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Blasphemy in Pakistan: पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून बना अल्पसंख्यकों की जान की आफत

Blasphemy in Pakistan: बीते दिनों पाकिस्तान के फैसलाबाद में कुरान के कथित अपमान से नाराज एक भीड़ ने ईसाइयों पर हमला किया। पंजाब (पाकिस्तान) पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिले की जरांवाला में उग्र भीड़ ने कम-से-कम 20 चर्चों और ईसाइयों के 86 घरों को जला दिया। मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि ये चर्च ईशनिंदा को बढ़ावा दे रहे थे। भीड़ ने पहले ईसाइयों के घरों को लूटा और फिर उनमें आग लगा दी। बाद में पुलिस ने इस हिंसा से जुड़े 160 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और कुरान का कथित अपमान करने वाले दो ईसाईयों को भी गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उग्र भीड़ में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़े हुए लोग भी मौजूद थे। इस संबंध में पुलिस ने हिंसा भड़काने के आरोप में टीएलपी और जमात अहले सुन्नत के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह जनरल जिया उल हक ने अपने शासनकाल में पाकिस्तान पीनल कोड में धारा 295-बी और 295-सी को जोड़कर ईशनिंदा कानून बनाया था।

Pakistans blasphemy law becomes threat to the lives of minorities

पाकिस्तान में ईसाइयों की स्थिति

2017 की जनगणना के अनुसार पाकिस्तान में ईसाइयों की आबादी वहां की कुल आबादी का 1.27 प्रतिशत है। पहले ये ईसाई दलित हिंदू थे। ब्रिटिश काल में इन्होंने ईसाई मिशनरियों के दबाव में ईसाई धर्म अपनाया। ईसाइयों की अधिकांश आबादी मजदूरी और साफ-सफाई का काम करती है। कुछ उच्च तबके के ईसाई भी पाकिस्तान के कराची जैसे शहरों में रहते हैं। लेकिन ईसाईयों के प्रति मुसलमानों की नफरत को देखते हुए वे पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बस रहे हैं। ईसाइयों की अधिकांश आबादी फैसलाबाद, पेशावर, कराची और लाहौर में रहती है।

ईशनिंदा के जाल में पाकिस्तानी ईसाई

सेंटर फॉर सोशल जस्टिस (सीएसजे) के आंकड़े बताते हैं कि इस साल 16 अगस्त तक पाकिस्तान में 198 लोगों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, जिनमें से 4.4 प्रतिशत ईसाई हैं। इसके साथ ही 1987 से 2022 तक कम-से-कम 2,120 लोगों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया है। सीएसजे का दावा है कि पिछले 36 सालों में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग के 75 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 3.52 प्रतिशत है, बावजूद इसके ईशनिंदा के कुल आरोपियों में 52 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं।

ईशनिंदा का बेजा इस्तेमाल

ईशनिंदा के तहत ईसाइयों पर सबसे ज्यादा मामले साल 2000 के बाद से दर्ज हुए। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इनमें से अधिकांश मामले बदले की भावना के तहत दर्ज कराए गए थे। साल 2005 में एक उग्र भीड़ ने फैसलाबाद में चर्चों, स्कूलों और ईसाइयों के घरों को निशाना बनाया था। भीड़ ने एक ईसाई पर कुरान के पृष्ठों को फाड़ने का आरोप लगाया था। इसके बाद ईसाइयों पर व्यापक पैमाने पर हिंसा शुरू हुई थी।

ईशनिंदा का सबसे बहुचर्चित मामला एक ईसाई महिला आसिया बीबी का है। पंजाब प्रांत के शेखूपुरा की रहने वाली आसिया बीबी का साल 2009 में अपनी पड़ोसी महिलाओं से झगड़ा हुआ था। इसी दौरान उन महिलाओं ने आसिया बीबी पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। इसके बाद आसिया को गिरफ्तार कर लिया गया। साल 2010 में निचली अदालत ने आसिया बीबी को दोषी करार दिया और उसे मौत की सजा सुनाई। 2014 में लाहौर उच्च न्यायालय ने उसकी सजा को बरकरार रखा। बाद में मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। साल 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने आसिया बीबी को ईशनिंदा के आरोप से बरी कर दिया। इसके बाद भी आसिया बीबी की जान पर खतरा बना रहा और उसे पाकिस्तान छोड़ कर भागना पड़ा।

अगस्त 2012 में एक 14 वर्षीय ईसाई लड़की रिमशा मसीह को ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किया गया। नवंबर 2012 में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने रिमशा को बरी कर दिया। अदालत में यह साबित हुआ कि एक स्थानीय मौलवी ने उसे झूठे आरोप में फंसाया था। इसके बाद रिमशा और उसका परिवार पाकिस्तान छोड़कर कनाडा चला गया।

साल 2014 में कुरान के अपमान के आरोप में एक ईसाई दंपत्ति शहजाद मसीह और उसकी पत्नी शमा बीबी को कट्टरपंथियों के एक समूह ने पीट-पीट कर मार डाला। इसके बाद, उनके शव को ईंट की भट्टी में जला दिया गया। साल 2017 में भी एक 35 वर्षीय ईसाई नदीम जेम्स को कथित ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। जुलाई 2022 में पाकिस्तान की एक अदालत ने एक ईसाई व्यक्ति अशफाक मसीह को मौत की सजा सुनाई। बताया जाता है कि साल 2017 में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अशफाक पर ईशनिंदा का आरोप लगाया था और इसके बाद उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था।

इसी साल के जून महीने में पाकिस्तान की एक अदालत ने नोमान मसीह नामक एक 22 वर्षीय ईसाई युवक को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। नोमान पर अपने मोबाइल में इस्लाम के खिलाफ आपत्तिजनक तस्वीरें रखने का आरोप है।

नेता भी हुए ईशनिंदा कानून के शिकार

4 जनवरी 2011 को पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की उनके ही अंगरक्षक मुमताज कादरी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। कहा जाता है कि सलमान तासीर ने ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा काट रही आसिया बीबी से मुलाकात की थी और उनकी माफी के लिए राष्ट्रपति से अनुरोध करने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने ईशनिंदा कानून को काला कानून भी बताया था। इसके बाद से तासीर को लगातार धमकियां मिल रही थीं। साल 2016 में कादरी को फांसी की सजा दी गई। इसका भी कट्टरपंथियों ने विरोध किया था और कादरी के नमाज-ए-जनाजा में हजारों मुसलमान शामिल हुए थे।

ईशनिंदा कानून का विरोध और आसिया बीबी का समर्थन करने पर पाकिस्तान के तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और ईसाई नेता शहबाज भट्टी की मार्च 2011 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इससे पहले भी उन्हें ईशनिंदा कानून का विरोध करने पर कई बार धमकियां मिल चुकी थीं।

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