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Network Problems: टेलीकॉम उपभोक्तओं की ना ख़त्म होने वाली समस्याएं, समाधान कब और कैसे संभव?

टेक्नोलॉजी बदल गयी, मोबाइल सेट भी बदल गया, पर उपभोक्ताओं की परेशानी अब भी वही है। कभी नेटवर्क नहीं तो, कभी इंटरनेट डेटा नहीं। कॉल ड्रॉप होने का क्रम पहले से ज्यादा बढ़ गया है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी यानि टीआरएआई रोज लोगों की शिकायतें सुन रहा है, लेकिन उसके पास इस समस्या का तत्काल समाधान नहीं है। आखिर क्यों बढ़ गयी है टेलीकॉम उपभोक्तओं की समस्याएं? समाधान कब और कैसे संभव है?

सबसे ज्यादा समस्या 5 जी के नेटवर्क में आ रही है। देश में 5 जी नेटवर्क काम करते हुए एक साल हो गया है। पिछले साल 1 अक्टूबर को ही देश में 5 जी सेवा शुरू की गयी थी। शुरुआत में इसकी सेवा दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में चालू की गयी थी, परन्तु इस समय जिओ और एयरटेल ने मिलकर 10 हज़ार शहरों में 5 जी नेटवर्क लगा देने का दावा किया है। भारत सरकार को 5 जी स्पेक्ट्रम नीलामी से 1.5 लाख करोड़ रूपये की आय हुई थी।

Network Problems: Unending problems of telecom consumers

समस्या क्या है?
मोबाइल यूजर के लिए कॉल ड्रॉप और लो इंटरनेट कनेक्शन एक बड़ी समस्या है। यह समस्या ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में ज्यादा है। बिहार, बंगाल दिल्ली, कर्नाटक सभी जगहों से शिकायत मिल रही हैं। लो नेटवर्क के चलते ना सिर्फ मोबाइल कॉलिंग बल्कि इंटरनेट ब्राउजिंग, वीडियो और व्हाट्सएप, मैसेंजर द्वारा वायस अथवा वीडियो कॉलिंग में भी दिक्कत आ रही है। उपभोक्ताओं के विभिन्न सोशल मीडिया पर पोस्ट बताते हैं कि सुबह से ही नेटवर्क प्रॉब्लम शुरू हो जाती है, जो दोपहर होने तक और बढ़ जाती है। आपरेटरों द्वारा फ्री टाइम के पैकेज में भी कनेक्टिविटी की समस्या परेशानी बढ़ा रही है।

5G सर्विस आने के बाद से बढ़ी है समस्या
मोबाइल उपभोक्ताओं का कहना है कि 5G सेवा के आने के बाद से कॉल ड्रॉप और लो इंटरनेट नेटवर्क की समस्याएं बढ़ गई हैं। एक यूज़र ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है कि नेटवर्क के लिए घर से दो किमी दूर जाना पड़ता है। टेलिकॉम मैन्युफैक्चरिंग कंपनी जाबिल का कहना है कि 5 जी टेक्नोलॉजी अभी भी शुरुआती चरण में है। इसलिए 5G ने अभी तक हमारे दैनिक जीवन पर वह प्रभाव नहीं डाला है जो 4G ने डाला था। जाबिल और एसआईएस इंटरनेशनल रिसर्च के एक सर्वेक्षण में यह पाया गया है कि जवाब देने वाले लगभग दो-तिहाई यानि 64 प्रतिशत का मानना है कि 5जी को व्यापक रूप से अपनाने में एक से तीन साल लगेंगे।

ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों को परेशानी
ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों को नेटवर्क समस्याएं काफी परेशान कर रही हैं। धीमे इंटरनेट की वजह से वीडियो क्लास में दिक्कत, पीडीएफ डाउनलोड करने और उन्हें खुलने में अधिक समय लगने, ऑनलाइन एग्जाम, टेस्ट और क्वेश्चन पूछने में विलंब होने से उन्हें पढ़ाई करने में तकलीफ हो रही है। इसके अलावा नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी से वर्क-फ्रॉम-होम करने वाले लोग भी परेशान हो रहे हैं। अस्थाई इंटरनेट के कारण वीडियो कॉल्स में बाधाएं उत्पादकता को प्रभावित कर रही है।

सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों के काम काज में विलंब
नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी के कारण, सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों के कामकाज में विलंब हो रहा है। खासकर बैंक अथवा अस्पताल में काम के दौरान इंटरनेट लिंक फेल होने से कामकाज में देरी हो रही है। जिससे उत्पादकता तो कम हो ही रही है, कर्मचारियों और आम नागरिकों में झगड़े भी हो जाते हैं।

इधर से उधर हो रहे उपभोक्ता
कॉल ड्रॉप और नेटवर्क समस्याओं के कारण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी में भी तेजी आई है। यूजर्स अच्छे नेटवर्क, लो बजट, तेज स्पीड और सेवा की तलाश में रहते हैं, जिससे वे अपने नंबर को बिना परेशानी के बदल सकते हैं। इसके बावजूद अन्य कंपनियों में वैसी ही हालत होती है। दूसरे नेटवर्क में जाने पर भी जब समस्या बनी रहती है तो उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

कॉल ड्रॉप या लो कनेक्शन की शिकायत कैसे करें
मोबाइल यूजर के लिए कॉल ड्रॉप और लो इंटरनेट कनेक्शन या इससे जुड़ी किसी भी समस्या की शिकायत भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण से की जी सकती है। इसके लिए TRAI ने एक मोबाइल ऐप TRAI MY Call का निर्माण किया है। जहां कॉल ड्रॉप, मोबाइल नेटवर्क, केबल अथवा टीवी से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या की शिकायत कर सकते हैं। यह ऐप एंड्राइड के साथ ही iOS यूजर के लिए भी उपलब्ध है।

अपना स्थान जांचें
भारत में 5G कवरेज अभी भी शुरू किया जा रहा है, इसलिए यह संभव है कि आप ऐसे क्षेत्र में हैं जहां 5G अभी तक उपलब्ध नहीं है। यह देखने के लिए कि आप कवर किए गए क्षेत्र में हैं या नहीं, आप अपने वाहक के लिए 5G कवरेज मानचित्र देख सकते हैं।

क्या है उपाय
अपने डिवाइस की जाँच करें। सभी डिवाइस 5G को सपोर्ट नहीं करते हैं। यह सुनिश्चित करें कि आपका डिवाइस 5G-सक्षम है। 5G सिग्नल की शक्ति आपके स्थान के आधार पर भिन्न हो सकती है। यदि आप भीड़-भाड़ वाले इलाके में हैं, या बहुत सारी इमारतें या अन्य रुकावटें हैं, तो आपको कमजोर 5G सिग्नल का अनुभव हो सकता है। यह भी ध्यान रखना जरुरी है कि 5G नेटवर्क अभी भी विकासाधीन है।

क्या कह रहे हैं ऑपरेटर
रिलायंस जियो इन्फोकॉम अक्टूबर 2022 से स्टैंडअलोन (SA) आर्किटेक्चर का उपयोग कर अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। कंपनी का कहना है कि 2023 के अंत तक अपने 5G नेटवर्क के साथ राष्ट्रव्यापी कवरेज तक पहुंचने जायेंगे। प्रतिद्वंद्वी ऑपरेटर भारती एयरटेल ने पहले ही भारत के हजारों कस्बों और शहरों में 5G तैनात कर दिया है। एयरटेल ने अपने 5G रोलआउट के लिए नॉन-स्टैंडअलोन टेक्नोलॉजी (NSA) का विकल्प चुना है। वोडाफोन आइडिया ने हाल ही में भारत में 5G की तैनाती के लिए अपनी अंतिम रणनीति का खुलासा करते हुए कहा है कि वह कई उपकरण विक्रेताओं के साथ अंतिम दौर की बातचीत कर रही है। आवश्यक धनराशि के लिए स्थानीय बैंकों के साथ ऋण पर भी बातचीत हो रही है।

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