Mahatma Gandhi's death anniversary: आज भी जिंदा हैं 'बापू' ...जानिए कैसे?
नई दिल्ली। मोहनदास करमचन्द गांधी केवल एक इंसान का नाम नहीं है बल्कि ये नाम है उस सिद्धांत का, जिसको मानने वाला इंसान कभी भी अपने रास्ते से भटक नहीं सकता है। गांधी वो चरित्र है, जो कि भारतीयों की आत्मा में बसता है। ऐनक पहने और हाथों में लाठी लिए गांधी ने देश को केवल अंग्रेजों की गुलामी से आजाद नहीं कराया था, बल्कि ये साबित किया था कि अंहिसा और सच के रास्ते से ही हर लड़ाई जीती जा सकती हैं।उनके व्यक्तित्व को शब्दों में तराशा नहीं जा सकता है लेकिन हां इस आदर्श चरित्र को पढ़कर समझ जरूर सकते हैं और जिसने गांधी को समझ लिया, समझिए वो हर जंग जीत गया।

30 जनवरी 1948
लेकिन शायद वो और उनका चरित्र उनके हत्यारों को समझ में नहीं आया जिसके कारण उन लोगों ने वो अधर्म किया, जो नहीं होना चाहिए था। किसी से अगर विचार नहीं मिल रहे तो आप उससे तर्क कर सकते हैं लेकिन उसकी हत्या तो नहीं कर सकते ना, 30 जनवरी 1948 शाम को 5 बजे वो वक्त था जब बापू हर रोज की तरह अपनी शाम की प्रार्थना के लिए जा रहे थे लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि लोग उन्हें आज आखिरी बार देखेंगे।

वो हर उस जगह है जहां शांति और अहिंसा की बातें होती हैं...
भले ही गांधी आज हमारे बीच में सशरीर मौजूद नहीं है लेकिन वो देश के कोने-कोने में विराजमान हैं, वो हर उस जगह है जहां शांति और अहिंसा की बातें होती हैं, जहां लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और जहां लोगों के दिलों में एक-दूजे के लिए प्रेम है।
आइए एक नजर डालते हैं बापू के उन सिद्धांतों और विचारों पर..जिन्होंने पूरे देश को एकता के प्रेम में बांध दिया था...

गांधी जी के विचार
व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।

इतिहास के रुख को बदल सकता है
'अपने प्रयोजन में दृढ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है'

थोड़ा सा अभ्यास....
- हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें. हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा।
- थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है।
- खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।
- विश्वास को हमेशा तर्क से तौलना चाहिए जब विश्वास अंधा हो जाता है तो मर जाता है।













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