National Youth Day 2023: 'आपके यहां व्यक्ति को जेंटलमैन दर्जी बनाता है.' स्वामी विवेकानंद ने क्यों कहा था ऐसा?
स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था, उनके जन्मदिन को पूरा देश 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाता है।

Swami Vivekananda Jayanti 2023 (राष्ट्रीय युवा दिवस) : स्वामी विवेकानंद का नाम लेते ही आंखों के सामने एक ऐसी व्यक्ति की तस्वीर उभरकर सामने आती है , जिसमें साहस, ज्ञान, प्रेम, दया और ऊर्जा कूट-कूटकर भरी थी, जिन्होंने जीवन को सादगी लेकिन सत्य और तथ्यों के साथ जीने की राह दिखाई थी। स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी इंसान के अंदर जोश भर देते हैं। आपको बता दें कि स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था, उनके जन्मदिन को पूरा देश 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाता है।
ज्ञान के अथाह सागर थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद ज्ञान के अथाह सागर थे, उनके जीवन से जुड़ी बहुत सारी कहानियां और किस्से हैं, जो उनके सरल और दमदार सोच को भली-भांति परिभाषित करते हैं। वो असाधारण व्यक्तित्व के मालिक थे। एक बार की बात है कि स्वामी विवेकानंद विदेशी यात्रा पर थे। वो हमेशा गेरुआ वस्त्र पहना करते थे, वो उसी वस्त्र में अमेरिका की सड़कों में घूम रहे थे कि तभी एक विदेशी व्यक्ति उनके कपड़े पर तंज कसने लगा लेकिन स्वामी जी को कोई असर नहीं पड़ा, वो चुपचाप आगे बढ़ते गए।

लेकिन उस विदेशी व्यक्ति की शरारत कम नहीं हुई, उसने स्वामी विवेकानंद की टोपी को पीछे से खींच लिया लेकिन विवेकानंद ने उस पर क्रोध नहीं किया लेकिन उन्होंने अंग्रेजी में जरूर उससे ऐसी हरकत करने का कारण पूछा। विवेकानंद के मुंह से अंग्रेजी सुनते ही उस विदेशी की आंखें फटी की फटी रह गईं। उसे भरोसा ही नहीं हो रहा था कि भगवा कपड़े पहने और साधू की तरह दिखने वाला इंसान अंग्रेजी भी बोल सकता है।
'हां मैं शिक्षित हूं , पढ़ा-लिखा हूं और सज्जन हूं'
उसने विवेकानंद के सवाल का जवाब देने के बजाय उल्टा उनसे ही पूछ लिया कि क्या आप पढ़े-लिखे हैं?, इस पर विवेकानंद ने कहा कि 'हां मैं शिक्षित हूं , पढ़ा-लिखा हूं और सज्जन हूं।' इस पर उस विदेशी ने कहा कि 'आपको देखकर तो बिल्कुल भी नहीं लगता कि आप पढ़े-लिखे हैं? आपके कपड़ों को देखकर कोई नहीं कहेगा कि आप जेंटलमैन या सज्जन हैं?
'आपके देश में दर्जी एक व्यक्ति को जेंटलमैन बनाता है'
इस पर स्वामीविवेकानंद ने जो कहा वो अनुकरणीय और कंठस्थ करने वाली बात है। उन्होंने कहा कि 'आपके देश में दर्जी एक व्यक्ति को जेंटलमैन और सज्जन बनाता है लेकिन मेरे देश भारत में शिक्षा और व्यवहार इंसान को जेंटलमैन और सज्जन बनाती है और इस बात का मुझे गर्व है।'

स्वामी विवेकानंद की बातें सुनकर वो विदेशी शर्म से गड़ गया, उसने तुरंत उनसे माफी मांगी और कहा कि 'क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं?', इस पर मुस्कुराते हुए स्वामी विवेकानंद ने कहा कि 'मैं भारतीय हूं और आप मुझे इसी नाम से जानिए और पुकारिए, मुझे अच्छा लगेगा।'












Click it and Unblock the Notifications