LGBTQIA के अक्षरों का मतलब क्या है? कैसे इनको मिली दुनिया में पहचान
LGBTQIA+ इस समुदाय के लोगों की पहचान उनके पहनावे या रूप-रंग से नहीं, बल्कि उनकी यौन वरीयताओं से होती है।

LGBT और LGBTQIA+ ये शब्द ऐसे लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो गे, लेस्बियन, बाइसेक्शुअल या ट्रांसजेंडर के रुप में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से अपनी पहचान रखते हैं। जैसे-जैसे दुनिया ने इनके बारे में जाना, समझा, वैसे-वैसे इनके लिए नए नए शब्दों का विकास होता गया। हालांकि, ऐसे लोगों के लिए हिंदी में एकदम सटीक शब्द निकाल पाना मुमकिन नहीं है। इन्हें विवरण के जरिए ही समझ सकते हैं।
LGBTQIA+ ऐसे लोगों का संक्षिप्त नाम है जो सामान लिंग के लोगों के प्रति आकर्षित होते हैं, अथवा जन्म से जिस लिंग की पहचान होती है, उससे अलग लिंग का अनुभव करते हैं, या जिनकी यौन संबंधों में कोई दिलचस्पी नहीं होती है। कोई इंसान LGBTQIA है या नहीं, इसे बच्चे के जन्म के समय सिर्फ लिंग को देखकर नहीं बताया जा सकता है, सिर्फ कुछ मामलों को छोड़कर। हालांकि, आज सिर्फ LGBTQIA की हम बात कर रहे हैं जो बहुरंगी झंडे को अपनी पहचान बताते हैं।
LGBT ने अपनी पहचान रखी दुनिया के सामने
साल 1950 और 1960 के दशक में ऐसे लोगों को अक्सर 'समलैंगिक समुदाय' या "गै कम्युनिटी" कहा जाता था। फिर साल 1969 में इस समुदाय ने अपनी पहचान बदली और दुनिया में अपने होने की मौजूदगी का अहसास दिलाया। 28 जून 1969 को अमेरिका में न्यूयार्क सिटी की पुलिस ने स्टोनवॉल-इन पर छापा मारा, जो न्यूयार्क सिटी के ग्रीनविच विलेज में स्थित एक गे क्लब था। दरअसल पुलिस माफियाओं की आड़ में इनको परेशान किया करती थी। क्योंकि 1960 और पूर्ववर्ती दशक में लेस्बियन, समलैंगिक, उभयलिंगी और ट्रांसजेंडर (LGBT) अमेरीकियों के लिए एक तरह का पाप का स्त्रोत समझे जाते थे।
जब पुलिस ने यहां छापा मारा तो इनमें काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा और कई लोग भी शामिल थे, जो राज्य के लिंग-उपयुक्त कपड़े कानून का उल्लंघन कर रहे थे। कई पुरुष महिलाओं की ड्रेस पहने हुए बाथरूम में छिपे थे और अधिकारियों ने उनको वहीं पर निर्वस्त्र कर के उनकी तलाशी ली, जो एकदम अपमानजनक था। निरंतर पुलिस उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव से परेशान होकर कुछ लोगों का आक्रोश बढ़ा और यह हंगामा धीरे-धीरे दंगे में बदल गया। जिसकी आग पूरे देश में फैल गई। इस दंगे ने एक काम कर दिया था, वह था सभी समलैंगिक लोगों को एक साथ आना।
इसके एक साल बाद 28 जून 1970 को पहला गे प्राइड मार्च स्टोनवेल से निकाला गया, तब हजारों लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। इससे प्रेरित होकर उस साल लॉस एंजिल्स, सैन फ्रांसिस्को, बोस्टन और शिकागो समेत कई शहरों में समलैंगिक गौरव समारोह का आयोजन किया। फिर कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में समलैंगिक अधिकारों के आंदोलनों को बढ़ावा मिला और अन्य देशों में, एक स्थायी शक्ति बनती चली गई।
समलैंगिक झंडे के अलग-अलग रंगों का क्या अर्थ है?
