INDIA Bloc Meeting: टूट गया इंडिया गंठबंधन? कांग्रेस की बैठक से DMK की दूरी पर उठे सवाल, अब पार्टी ने क्या कहा
INDIA Bloc Meeting: दिल्ली में सोमवार, 8 जून 2026 को आयोजित 'INDIA' गठबंधन की बैठक के बीच विपक्षी खेमे से एक बड़ी खटपट देखने को मिली है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने का बैठक में शामिल नहीं होने पर इंडिया ब्लॉक में टूट के संकेत नजर आ रहे थे लेकिन अब DMK ने अपने रुख को लेकर बड़ा बयान दिया है।
कांग्रेस की अगुवाई में आयोजित बैठक में शामिल न होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच DMK ने स्पष्ट किया कि बैठक में भाग नहीं लेने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी INDIA गठबंधन से दूर हो रही है। पार्टी ने कहा कि वह गठबंधन की मूल विचारधारा और उसके प्रमुख मुद्दों के साथ खड़ी है।

DMK के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इस विशेष गठबंधन मंच की बैठक में शामिल न होने का फैसला लिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन मुद्दों और प्रस्तावों पर चर्चा हुई है, उनमें से अधिकांश DMK की वैचारिक सोच से मेल खाते हैं।
'कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग है हमारा रुख'
चेन्नई में मीडिया से बात करते हुए डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने गठबंधन की बैठक में शामिल न होने के फैसले पर पार्टी का स्टैंड साफ किया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा-हमने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। हम कांग्रेस के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में हिस्सा नहीं लेने जा रहे हैं। हमारे कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं और पार्टी नेतृत्व ने फैसला किया है कि हम उस बैठक से दूर रहेंगे जिसमें कांग्रेस शामिल हो रही है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के बीच दरार आ गई थी, जब कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। डीएमके इसे कांग्रेस द्वारा किया गया विश्वासघात मान रही है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर दी सफाई: 'वैचारिक रूप से हम साथ हैं'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) द्वारा गठबंधन की एकजुटता को लेकर दिए गए बयान और प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए एलंगोवन ने थोड़ा नरम रुख भी दिखाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नीतियों के स्तर पर विपक्ष के साथ खड़े हैं। एलंगोवन ने कहा, वैचारिक रूप से, गठबंधन के प्रस्तावों में जिन विचारों की बात की गई है, वे उन्हीं नीतियों और लक्ष्यों को दर्शाते हैं जिनका हम खुद अनुसरण करते हैं। हम निश्चित रूप से उन जनहित के मुद्दों और प्रस्तावों का समर्थन करेंगे।
DMK मूल नीतियों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए कहा-किसी एक बैठक में शामिल नहीं होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि हम पार्टी की बुनियादी नीतियों या जनहित के सिद्धांतों से दूर जा रहे हैं। हम अपनी मूल विचारधारा और नीतियों के साथ मजबूती से खड़े हैं।"
INDIA गठबंधन में मतभेदों की चर्चा, विपक्षी एकता पर क्या असर?
हाल के विधानसभा चुनावों के बाद INDIA गठबंधन के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक विपक्षी दलों के बीच समन्वय और भविष्य की दिशा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे समय में DMK का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी दक्षिण भारत में विपक्षी राजनीति की प्रमुख ताकतों में से एक है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि DMK फिलहाल अपने राज्यीय राजनीतिक हितों और राष्ट्रीय स्तर की विपक्षी एकजुटता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि पार्टी ने बैठक से दूरी बनाई, लेकिन गठबंधन की वैचारिक लाइन से खुद को अलग नहीं किया।
हालांकि DMK की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया, लेकिन पार्टी के ताजा बयान ने यह संकेत दिया है कि वह अभी भी INDIA गठबंधन के व्यापक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनी हुई है। DMK ने साफ कर दिया है कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे जैसे मुद्दों पर उसका समर्थन जारी रहेगा।
संसद में अलग बैठेंगे DMK के सांसद
हालांकि, इस कड़वाहट का असर अब देश की संसद में भी देखने को मिलेगा। राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलने के बाद डीएमके नेता कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में डीएमके सांसदों के बैठने की व्यवस्था बदलने का अनुरोध किया था। लोकसभा सचिवालय ने DMK की इस अर्जी को स्वीकार कर लिया है। अब संसद के आगामी सत्रों में डीएमके के 22 लोकसभा सांसदों को कांग्रेस सदस्यों से अलग सीटें आवंटित की जाएंगी।














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