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Mangala Gauri: किन महिलाओं को रखना चाहिए मंगला गौरी व्रत, जानें पूजन विधि और इस साल व्रतों के दिन

किसी कन्या का विवाह अगर मांगलिक होने के कारण नहीं हो रहा है या देरी से हो रहा है तो उसे मंगला गौरी व्रत करने के लिए कहा जाता है। कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8 और 12वें घर में उपस्थित हो तो मंगल दोष बनता है। ऐसी स्थिति में कन्या का विवाह नहीं हो पाता। इसलिए मंगला गौरी व्रत रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि मंगलवार के दिन मंगला गौरी के साथ-साथ हनुमानजी के चरण से सिंदूर लेकर उसका टीका माथे पर लगाने से मंगल दोष समाप्त हो जाता है तथा कन्या को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।

Mangala Gauri

सावन में मंगलवार से शुरु होता है व्रत

सावन में मंगलवार के दिन मां गौरी की पूजा अर्चना की जाती है। इसे मंगला गौरी व्रत के नाम से जाना जाता है। इस साल सावन महीने का आरंभ 4 जुलाई से हो रहा है और सावन एक महीने का नहीं बल्कि 59 दिनों का होगा। इस साल सावन 31 अगस्त को समाप्त होगा। साल का पहला मंगला गौरी व्रत मंगलवार 4 जुलाई को रखा जायेगा। इस बार अधिक मास होने के कारण सावन एक महीने से अधिक का रहेगा। जैसे सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना करना उत्तम फलदायी रहता है। वैसा ही मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

हर स्त्री को मिलता है सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद

मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत सुहागन स्त्रियां अपने अखंड सुहाग के लिए धारण करती है। सावन के मंगलवार को व्रत धारण से ही इसका नाम मंगला और इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है, इसलिए गौरी नाम से प्रचलित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस व्रत का खासा महत्व है। माता पार्वती की पूजा अर्चना करना हर स्त्री के लिए सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद होता है। कुंवारी कन्या अगर गौरी व्रत का धारण करती है तो उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है तथा विवाह में हो रही अड़चन भी दूर हो जाती है। सुहागन स्त्रियां इस व्रत को अपने पति की लंबी उम्र अर्थात अखंड सौभाग्यवती की कामना लेकर करती है।

माता पार्वती का ही मंगल रूप है मां मंगला गौरी

मां मंगला गौरी आदि शक्ति माता पार्वती का ही मंगल रूप हैं। इन्हें मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी के नाम से भी जाना जाता है। मां शक्ति के तीन गुण हैं - सृजन, पालन और संहार। वह कभी सृजन करती हैं, कभी मां के रूप में पालन करती हैं तो वहीं कभी अपने भीतर की शक्ति को जागृत कर महिषासुर जैसे दानवों का संहार करती हैं। इसलिए मंगला गौरी का व्रत न सिर्फ अखंड सौभाग्य दिलाता है, बल्कि स्त्रियों की शक्ति का एहसास भी दिलाता है।

इस साल सावन में आने वाले मंगला गौरी व्रत

भगवान भोलेनाथ की आराधना और पूजा का माह सावन इस बार 4 जुलाई से शुरू होगा। इस बार अधिक मास होने के कारण कुल नौ मंगला गौरी व्रत होंगे।

  • पहला व्रत- 4 जुलाई
  • दूसरा व्रत - 11 जुलाई
  • तीसरा व्रत -18 जुलाई
  • चौथा व्रत - 25 जुलाई
  • पांचवा व्रत - 1 अगस्त
  • छठा व्रत - 8 अगस्त
  • सातवां व्रत- 15 अगस्त
  • आठवां व्रत - 22 अगस्त
  • नौवां व्रत - 29 अगस्त

पहले मंगला गौरी व्रत पर त्रिपुष्कर योग

सावन का पहला मंगला गौरी व्रत त्रिपुष्कर योग में है। इस योग में पूजा पाठ का तीन गुना फल प्राप्त होता है। 4 जुलाई को मंगला गौरी व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 8:57 बजे से लेकर दोपहर 2:10 बजे तक है। इसमें भी लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:25 बजे से दोपहर 2:10 बजे तक है। वहीं मंगला गौरी व्रत वाले दिन त्रिपुष्कर योग दोपहर 1:38 बजे से अगली सुबह 5:28 बजे तक है।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन माता गौरी की पूजा करके मां गौरी की कथा जरूर सुननी चाहिए। अगर किसी महिला की कुंडली में वैवाहिक जीवन में कोई समस्या हो तो उसे मंगला गौरी का व्रत जरूर रखना चाहिए।

16 श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और व्रत कथा पढ़ें

सावन के महीने में मंगलवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि के बाद गुलाबी, नारंगी, पीले और हरे रंग के स्वच्छ सुंदर वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को अच्छे से साफ करके पूर्वोत्तर दिशा में चौकी स्थापित करें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।

माता पार्वती की तस्वीर

स्थापित करें और 16 श्रृंगार का सामान जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहदी, महावर, लाल चुनरी आदि चढ़ाएं। साथ ही नारियल, लौंग, सुपारी, मेवे, इलायची और मिठाइयां चढ़ाएं। इसके बाद मां गौरी की व्रत कथा पढ़ें और फिर उनकी आरती उतारें।

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