Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

इतिहास के पन्नों से- बापू का साबरमती आश्रम

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) गांधी जी के जीवन में कई घर रहे। जिनमें वे अलग-अलग समय पर रहे। उनमें राजधानी का 30 जनवरी मार्ग का बिड़ला हाऊस से लेकर राजधानी का ही वाल्मिकी मंदिर शामिल है। 30 जनवरी मार्ग पर तो उन्होंने प्राण ही त्यागे थे।

पर बापू का अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से खास संबंध रहा। वे साउथ अफ्रीका से 1915 में वापस भारत लौटने के बाद इधर रहे। उनके साथ कस्तूरबा जी भी रहती थीं। हालांकि, उन्होंने एक बार इसे छोड़ा तो वे फिर कभी इधर रहने के लिए नहीं आए। बापू इसे छोड़ने के बाद फिर क्यों नहीं लोटे, इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे पाता है।

बापू प्रकट न हो जाएं

लंबे समय तक अहमदाबाद में रहे वरिष्ठ पत्रकार अजीत गांधी कहते हैं कि साबरमती आश्रम का सारा वातावरण कुछ इस तरह का है कि इस तरह का आभास होता है कि मानो बापू कहीं आसपास ही होंगे। वे कभी भी आपसे सामने आ जाएंगे। बापू 1930 के बाद कभी यहां नहीं आए।

इसमें कोई शक नहीं है कि अगर अहमदाबाद जाएं और साबरमती आश्रम न जाएं तो आपकी यात्रा को सफल नहीं माना जा सकता। ये बेशक गुजरात के सबसे अहम जगहों में से है।

बापू के कारण इसे तीर्थस्थल ही माना जाता हूं। साबरमती आश्रम के अंदर घने पेड़ लगे हैं। सारा माहौल बेहद सुंदर है यहां का। देश भर से लोग इधर आते हैं। रोज सैकड़ों लोग इधर पहुंचते हैं। अजीत गांधी कहते हैं कि इधर एक संग्रहालय भी है। इसमें गांधी से जुड़ा तमाम साहित्य भी मिलता है।

इधर गांधी जी के जीवन से जुड़े कुछ दुर्लभ और यादगार चित्र भी लगे हैं। इन्हें देखने का भी अलग सुख है। सबसे अच्छी बात ये है कि गुजरात सरकार ने साबरमती आश्रम को बहुत बेहतर तरीके से मेनटेन भी किया हुआ है। अगर आप कभी गुजरात जाएं तो साबरमती आश्रम में जाना ना भूलें

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+