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Amritpal Arrest: भिंडरावाले की राह पर है अमृतपाल, दोनों ने अपनाए ये समान तरीके

खुद को जरनैल सिंह भिंडरावाले का 'वारिस' कहने वाला अमृतपाल सिंह अब पुलिस की गिरफ्त में है। गौरतलब है कि उसने भिंडरावाले जैसा बनने के लिए अपनी आंखों तक की सर्जरी करवा डाली।

punjab Amritpal singh connection with Bhindranwale followed same methods

Amritpal Arrest: खालिस्तान समर्थक और 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख अमृतपाल सिंह को 23 अप्रैल 2023 को पंजाब पुलिस ने मोगा जिले के रोडे गांव से गिरफ्तार कर लिया है। ऐसे में यह बात गौर करने वाली है कि जिस रोडे गांव से वह गिरफ्तार किया गया है, वह जरनैल सिंह भिंडरावाले का पैतृक गांव है। वहीं अमृतपाल के गिरफ्तार किए जाने और उसकी पिछली कुछ गतिविधियों को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह दूसरा जरनैल सिंह भिंडरावाले यानी 'भिंडरावाले 2.0' बनने की कोशिश कर रहा था।

भिंडरावाले एक खालिस्तान समर्थक था और 6 जून 1984 को खालिस्तानी आतंकियों के कब्जे से स्वर्ण मंदिर को मुक्त कराने हेतु किए गए सेना के 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के दौरान वह मारा गया था। अमृतपाल भी उसी राह पर चल रहा था। भिंडरावाले की तरह अमृतपाल भी खालिस्तान का समर्थक है और दोनों में काफी समानताएं भी हैं। चलिए जानते हैं अमृतपाल सिंह और भिंडरांवाले में क्या समानताएं हैं?

भिंडावाले जैसा दिखने के लिए कराई आंखों की सर्जरी

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में भारत लौटने से पहले अमृतपाल ने भिंडरावाले जैसा दिखने के लिए जॉर्जिया में जाकर अपनी आंखों की सर्जरी कराई थी। वहीं 'वारिस पंजाब दे' का प्रमुख बनने से पहले अमृतपाल ने अपने वेशभूषा में भी काफी बदलाव किया। पहले वह 'मोना' (एक ऐसा सिख जो दाढ़ी-बाल ट्रिम कर लेता है) हुआ करता था।

बाद में उसने सिख परंपरा के अनुसार अमृत चखा और सख्त अनुशासन वाला जीवन बिताना स्वीकार किया। उसने पश्चिमी पहनावे को छोड़कर लंबी बाना शर्ट और एक दुमला पगड़ी पहन ली। उसकी पगड़ी बांधने की रस्म (दस्तारबंदी) भिंडरावाले के प्रैतृक गांव में आयोजित करवाई गई थी। वहीं उसके पगड़ी को स्टाइल करने और आगे-पीछे भारी हथियारों से लैस निहंग सिखों की फौज लेकर घूमना, यह सब उसकी भिंडरावाले बनने की कोशिश थी। वहीं उसने अपनी पोशाक तक भिंडारांवाले जैसी बनवाई है। साथ ही वह खुद को जरनैल सिंह भिंडरावाला का 'वारिस' भी कहता है।

देश को तोड़ने की साजिश?

जिस तरह से जनरैल सिंह भिंडरावाले 'खालसा आंदोलन' की बदौलत भारत से पंजाब को काटकर खालिस्तान बनाने की मंशा पाले हुए था और जिसके लिए उसने शासन को चुनौती तक दी थी। उसी तरह अमृतपाल सिंह की महत्वाकांक्षा है कि खालिस्तान नाम से अगर मुल्क बने। जिस तरह भिंडरावाले ने खुलेआम इंदिरा गांधी सरकार और प्रशासन को चैलेंज दिया था, उसी तरह अमृतपाल ने तो सीधे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री तक को चुनौती दे दी। जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

