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कारवां गुजर गया...... से रातों-रात स्टार बने थे कवि गोपालदास नीरज, जानिए उनकी खास बातें...

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      Famous Hindi Poet Gopal Das Neeraj का निधन, Padma Bhushan से किए गए थे सम्मानित | वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्ली। पद्मभूषण गीतकार और कवि गोपालदास नीरज ने गुरुवार शाम दुनिया को अलविदा कह दिया। लंबे समय से बीमार चल रहे देश के महान कवियों में से एक कवि नीरज ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कल शाम 7:35 मिनट पर अंतिम सांस ली। 93 वर्ष के नीरज सीने के संक्रमण से ग्रस्त थे। उनके पुत्र शशांक प्रभाकर ने बताया कि आगरा में प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें बीते मंगलवार को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका।

       जन्म प्रेमनगरी आगरा में हुआ था....

      जन्म प्रेमनगरी आगरा में हुआ था....

      मां सरस्वती के महान उपासक गोपालदास का जन्म 4 जनवरी 1925 को यूपी के इटावा जिले के ग्राम पुरावली में हुआ था। उनका पूरा नाम गोपालदास सक्सेना 'नीरज' था। मात्र 6 वर्ष की उम्र में कवि नीरज के सिर से पिता का साया उठ गया था, आर्थिक और पारिवारिक कष्ट के बावजूद नीरज ने 1942 में एटा से हाई स्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। शुरुआत में इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर नौकरी की। नौकरी करने के साथ प्राइवेट परीक्षाएं देकर उन्होंने बीए और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिन्दी साहित्य से एमए किया था। इसके बाद इन्होंने मेरठ के एक कॉलेज में अध्यापन का काम किया लेकिन इसके बाद इन्होंने वो नौकरी छोड़ दी।

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      अलीगढ़ में अध्यापन का कार्य किया

      अलीगढ़ में अध्यापन का कार्य किया

      इसके बाद वे अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक नियुक्त किए गए लेकिन नीरज की मंजिल तो कुछ और ही थी, इसलिए शब्दों के इस जादूगर को एक जगह बांधा नहीं जा सकता था। ये वो दौर था, जब उनके नाम पर कवि सम्मेलन में भीड़ जुटने लगी थी।

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       'कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे '

      'कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे '

      कवि सम्मेलनों में अपार लोकप्रियता के चलते नीरज को मुंबई फिल्म जगत ने गीतकार के रूप में 'नई उमर की नई फसल' के गीत लिखने का निमंत्रण दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पहली ही फ़िल्म में उनके लिखे गीत 'कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे ' बेहद लोकप्रिय हुआ जिसका परिणाम यह हुआ कि वे मुंबई में रहकर फ़िल्मों के लिये गीत लिखने लगे।

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      पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से सम्मानित हुए थे 'नीरज'...

      पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से सम्मानित हुए थे 'नीरज'...

      नीरज वो पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से। यही नहीं, फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला है। उनके जाने से आज साहित्य का कैनवस पूरी तरह से सूना हो गया है, जिसकी कमी कोई पूरा नहीं कर सकता है।

      शब्दों के इस जादूगर को वनइंडिया परिवार भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है...

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      English summary
      Hindi poet Gopaldas Neeraj passed away this evening at the AIIMS trauma centre. He was 93.Read his profile in hindi.

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