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Majrooh Sultanpuri: हकीम के तौर पर शुरू किया था काम, हिंदी सिनेमा को दिए कई सुपरहिट गाने

मजरूह सुल्तानपुरी ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गीत दिए थे, जो आज भी लोगों की जुबान पर कायम हैं। उनका निधन 24 मई 2000 को हुआ था।

Majrooh Sultanpuri death anniversary Biography of Lyricist gave superhit songs to Hindi cinema

Majrooh Sultanpuri: 'जब दिल ही टूट गया' से लेकर 'पहला नशा, पहला खुमार' तक तीन पीढ़ियों को उनके पसंदीदा गीत देने वाले मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी के बारे में कौन नहीं जानता। उनके द्वारा लिखे गए गीत आज भी गुनगुनाए जाते हैं। उनके सदाबहार गीतों में 'तेरी बिंदिया रे...रे आय हाय' भी शुमार है।

मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म एक अक्टूबर 1919 को उत्तर प्रदेश के जिला सुल्तानपुर में हुआ था। इनका असली नाम असरार उल हसन खान था। मजरूह के पिता पुलिस उप-निरीक्षक थे। असरार उल हसन ने यूनानी पद्धति की मेडिकल की परीक्षा पास की थी। साथ ही एक हकीम के रूप में काम करने लगे थे। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।

शानदार नज्मों और गीतों के रचनाकार मजरूह सुल्तानपुरी की 24 मई को पुण्यतिथि है। वहीं आपको बता दें कि जिगर मुरादाबादी की सलाह के बाद ही मजरूह सुल्तानपुरी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और एक से बढ़कर एक गीत हिंदी सिनेमा को दिए।

गुस्से में लिख दिया सुपरहिट सॉन्ग

मजरूह सुल्तानपुरी ने एक गीत बहुत ही गुस्से में आकर लिखा था। जब वह गाना रिकॉर्ड हुआ तो सुपरहिट हो गया। यह बात 1969 में रिलीज हुई फिल्म 'धरती कहे पुकार के' के समय की है। इस फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने म्यूजिक दिया था।

दरअसल हुआ यूं था कि फिल्म के प्रोड्यूसर को गाना जल्दी चाहिए था। इसको लेकर प्रोड्यूसर मजरूह साहब के घर पर पहुंच गए और कहा कि उनको गाना आज ही चाहिए। इस पर सुल्तानपुरी ने कहा कि एकदम से तो गाना नहीं मिल सकता। पर प्रोड्यूसर ने कहा कि म्यूजिक डायरेक्टर आपका इंतजार कर रहे है। साथ ही फिर से दोहराया कि गाना आज ही चाहिए। इसपर मजरूह सुल्तानपुरी नाराज हो गए और गुस्से में उठकर गाना लिखने के लिए चले गए। और इस गाने को मुकेश कुमार और लता मंगेशकर ने गाया था। बाद में वह गाना इतना सुपरहिट हुआ कि आज भी लोग उस गाने को गुनगुनाते है। वह गाना था, जे हम तुम चोरी से, बंधे इक डोरी से, जइयो कहां ऐ हूजुर'।

यह गीत जितेन्द्र और नंदा पर फिल्माया गया था। इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2016 में इसे शेमारू कंपनी ने अपने अधिकारिक यूट्यूब अकाउंट से रिलीज किया था, और अभीतक इसे 45 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं।

जेल में रहे बंद

वामपंथी विचारों के कारण 1949 में मजरूह सुल्तानपुरी को नेहरू विरोधी माना जाने लगा। मजरूह सुल्तानपुरी को सरकार ने सलाह दी कि अगर वह माफी मांग लेते हैं, तो उन्हें जेल से आजाद कर दिया जाएगा। पर सुल्तानपुरी नहीं माने। इस पर सरकार ने दो साल के लिए जेल में डाल दिया। जब मजरूह सुल्तानपुरी 2 साल जेल में रहे तो उनके परिवार की माली हालत काफी खराब हो गई थी। ऐसे में राज कपूर उनकी मदद के लिए आगे आए। मजरूह सुल्तानपुरी ने उनसे मदद लेने से इंकार कर दिया। तब राज कपूर ने इसका भी तोड़ निकाल लिया और मजरूह से कहा वह उनके लिए एक गीत लिखें। इसके बाद उन्होंने एक गीत लिखा। गीत था, 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल' और इस गीत के लिए राज कपूर ने उन्हें 1 हजार रुपये का मेहनताना दिया ताकि परिवार अच्छे से गुजर बसर कर सके।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले पहले गीतकार

साल 1993 में सुल्तानपुरी को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे गीतकार थे, जिन्हें इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। मजरूह सुल्तानपुरी ने 'तेरे मेरे मिलन की ये रैना', 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'गुम है किसी के प्यार में', 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'ओ मेरे दिल के चैन', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को', 'इन्हीं लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा', 'बाहों में चले आओ, जैसे एक से बढ़कर एक और शानदार सुपरहिट गाने लिखे थे। साल 1964 में आई फिल्म 'दोस्ती' के गाने 'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था।

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