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#Maghar: मोक्षदायिनी काशी को छोड़कर संतकबीर क्यों गए थे मगहर?

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संत कबीर नगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में महान संत कबीर की नगरी मगहर का दौरा किया, मौका कबीर दास के 620वें प्राकट्य दिवस का था, जिसमें तय कार्यक्रम के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कबीर की मजार पर चादर चढ़ाई और माथा टेका, इस दौरान पीएम ने संत कबीर दास के बताए आदर्शो को याद भी किया।

मगहर को अपवित्र माना जाता है...

मगहर को अपवित्र माना जाता है...

आम तौर पर मगहर को अपवित्र माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि यहां मरने वालों को कभी भी मोक्ष नहीं मिलता है और इस जगह पर मरने वाला व्यक्ति अगले जन्म में गधा पैदा होता है या फिर नरक में जाता है। इसी वजह से इस जगह को लोग अपवित्र और बेकार कहते हैं लेकिन संत कबीर दास ने इस भ्रम को तोड़ने की कोशिश की थी और इसी वजह से उन्होंने अपने जीवन का अंतिम वक्त यहीं पर बिताया था।

समाधि भी ... मजार भी...

समाधि भी ... मजार भी...

मालूम हो कि शिव की नगरी काशी में पैदा होने वाले संत कबीरदास का पूरा जीवन मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में बीता लेकिन उन्होंने मगहर को अपनी मृत्यु के लिए चुना था, गौरतलब है कि संत कबीददास की वर्ष 1518 में मृत्यु हुई थी, यहां उनकी समाधि भी है और मजार भी।

कर्मों के अनुसार ही गति मिलती है...

कर्मों के अनुसार ही गति मिलती है...

कबीर की दृढ़ मान्यता थी कि कर्मों के अनुसार ही गति मिलती है स्थान विशेष के कारण नहीं। अपनी इस मान्यता को सिद्ध करने के लिए अंत समय में वह मगहर चले गए थे, उनकी मृत्यु को लेकर भी कई तरह की कहानियां हैं, कुछ लोग कहते हैं कि कबीर दास ने जब अंतिम सांस ली तो लोगों में उनके धर्म को लेकर झगड़ा होने लगा, हिंदूओं ने कहा कि उनका पार्थिव शरीर जलाया जाएगा तो मुस्लिमों ने कहा कि दफनाया जाएगा, इसी बहस के बीच कबीर का पार्थिव शरीर फूलों में बदल गया जिसे कि आधा-आधा-हिंदू और मुसलमानों ने बांट लिया और इसी वजह से मगहर में कबीर की समाधि भी है और मजार भी।

कुछ और कहानियां

कुछ और कहानियां

वैसे इस जगह को लेकर और भी कहानियां प्रचलित हैं, कहा जाता है कि इसी मार्ग से बौद्ध भिक्षुगण पहले तीर्थ स्थानों पर जाया करते थे लेकिन इस रास्ते पर लूट-पाट की घटनाएं बहुत होती थी इसलिए इस मार्ग का नाम 'मार्गहर' रख दिया था जो कि आगे चलकर 'मगहर' हो गया। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि इन सारी बातों में कोई सच्चाई नहीं है 'मगहर'का अर्थ है कि यहां का मार्ग सीधे इंसान हरि से मिलवाता है।

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English summary
Situated in Sant Kabir Nagar district, close to Gorakhpur, Maghar stands in contrast to Varanasi with respect to religious beliefs. Historically, it is the 620th year of Kabir's birth at Varanasi and the 500th year of his death at Maghar.
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