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Political Murder: नफे सिंह राठी से पहले भी प्रमोद महाजन जैसे कई राजनेताओं की गोली मारकर की गई थी हत्या

Political Murder News Hindi: दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ में अज्ञात हमलावरों द्वारा इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष नफे सिंह राठी की उनकी एसयूवी पर गोलियों से हमला कर हत्या कर दी गई। राठी बहादुरगढ़ से विधायक रह चुके थे।

इनेलो नेता अभय चौटाला के बयानों के अनुसार, राठी को जान से मारने की धमकियां मिलने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली।

Nafe Singh Rathee

हत्या से जुड़ी एफआईआर में पूर्व विधायक नरेश कौशिक समेत चार लोगों को नामजद किया गया है। राठी से पहले भी देश में कई राजनेताओं की पिछले कुछ वर्षों में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

नब किशोर दास

ओडिशा के मंत्री नब किशोर दास को 29 जनवरी, 2023 को झारसुगुड़ा जिले के ब्रजराजनगर के एक कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) गोपाल कृष्ण दास ने गोली मार दी। गोपाल दास को नब का पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ) नियुक्त किया गया था।

गोपाल का नब दास के साथ व्यक्तिगत द्वेष था और वो लंबे समय से उनको मारने की योजना बना रहा था। नब जैसे ही कार्यक्रम के लिए अपनी गाड़ी से उतरे, गोपाल उनके पास गया और उन्हें सीने में गोली मार दी। जांच में पाया गया कि गोपाल कई वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित था।

किदारी सर्वेसर्वो राव

आंध्र प्रदेश के अराकू से विधायक किदारी सर्वेसर्वो राव की 23 सितंबर, 2018 को माओवादियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। किदारी के साथ अराकू के पूर्व विधायक सिवेरी सोमा की भी हत्या कर दी गई। दोनों लोग गाड़ी से सफर कर रहे थे, जब कुछ माओवादियों ने उनकी गाड़ी को रोका और उन्हें गोली मार दी।

दोनों नेताओं की हत्या के बाद माओवादियों ने एक पत्र के माध्यम से हत्या की जिम्मेदारी ली और इन नेताओं पर खनन माफिया बनने और जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद आदिवासी कल्याण के काम ना करने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया।

नंद कुमार पटेल

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कांग्रेस नेताओं के एक काफिले पर हमला करने के दौरान माओवादियों ने उस समय के खरसिया के कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल को बंधक बना कर मार डाला। इस हमले में 27 लोगों की मौत हो गई जिसमें नंदकुमार पटेल भी शामिल थे, जो उस समय छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रमुख भी थे।

इस घटना को अंजाम कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) ने दिया था। चौंकाने वाली बात तो यह है कि माओवादियों ने बाद में स्वीकार किया कि उनके द्वारा नंदकुमार और उनके बेटे दिनेश की हत्या एक "बड़ी गलती" थी।

प्रमोद महाजन

प्रमोद महाजन भाजपा के एक वरिष्ठ नेता थे, जिन पर 22 अप्रैल 2006 को उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने गोली चला दी थी। उस सुबह प्रवीण ने एक विवाद के बाद मुंबई में प्रमोद के अपार्टमेंट के अंदर अपनी लाइसेंसी पिस्टल से उन्हें गोली मार दी। प्रवीण ने प्रमोद पर चार गोलियां चलाई थी। प्रमोद ने 13 दिन तक अस्पताल में संघर्ष किया, इसके बाद 3 मई 2006 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।

पुलिस ने दावा किया कि "यह लंबे समय से बनी नाराजगी से उपजा एक सोचा-समझा हमला था।" प्रवीण ने बड़े भाई प्रमोद पर उसे 'नजरंदाज' और 'अपमानित' करने और उसका समुचित हक ना देने का आरोप लगाया था।

हरेन पंड्या

26 मार्च 2003 को गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री हरेन पंड्या की अहमदाबाद में हत्या कर दी गई थी। लॉ गार्डन इलाके में टहलते समय दो हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी।

हरेन की हत्या का मामला बहुत लंबे समय तक कोर्ट में चक्कर काटता रहा, जिसके बाद जुलाई 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने लंबी कानूनी कार्रवाई के बाद पंड्या की हत्या के लिए 12 आरोपियों को सजा सुनाई।

कृष्णानंद राय

उत्तर प्रदेश के मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की 29 नवंबर, 2005 को राजनीतिक विवाद के चलते हत्या कर दी गई थी।

राय एक कार्यक्रम से लौट रहे थे, जब रास्ते में ताक लगाए बैठे कुछ हत्यारों ने उनके समेत 7 लोगों की हत्या कर दी। घटनास्थल से AK-47 के 400 से अधिक कारतूस बरामद हुए, जिनमें से 21 गोलियां राय के शरीर में मिली।

राय को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने चेतावनी दी थी कि उनको मारने के लिए गैंगस्टर और विधायक मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी ने सुपारी दी है। ठोस फॉरेंसिक सबूत के बावजूद, सभी आठ आरोपियों को जुलाई 2019 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बरी कर दिया।

परितला रविंद्र
तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के एक प्रमुख नेता और विधायक परितला रविंद्र की 24 जनवरी 2005 को किराए के हत्यारों ने उनके कार्यालय के पास बम विस्फोट और गोली मारकर हत्या कर दी। उनकी हत्या उनके और अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक हस्तियों, विशेष रूप से गांगुला सूर्यनारायण रेड्डी के बीच एक हिंसक झगड़े की परिणीति थी।

रविंद्र की हत्या के मुख्य आरोपी श्रीनिवास रेड्डी की बाद में 2008 में अनंतपुर जेल में मलेला ओम प्रकाश द्वारा हत्या कर दी गई। बाद में कोर्ट ने रविंद्र की हत्या के मामले में कुल आठ अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

फूलन देवी
भारत की 'बैंडिट क्वीन' के नाम से मशहूर फूलन देवी की 25 जुलाई 2001 में दिल्ली में उनके घर के बाहर हत्या कर दी गई थी। नकाबपोश हत्यारों ने उन्हें गोली मारी थी।

जब फूलन देवी की हत्या हुई तब वह समाजवादी पार्टी से मिर्जापुर की सांसद थी। उनके हत्या का मुख्य आरोपी शेर सिंह राणा था, जिसने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर उनकी हत्या कर दी थी।

10 साल की सुनवाई के बाद राणा को हत्या के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। दोषी हत्यारे शेर सिंह राणा ने दावा किया कि फूलन देवी की हत्या उनके द्वारा ऊंची जाति पर किए गए अत्याचारों का बदला था।

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