Mallikarjun Kharge: खड़गे ने दंगे में खोई थी मां, जानिए 'सोलिलादा सरदारा' की अनकही बातें
मात्र 7 साल की उम्र में खड़गे ने एक सांप्रदायिक दंगे में अपनी मां को खो दिया था और जान बचाने के लिए कुछ दिन जंगल में गुजारने पड़े थे।
Mallikarjun Kharge: आखिरकार देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को मल्लिकार्जुन खड़गे के रूप में अपना नया अध्यक्ष मिल गया है। चुनाव के नामांकन से एक दिन पहले वाइल्ड कार्ड एंट्री उम्मीदवार के रूप में सामने आए खड़गे ने आज कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कुर्सी हासिल कर ली है। उन्होंने भारी अंतर से दिग्गज नेता शशि थरूर को इस चुनाव में हराया है। आपको बता दें कि इस चुनाव में खड़गे को 7897 वोट मिले जबकि शशि थरूर को मात्र 1072 वोटों पर संतोष करना पड़ा। मालूम हो कि खड़गे तो चुनावी रेस का पार्ट ही नहीं थे, उनसे पहले राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने जा रहे थे और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी लेकिन राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए ड्रामे के बाद से अशोक गहलोत ने इस चुनाव को लड़ने से मना कर दिया था।

चुनाव के लिए शशि थरूर अपना नाम पहले ही आगे बढ़ा चुके थे कि इसी बीच पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा जताई लेकिन नामांकन के एक दिन पहले ही मल्लिकार्जुन का नाम सामने आया, जिसके बाद दिग्विजय सिंह ने अपना नाम वापस लेते हुए खड़गे को सपोर्ट कर दिया और आज नतीजा सामने आ गया है और पार्टी के चीफ की कुर्सी मल्लिकार्जुन खड़गे के पास आ गई है। आपको बता दें कि वोटिंग 17 अक्टूबर को हुई थी।

मालूम हो कि पार्टी को पूरे 24 साल बाद गांधी परिवार के बाहर कोई अध्यक्ष मिला है। खड़गे से पहले सीताराम केसरी गैरगांधी अध्यक्ष रह चुके हैं। आपको बता दें कि गांधी परिवार के काफी करीबी कहे जाने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे का जीवन काफी संघर्षों से गुजरा है। कर्नाटक से आने वाले मल्लिकार्जुन कांग्रेस पार्टी का जाना-पहचाना दलित चेहरा हैं।
जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे
खड़गे अपने बयानों के कारण अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। तीन बच्चों कि पिता मल्लिकार्जुन की पत्नी का नाम राधाबाई खड़गे हैं, जबकि उनका बेटा प्रियांक खडगे कलबुर्गी जिले की चित्तापुर विधानसभा सीट से MLA हैं। कुछ कर गुजरने की चाह ने मल्लिकार्जुन का रूझान राजनीति की ओर कर दिया। उन्होंने छात्र जीवन में ही राजनीति में ही कदम रख दिया था, वो गुलबर्गा के सरकारी कॉलेज में छात्रसंघ के महासचिव भी रह चुके हैं।

मात्र 7 साल की उम्र में खड़गे ने एक सांप्रदायिक दंगे में अपनी मां को खो दिया था और जान बचाने के लिए कुछ दिन उन्हें अपने पिता के साथ जंगल में भी गुजारने पड़े थे। कॉलेज पहुंचने के बाद उनकी रूचि खेल में भी बढ़ गई थी और वो कॉलेज के हॉकी, कबड्डी और फुटबॉल के सक्रिय प्लेयर भी रह चुके हैं। वकालत में स्नातक करने वाले खड़गे ने साल 1969 में एक्टिव राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे उनका कद पार्टी में बढ़ता ही चला गया। खड़गे 9 बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं और आज अस्सी बरस की उम्र में वो पार्टी के अध्यक्ष बने हैं।

कर्नाटक कांग्रेस का बड़ा चेहरा मल्लिकार्जुन खड़गे को उनके समर्थक 'सोलिलादा सरदारा' यानी 'अजेय सरदार' कहकर संबोधित करते हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वो जब वकालत करते थे तो गरीब -मजदूरों के फ्री में केस लड़ा करते थे। उनके जुझारूपन और काम के प्रति समर्पण की वजह से ही उन्हें देश की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी काफी मानती थीं और तब से ही वो गांधी परिवार से काफी क्लोज रहे हैं। इंदिरा गांधी के बाद भी वो गांधी फैमिली के करीबियों की गुड लिस्ट में शामिल रहे और आज भी वो सोनिया गांधी-राहुल गांधी के काफी करीब माने जाते हैं।












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