ ने राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेज दिया। विश्वामित्र ने श्रीराम और लक्ष्मण को धनुर्विद्या और शास्त्र विद्या का ज्ञान दिया। श्रीराम को परम योद्धा बनाने के पीछे विश्वामित्र ही थे। राम के पास जितने भी दिव्य शस्त्र थे वे सब विश्वामित्र के ही दिए हुए थे। हिंदू शास्त्रों के अनुसार महर्षि विश्वामित्र को त्रेता युग का सबसे बड़ा आयुध आविष्कारक माना जाता है।

भगवान राम के तीसरे गुरु महर्षि अगस्त्य को माना गया है। जब वनवास के दौर 10 साल तक भटकने और संघर्ष करने के बाद राम गोदावरी नदी के तट पर पंचवटी पहुंचते हैं। तब यहां उनकी मुलाकात महर्षि अगस्त्य से होती है। महर्षि अगस्त्य को मं‍त्रदृष्टा ऋषि कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने तपस्या काल में उन मंत्रों की शक्ति को देखा था। ऋग्वेद के अनेक मंत्र इनके द्वारा दृष्ट हैं।

महर्षि अगस्त्य ने ही ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 165 सूक्त से 191 तक के सूक्तों को बताया था। महर्षि अगस्त्य एक वैदिक ऋषि थे। श्रीराम को महर्षि अगस्त्य ने शस्त्र और शास्त्र दोनों विद्या सिखाई थी। रामायण में एक प्रसंग है कि रावण के साथ युद्ध करते हुए जब राम थक जाते हैं और हताश होकर बैठ जाते हैं। तब महर्षि अगस्त्य, राम का हौसला बढ़ाते हुए कहते हैं, 'हे राम आप आदित्य हृदयस्तोत्र का पाठ करके सूर्य भगवान को अर्घ्य प्रदान करें। यह आपके अंदर आई मानसिक और शारीरिक थकावट का नाश करेगा।'

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