Online Betting: कितना बड़ा है ऑनलाइन सट्टेबाजी का ‘काला बाजार’, पढ़ें पूरी डिटेल
Online Betting: महाराष्ट्र की नागपुर पुलिस ने 22 जुलाई 2023 को एक कथित सट्टेबाज अनंत उर्फ सोंटू नवरतन जैन के घर पर छापेमारी की। जिसमें पुलिस को उसके घर से 17 करोड़ रुपये कैश, 14 किलोग्राम सोना और 200 किलोग्राम चांदी बरामद हुई है। खबरों के मुताबिक महाराष्ट्र के गोंदिया स्थित एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सट्टेबाज ने एक बिजनेसमैन को नकली सट्टेबाजी ऐप में निवेश करने का लालच दिया था। इस दौरान आरोपी ने बिजनेसमैन से तकरीबन 58 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली।
पुलिस के मुताबिक अनंत जैन नाम के बुकी ने एक ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म बनाया था। जिससे वह लोगों को ठगा करता था। जब पीड़ित व्यापारी ने पुलिस को इस मामले में शिकायत दी। तब आरोपी के घर छापेमारी की गयी। लेकिन, आरोपी छापेमारी से ठीक एक दिन पहले ही दुबई भाग निकला। हालांकि, देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी से ठगी का यह कोई पहला मामला नहीं है।

कितना बड़ा है ऑनलाइन सट्टा का बाजार?
एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के मुताबिक साल 2021 में ऑनलाइन गेमिंग और लॉटरी से जुड़े तकरीबन 31 फ्रॉड सट्टेबाजी के मामले दर्ज किये गये थे।
हिंदुस्तान टाइम्स ने दोहा के इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्पोर्ट सिक्योरिटी के हवाले से लिखा है कि साल 2016 में भारत में अवैध सट्टेबाजी का कारोबार तकरीबन 150 बिलियन यानी करीब ₹10 लाख करोड़ का था। जबकि जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने बताया था कि भारत का सट्टा बाजार करीब $82 बिलियन का है। वहीं फेडरेशन ऑफ चेम्बर ऑफ कामर्स और इंडस्ट्री (FICCI) ने 2019 में अपनी एक रिपोर्ट में कुल सट्टा बाजार करीब $41 बिलियन यानि लगभग ₹3 लाख करोड़ का बताया था।
स्टेट्स न्यूज जर्नल के एक आंकड़े पर गौर करें तो भारत में इंटरनेट का प्रयोग करने वाले लोगों में से कम से कम 40% लोग साल में कम से कम एक बार किसी न किसी तरह की ऑनलाइन सट्टेबाजी खेल चुके है। इंटरनेट इन इंडिया रिपोर्ट 2022 में कहा गया है कि भारत में इस समय 75.9 करोड़ सक्रिय इंटरनेट यूजर हैं। मतलब लगभग 30 करोड़ से ज्यादा लोग ऑनलाइन सट्टेबाजी के दायरे में आ चुके हैं और इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।
आखिर कैसे होती है ऑनलाइन सट्टेबाजी?
