प्रति व्यक्ति आय क्या है? कैसी की जाती है कैलकुलेट, समझें पूरा गणित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 में केंद्र सरकार की सत्ता में आने के बाद भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब दोगुनी हो गई है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा हाल ही में देश की प्रति व्यक्ति आय (पीसीआई) के आंकड़े जारी किए गए हैं। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से (2014-15) भारत की प्रति व्यक्ति आय (पर कैपिटा इनकम) बढ़कर दोगुनी हो गई है। 2014-15 में भारत की प्रति व्यक्ति आय 86,647 रुपए सालाना थी। जो 2022-23 में दोगुनी होकर 1,72,000 रुपए हो गई है। हालांकि कि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के लोग अमीर हुए हैं। आईए पहले यह जान लेते हैं कि प्रति व्यक्ति आय क्या होगी है।

किसे कहते हैं प्रति व्यक्ति आय?
प्रति व्यक्ति आय किसी देश में रहने वाले व्यक्तियों की औसत इनकम होती है। इसे कैलेकुलेट करने के लिए हम उस देश के जीडीपी को उसकी कुल आबादी से भाग कर देते हैं। इसके बाद जो संख्या सामने आता है वो ही प्रति व्यक्ति आय कहलाती है। इससे किसी भी देश या राज्य को लोगों की आय की स्थिति क्या है यह पता चलता है। यह बताती है कि, लोग किन चीजों को खरीदने में पैसा खर्च कर रहे हैं।

इसकी गणना कैसे की जाती है?
देश की कुल आय/ देश की कुल जनसंख्या = प्रति व्यक्ति आय
चलिए एक उदाहरण देखें:
वर्ष 2013-14 में भारत की आय -1114060650000000.00 /वर्ष 2013-14 में कुल जनसंख्या - 1,252,000,000= 889824.80
तो वर्ष 2013-14 = 889824.80 में हमारी प्रति व्यक्ति आय

कोरोना काल में गिरी की लोगों की इनकम
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक, पिछले 8 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में 99 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। देश में प्रति व्यक्ति आय 2014-15 में 72,805 रुपये से 35 प्रतिशत बढ़कर 2022-23 में 98,118 रुपये हो गई है। हालांकि , कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में दोनों रियल टर्म और नॉमिनल टर्म में प्रति व्यक्ति आय में गिरावट देखने को मिली थी।

वृद्धि आबादी के शीर्ष दस फीसद लोगों के खाते में गई
अर्थशास्त्री जयति घोष ने प्रति व्यक्ति आय के दोगुना होने पर कहा, देश की जीडीपी को मौजूदा मूल्यों पर देखा जा रहा है, लेकिन यदि इस दौरान की मुद्रास्फीति पर भी गौर करेंगे तो पाएंगे कि यह वृद्धि बहुत कम है। 'ज्यादातर वृद्धि आबादी के शीर्ष दस फीसद लोगों के खाते में गई है। इसके विपरीत औसत वेतन घट रहा है या यह और भी कम हो गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पर कैपिटा इनकम बढ़ने का ये मतलब नहीं है कि, देश की आबादी अमीर हो गई है।












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