मूल रूप से इनका झंडा आठ रंगों वाला हाथ से सिला हुआ है। जिसमें गुलाबी, लाल, नारंगी, पीला, हरा, फिरोजी, नीला, और बैंगनी हैं। यह एलजीबीटी गर्व के लिए एक सार्वभौमिक प्रतीक बन दुनियाभर में फैल चुका है। फिर इस ध्वज की लोकप्रियता बढ़ी, और इसे डिजाइन कर 1979 तक, छह रंग वाला संस्करण समलैंगिक गौरव के लिए आधिकारिक प्रतीक बन गया। इसमें लाल का अर्थ जीवन, नारंगी का अर्थ उपचार, पीले का अर्थ सूरज की रोशनी, हरे का अर्थ प्रकृति, नीला का अर्थ शांति, बैंगनी का अर्थ आत्मा है।
LGBTQIA के हर अक्षर का मतलब
L (लेस्बियन): यह शब्द उन महिलाओं के लिए उपयोग किया जाता है जो महिलाओं की ओर ही आकर्षित होती हैं। उनसे प्यार करती हैं और यौन संबंध बनाना चाहती हैं। वहीं आपको बता दें इसमें ऐसा भी हो सकता है कि एक महिला का बर्ताव और लुक एक पुरुष जैसा ही हो और संबंध महिला से ही हो।
G (गै): ये शब्द उनके लिए इस्तेमाल किया जाता है जो पुरुष होकर पुरुष की ओर आर्कषित हो। यानि कोई पुरुष समान लिंग यानि किसी पुरुष पर ही मोहित होता है तो उसे गै (Gay) कहते हैं। वैसे सामान्य तौर पर प्रत्येक समलिंगी व्यक्ति, चाहे पुरुष है या कुछ और, के लिए गै शब्द का उपयोग होता रहता है।
B (बाईसेक्शुअल): इसमें कोई व्यक्ति, अपने समान लिंग के मनुष्यों के अलावा अन्य सभी तरह के लिंग के मनुष्यों की ओर भी आकर्षित होता अथवा होती है तो उसे बायसेक्सुअल कहा जाता है। महिला और पुरुष दोनों 'बाईसेक्शुअल' हो सकते हैं।
T (ट्रांसजेंडर): ये थर्ड जेंडर में आते हैं। वे सभी मनुष्य जिनके जन्म के समय पहचाना गया लिंग बड़े होने पर उन्हें उचित नहीं लगता और वे किसी अन्य लिंग के मनुष्य की तरह जीने लगते हैं। एक उदाहरण से समझते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके जननांग (प्राइवेट पार्ट) पैदा होते समय पुरुष की तरह होते हैं और जिसे लड़का माना जाता है लेकिन बाद में उसके जीवन-जीने का तरीका लड़कियों जैसा रहता है। वे खुद को लड़की अथवा महिला ही मानते हैं। इन्हें ट्रांसवुमेन कहा जाता है और इसके उलट अगर कोई लड़की है और लड़कों जैसा जीवन जीती है तो तो उन्हें ट्रांसमेन कहा जाता है।
Q (क्वीयर): क्वीयर वो लोग हैं जो ये तय नहीं कर पाते हैं कि शारीरिक चाहत आखिर क्या है? यानी जो न खुद को पुरुष, न महिला और न ही ट्रांसजेंडर मानते हैं। वे न तो पूरी तरह लेस्बियन होते है और न ही गे और बाईसेक्सुअल। इनकी यौन पसंद समय समय पर बदलती रहती है। ऐसे लोगों को क्वीयर कहते हैं। इसीलिए क्वीयर के 'Q' को 'क्वेश्चनिंग' भी कहा जाता है।
I (इंटरसेक्स): यह वे लोग होते हैं जिनके पैदा होने के बाद उनके जननांग (प्राइवेट पार्ट) देखकर ये साफ नहीं हो पाता कि वह लड़का है या लड़की। वह इंटरसेक्सुअल कहलाते हैं।
A (एसेक्शुअल): जिस किसी मनुष्य को किसी भी लिंग के मनुष्य के साथ सेक्स में रूचि नहीं होती, तो उन्हें एसेक्शुअल कहा जाता है।
+ (प्लस): इनमें वे सभी मनुष्य शामिल किए जाते हैं जो LGBTQIA के विभिन्न कैटेगरीज में अपने आपको फिट नहीं मानते। उन्हें लगता है कि उनकी सोच और पसंद को किसी तय केटेगरी में नहीं डाला जा सकता।
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पिछले कुछ वर्षों में नए केटेगरी बना दिए गए हैं जिनमें LGBT के बाद पहला Q से अर्थ Queer और दूसरे Q से Questioning केटेगरी से है। इसके बाद I से इंटरसेक्स, P से Pansexual (जो सभी केटेगरी के लोगों से आकर्षित हो जाते हैं और किसी विशेष केटेगरी में नहीं होते), 2S से Two Spirit (एक शरीर में दो आत्मा के विश्वास अथवा अर्धनारीश्वर की संकल्पना में विश्वास वाले), फिर पहला A से एसेक्सुअल (अर्थात सेक्स में अरुचि वाले) और अंतिम A से अर्थ है Ally, अर्थात वे सभी लोग जो हेट्रोसेक्सुअल या स्ट्रेट या कुछ और हैं लेकिन इन विभिन्न केटेगरी के मनुष्यों के प्रति सद्भाव रखते हैं, उनके सहयोगी रहते हैं।
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