'दमदमी टकसाल' और 'वारिस पंजाब दे' का प्रमुख

जनरैल सिंह भिंडरावाले दमदमी टकसाल (सिखों का एक संगठन) का मुखिया था और यह 80 के दशक में सिखों के एक विशेष तबके में अपनी अच्छी पकड़ रखता था। भिंडरावाले के दुस्साहस के पीछे दमदमी टकसाल का समर्थन ही था, जिसकी बदौलत उसने इंदिरा सरकार तक से पंगा ले लिया था। उसी तरह अमृतपाल सिंह भी उसी के नक्शेकदम पर चलते हुए 'वारिस पंजाब दे' का स्वयंभू अध्यक्ष बन गया है। इसी संगठन से जुड़े सिख युवाओं की बदौलत ही अमृतपाल सिंह कानून व्यवस्था को चुनौती देने लगा।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी (धर्म) का किया इस्तेमाल

कभी भिंडरावाले ने भी अपने व्यक्तिगत मकसद की पूर्ति के लिए श्री गुरुग्रंथ साहिब की पालकी का 'आसरा' लिया था, ठीक उसी तरह अमृतपाल ने भी अजनाला पुलिस थाने पर हमला किया तो उसके साथ भी श्री गुरुग्रंथ साहिब की पालकी थी। इसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ जबरदस्त हिंसा हुई, इसके बाद सरकार के एक मंत्री कहते हैं कि छह जिलों की पुलिस ने 'हथियार' का प्रयोग इसलिए नहीं किया कि श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी न हो। यानी अमृतपाल ने भिंडरावाले की तरह इतिहास को दोहराया।

क्योंकि 80 के दशक में जब भिंडरावाले ने अकाल तख्त साहिब में पनाह नहीं ली थी और तब पुलिस ने उस पर एक मुकदमा हरियाणा में दर्ज किया था। उसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री ज्ञानी जैल सिंह ने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल को आदेश दिया था कि उसे सुरक्षित हरियाणा से निकलने दिया जाये और गिरफ्तार न किया जाये। बाद में हरियाणा पुलिस का आधिकारिक बयान था कि चूंकि 'संत जी' के साथ श्री गुरुग्रंथ साहिब की पालकी थी, इसलिए उन्हें जाने दिया गया!

अमृत संचार अभियान (सिख धर्म का प्रचार-प्रसार)

भिंडरावाले एक सिख 'संत' भी था ये तो सभी जानते हैं। वह धर्म का प्रसार या यूं कहें कि खालसा सिखों के प्रसार के लिए अमृत संचार अभियान चलाता था। हजारों की संख्या में लोग उससे जुड़ते थे। साथ ही वो दूसरे लोगों को सिख धर्म का अमृत ग्रहण करवाता था। इसी तरह अमृतपाल सिंह भी अमृत संचार अभियान चलाता है। अमृतपाल सिंह ने अपना पहला अमृत संचार अभियान राजस्थान के श्रीगंगानगर में आयोजित किया था। जिसमें तकरीबन 647 लोगों ने अमृत ग्रहण किया और खालसा सिखों का हिस्सा बने। इसके बाद आनंदपुर साहिब में उसने 927 सिखों, हिंदुओं और ईसाइयों को अमृत ग्रहण कराया। अमृतसर में पूरे भारत के 1,027 सिखों और हिंदुओं ने अमृतपान किया था।

दोनों का पाकिस्तानी कनेक्शन

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    खबरों के मुताबिक अमृतपाल सिंह पर शक है कि वह पाकिस्तान के कुछ युवाओं के संपर्क में था, साथ ही पाकिस्तान के कुछ युवाओं को आईएसआई की शह पर भारत में दाखिल करवाने की भी प्लानिंग कर रहा था। अमृतसर के डीआईजी स्वपन शर्मा ने दावा किया कि उनके कुछ पाकिस्तान-आईएसआईएस लिंक थे। वहीं जरनैल सिंह भिंडरावाले की बात करें तो खालिस्तान बनाने की मांग को लेकर पाकिस्तान खुलेआम जगजीत सिंह चौहान का समर्थन दे रहा था। जगजीत सिंह, भिंडरावाले के संपर्क में था।

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