Per Capita Income: नौ सालों में प्रतिव्यक्ति आय हो गयी दोगुनी, जानें क्या है मापने का तरीका

प्रति व्यक्ति आय वह पैमाना है जिससे देश के नागरिकों के आर्थिक विकास का पता चलता है। क्या आप जानते हैं कि प्रति व्यक्ति आय में विश्व का सबसे अमीर व सबसे गरीब देश कौन सा है?

Per capita income doubled in nine years know how calculated per capita income

Per Capita Income: अभी हाल ही राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई, जिसके अनुसार साल 2014-15 में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनने के उपरांत साल 2022-23 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 86,647 रूपये से बढ़कर 1,72,000 रूपये प्रति वर्ष (99 प्रतिशत की वृद्धि) हो गई हैं। यानि 9 वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है। यह प्रति व्यक्ति आय (per capita income) क्या होती है, इसको कैसे मापा जाता है, आईये जानते हैं।

क्या होती है प्रति व्यक्ति आय

प्रति व्यक्ति आय अर्थात 'पर केपिटा इनकम' का अर्थ है कि किसी देश, राज्य, नगर अथवा क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों की सालाना औसत कमाई। इसकी गणना करने हेतु उस देश, राज्य, नगर अथवा क्षेत्र में रहने वाले लोगों की कुल आय को कुल जनसंख्या से विभाजित (डिवाईड) किया जाता है। इसे औसत आय भी कहते हैं। इसको सरल भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि माना एक परिवार में 10 सदस्य हैं और परिवार की कुल सालाना आय 15 लाख रूपये है। तो उनकी प्रति व्यक्ति आय (15 लाख/10) 1.5 लाख रूपये हुई।

अगर इसके शब्दिक अर्थ की बात करें तो 'केपिटा' लैटिन भाषा से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ होता है - व्यक्ति, और "पर केपिटा" का अर्थ हुआ प्रति व्यक्ति। इनकम यानि आय। प्रति व्यक्ति आय देश के विकास का महत्वपूर्ण सूचकांक होती है। आमतौर पर माना जाता है कि जिस देश की प्रति व्यक्ति आय जितनी अधिक होगी, वह उसकी समृ़द्धि व सम्पन्नता का मानक होगी।

इसको कौन और कैसे मापता है

भारत की प्रति व्यक्ति आय का आकलन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा किया जाता है। किसी देश की प्रति व्यक्ति आय की गणना उस देश की राष्ट्रीय आय को उसकी कुल जनसंख्या से विभाजित कर प्राप्त होती है।

आजादी के बाद कितनी आय बढ़ी

साल 1947 में भारत की प्रति व्यक्ति आय मात्र 249.60 रूपये सालाना थी। गौरतलब है कि तब से लेकर 2020-21 तक प्रति व्यक्ति आय में लगभग 500 गुना वृद्धि हो गयी है। जहां 1950 में प्रति व्यक्ति आय केवल 265 रूपये थी, जो 2020-21 में बढ़कर 128,829 रूपये सालाना हो गयी।

प्रति व्यक्ति आय साल 1950-51 से 1960-61 के अंतराल में 384 रूपये हो गयी थी। इन 10 सालों में भारत की प्रति व्यक्ति आय में 119 रूपये यानी 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फिर 1960-70 में 384 रूपये से 886 रूपये हो गयी। इस प्रकार इस दशक में लगभग 131 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

1970-80 के दौरान 1995 रुपये हो गयी जोकि लगभग 125 प्रतिशत की वृद्धि थी। 1980-1990 के दशक में यह 6162 रुपये हुई और करीब 209 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। अगले दशक यानी 1990-2000 में प्रति व्यक्ति आय 18667 रुपये हो गयी। यह लगभग 203 प्रतिशत की ग्रोथ थी। फिर 2000-2010 में 56971 रुपये के साथ 205 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी। साल 2010 से 2020 तक यह 128,829 रुपये होकर इसमें 126 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

वैश्विक स्तर पर प्रति व्यक्ति आय

भारत आज दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यस्था बन गया है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू 2021 द्वारा जारी आंकड़ों के अुनसार यूरोप के छोटे से देश मोनाको में प्रति व्यक्ति आय 234,317 अमेरिकी डॉलर है जोकि दुनिया में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिका 9वें स्थान पर है और वहां प्रति व्यक्ति आय 69,185 डॉलर है। जबकि चीन का 12,437 अमेरिकी डॉलर के साथ 76वां स्थान है। अगर सबसे गरीब देश की बात करें तो बुरुंडी नामक अफ्रीकी देश की प्रति व्यक्ति आय सबसे कम मात्र 265 अमेरिकी डॉलर है।

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