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Pulwama Attack: पाकिस्तान और लादेन की मदद से मसूद अजहर ने बनाया था जैश-ए-मोहम्मद

पुलवामा हमले के तकरीबन 75 दिन बाद मौलाना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया था लेकिन आज भी वो पाकिस्तान में चैन की सांस ले रहा है।

Pulwama Attack: Masood Azhar formed Jaish-e-Mohammed with the help of Pakistan and Laden

Pulwama Attack: आज से चार साल पहले 14 फरवरी 2019 को पाकिस्तान की 'सरपरस्ती वाले' आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। दोपहर के करीब 3:00 बजे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक आतंकवादी ने श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CPRF) के काफिले में विस्फोटक से भरे एक वाहन को ले जाकर उसमें टक्कर मार दी थी। इस आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। CRPF के काफिले में 78 बसें थीं।

हालांकि, भारत ने महज 12 दिनों बाद ही इस आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब भी पाकिस्तान को दिया था। जब भारत ने 26 फरवरी को बालाकोट एयरस्ट्राइक करके जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को लाइन ऑफ कंट्रोल में घुसकर ढेर कर दिया था। वहीं इस घटना को अंजाम देने वाले हमलावर का नाम आदिल अहमद डार था। जो मौके पर ही मारा गया। इसके अलावा पुलवामा की साजिश में शामिल छह आरोपी हिरासत में हैं और सात मुठभेड़ में ढेर हो चुके हैं।

मारे गए आतंकियों में मसूद अजहर का भतीजा मोहम्मद उमर फारूक भी शामिल था। साथ ही जैश का पाकिस्तानी कमांडर कामरान अली, दक्षिण कश्मीर में सक्रिय जैश के कमांडर मुदस्सर अहमद खान और सज्जाद बट, कमांडर कारी यासिर, कमांडर मोहम्मद इस्माइल भी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। लेकिन, गौर करने वाली बात ये है कि इस हमले का सबसे बड़ा सरगना या कहें मास्टरमाइंड अभी भी पाकिस्तान में छिपा बैठा है।

पुलवामा हमले को लेकर राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खुलासा किया था कि जैश-ए-मोहम्‍मद के प्रमुख मसूद अजहर, रौउफ असगर समेत कुछ आतंकी हमले से पहले और हमले के बाद कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों के साथ लगातार संपर्क में थे। कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब से भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक किया, तब से मसूद अजहर पाकिस्‍तानी सेना की सुरक्षा में ही रहता है।

कौन है आतंकी मसूद अजहर

मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना है। मसूद अजहर का सीधा हाथ कई आतंकी हमलों में शामिल है। उनमें संसद भवन पर हमला (दिसंबर, 2001), जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला (अक्टूबर 2001), इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण (दिसंबर 1999), अयोध्या और वाराणसी धमाके, 2 जनवरी 2016 को पठानकोर्ट एयरबेस पर हमला समेत पुलवामा आतंकी हमला (फरवरी 2019) में मसूद अजहर का सीधा हाथ है। हालांकि, साल 2019 में पुलवामा हमले के तकरीबन 75 दिन बाद चीन द्वारा चार बार वीटो पावर इस्तेमाल करने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रयासों की बदौलत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया गया।

भारत के खिलाफ साजिश

जनवरी 1994 में भारतीय सुरक्षाबलों ने श्रीनगर से हरकत-उल-अंसार आतंकी संगठन के तीन प्रमुख सरगनाओं नसरुल्लाह मंसूर, सज्जाद अफगानी और मसूद अज़हर को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों से हरकत-उल-अंसार कमजोर पड़ गया और बाद में लश्कर-ए-तैयबा संगठन में शामिल हो गया। वहीं 1997 में हरकत-उल-अंसार पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि इसके तार ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से जुड़े हुए थे।

दूसरी तरफ पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने भारतीय जेलों में कैद मसूद अजहर सहित अन्य दोनों आतंकी सरगनाओं को बाहर निकलवाने के लिए लगभग सात सालों तक कई बार प्रयास किये। फिर दिसंबर 1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान IC 814 को आतंकियों ने हाईजेक कर लिया। विमान को जबरन कंधार ले जाया गया जोकि उस समय तालिबान के कब्जे में था। विमान में सवार यात्रियों के बदले मसूद अजहर के साथ-साथ दो अन्य आतंकियों को छुड़ाने में पाकिस्तान सरपरस्ती वाले आतंकी संगठन सफल हो गये।

खबरों के मुताबिक भारत से निकलने के बाद मसूद अजहर सीधे ओसामा बिन लादेन के पास गया। साल 2000 में आईएसआई, तालिबान और अलकायदा ने मिलकर उसे जैश-ए-मोहम्मद को खड़ा करने में मदद दी। एक अमेरिकी अखबार ने साल 2002 में खुलासा किया कि मसूद अजहर का ओसामा से पुराना रिश्ता है। यूनाइटेड नेशंस सिक्यूरिटी काउंसिल (UNSC) को भी इन संबंधों की पूरी जानकारी है। काउंसिल के मुताबिक जैश को अलकायदा और तालिबान से पैसा, योजना, सुविधा और तैयारी के लिए सहयोग मिला था।

मसूद अजहर ने भारत को दिया सबसे बड़ा 'जख्म'

आतंकी मसूद अजहर ने भारत को सबसे बड़ा जख्म पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को दिया। जब सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर आतंकी हमला हुआ। इस घातक हमलें में अर्धसैनिक बल के 40 जवान शहीद हो गये। इस घटना को मसूद के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया था। तब भारत ने भी जैश के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए बालाकोट और पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकाने एयर स्ट्राइक से तबाह कर दिये थे। बालाकोट से एबटाबाद की दूरी सिर्फ 62 किलोमीटर हैं। एबटाबाद पाकिस्तान का वही शहर है, जहां अमेरिकी फौज ने ओसामा को घर में घुसकर मारा था।

यह भी पढ़ें: Pulwama anniversary: बोले पीएम मोदी- 'देश जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता'

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