कोरोना के बाद ऑनलाइन गेमिंग एकदम से बूम कर गया है। आजकल ऑनलाइन ऐप्स के जरिए कई तरह मैचों (क्रिकेट, फुटबॉल, लूडो, ताश व अन्य) पर करोड़ों-अरबों रुपये लगाये जाते हैं। इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते है।
बीते दिनों आईपीएल (क्रिकेट) खेला जा रहा था। उस दौरान ज्यादातर ऐप में सबसे बड़ा प्राइस मनी ₹1 से ₹2 करोड़ दिखाया जा रहा था। मतलब किसी का पहला रैंक आता है तो ऐप आपको एक से दो करोड़ देने का दावा करता है। इसके लिए लोगों को केवल ₹49 लगाकर टीम बनाने को कहा जाता है। ₹49 रुपये के इस कॉन्टेस्ट में तकरीबन डेढ़ करोड़ लोग सट्टा खेल सकते हैं। इस हिसाब से देखें तो एक मैच से लगभग 74 से 75 करोड़ रुपये की कमाई होती है। जिस पर ऐप द्वारा दावा किया जाता है कि वो इस कॉन्टेस्ट में 66% लोगों को रैंक के हिसाब से पैसा (अलग-अलग प्राइस मनी) बांट देता है, मतलब लगभग 56 करोड़ रुपये का प्राइज बांट दिया जायेगा। वहीं जो विनिंग प्राइस होगा, उसी से सरकार को भी टैक्स जायेगा, न कि ऐप अपने तरफ से देगा। ऐसे में एक मैच के एक कॉन्टेस्ट से ये ऑनलाइन गेमिंग ऐप तकरीबन 15 से 20 करोड़ रुपये की कमाई कर लेते हैं।
इन ऐप द्वारा एक मैच में तकरीबन 30 से ज्यादा अलग-अलग तरह के कॉन्टेस्ट, अलग-अलग प्राइस मनी के साथ खिलाए जाते हैं। हालांकि, इन सभी ऐप द्वारा 'सिगरेट की डिबिया' की तरह डिस्क्लेमर में सावधान जरूर किया जाता है। साथ ही कह दिया जाता है कि इस खेल में आदत लगना या आर्थिक जोखिम संभव है, जिम्मेदारी से खेलें।
ऑनलाइन सट्टेबाजी पर देश में क्या है कानून?
भारत में सट्टा खेलना पूरी तरह से गैरकानूनी है। लेकिन, ऑनलाइन सट्टे को लेकर देश के कानून में कई तरह के विरोधाभास नजर आते हैं। जिनका फायदा उठाकर ये ऑनलाइन गेमिंग धड़ल्ले से चल रहे हैं। पब्लिक गैंबलिंग एक्ट, 1867 के मुताबिक सट्टेबाजी एक अपराध माना गया है। लेकिन, ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर कानून में कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया है।
हालांकि, संविधान और पब्लिक गैंबलिंग एक्ट, 1976 सभी राज्यों को सट्टे से संबंधित कानून बनाने का अधिकार देता है। इसी के तहत अलग-अलग राज्यों ने ऑनलाइन स्पोर्ट्स और क्रिकेट बेटिंग को मान्यता दी है, लेकिन बुकी को देश में अपना ऑफिस खोलने का अधिकार नहीं दिया है। जबकि एक्ट, 1976 के तहत ही भारत में हॉर्स रेसिंग पर बेटिंग और लॉटरी को लीगल किया गया है। इसके अलावा गोवा, दमन और दीव, नागालैंड और सिक्किम में भूमि आधारित केसिनो भी लीगल है।
कुछ राज्यों में ऑनलाइन सट्टेबाजी को किया बैन
इस ऑनलाइन सट्टेबाजी से राजस्व घाटे और लोगों के आत्महत्या करने से जुड़े मामले आने के बाद कुछ राज्य सरकारों ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप को लेकर सख्ती दिखाई है। तमिलनाडु सरकार ने तो साल 2022 में ऐसे तमाम ऑनलाइन गेम पर ही बैन लगा दिया, जो सट्टेबाजी कराती है। साथ ही एक कानून भी पास किया गया है। जिसके तहत 3 साल की जेल और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम, नागालैंड, असम, मेघालय और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग को लेकर कड़े नियम बनाये गये है।
ऑनलाइन गेमिंग पर केंद्र सरकार की राय?
साल 2022 में संसद में केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन बिल पेश किया गया था। इसमें ऑनलाइन गेम को रेगुलेट करने की बात कही गई थी। वहीं अप्रैल 2023 में केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर एक एडवाइजरी भी जारी की थी। जिसमें सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (SRO) की तरफ से हर ऑनलाइन गेम और उस पर लगाये जाने वाले सट्टेबाजी की जांच की जायेगी। जो भारतीय कानून के तहत ऑनलाइन गेम के नियमों का पालन करेगा, उसी को जारी रखा जायेगा। वरना उस ऑनलाइन गेमिंग ऐप पर सरकार एक्शन ले सकती है।












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