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Political Slogans: चुनावी समीकरण साधने के सियासी जुमले कितने कारगर?

Political Slogans: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले देश में एक बार फिर सियासी जुमलों या पॉलिटिकल टर्म्स का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन ने अपना नाम ही देश के नाम पर INDIA रख लिया, मतलब बताया - भारतीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक समावेशी गठबंधन है।

वहीं, केंद्र की सत्ता में हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा नेताओं ने 'ज्ञान' (GYAN) के नाम से नया जुमला गढ़ा है, जिसमें जी से गरीब, वाई से युवा, ए से अन्नदाता और एन से नारी बताया गया है। सियासत में झंडा गाड़ने के इरादे से गढ़े गए ये तमाम जुमले क्या कारगर साबित होंगे?

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लालू के एमवाई से आगे तेजस्वी का एटूजेड और बाप समीकरण

बिहार जातीय समीकरण को अपने पक्ष में करने के लिए राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुटीले नारे या जुमले गढ़ने में बहुत आगे रहा है। स्वयं लालू प्रसाद यादव इसके अगुआ रहे हैं। अब

लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और राजद नेता तेजस्वी यादव सियासी समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए दिलचस्प जातीय जुमले इस्तेमाल करने लगे हैं।

कभी उनके पिता लालू प्रसाद यादव के मुस्लिम और यादव वोट बैंक को मिलाकर चुनाव जीतने के लिए 'माय' (MY) यानी मां के नाम को उछाला था लेकिन अब उसके आगे बढ़कर तेजस्वी ने बाप समीकरण को भी जोड़ दिया है। तेजस्वी आजकल हर मंच से माय और बाप का मतलब समझाते हैं।

तेजस्वी यादव कहते हैं- आरजेडी सिर्फ माय (मुस्लिम-यादव) की पार्टी नहीं है। बल्कि बी ए ए पी (BAAP) की पार्टी भी है, जिसमें बी का मतलब- बहुजन, ए का मतलब अगड़ा, दूसरे ए का मतलब आधी आबादी और पी का मतलब पुअर यानी गरीब। फिर जनता से कहते हैं - "आप लोग जैसी ताकत देंगे हमलोग वैसा काम करेंगे।"

बिहार में भूराबाल, लवकुश और ऊपर आसमान नीचे पासवान जैसे जुमले

तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी आरजेडी का फुल फॉर्म भी गढ़ लिया है। अब वह राष्ट्रीय जनता दल के बजाय आरजेडी का मतलब - राइट्स, जॉब्स एंड डेवलपमेंट बतला रहे हैं। इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव 2020 प्रचार के दौरान तेजस्वी लगातार बिहार में ए टू जेड समीकरण बनाने और सभी जाति-धर्मों की समावेशी राजनीति करने की बात कहते रहते थे।

बिहार में सामाजिक न्याय के नाम पर लालू प्रसाद यादव ने जातीय उन्माद फैलाने की भी राजनीति की। उनके जमाने में नारा लगा था - "भूरा बाल साफ करो"। यानी अगड़ी जातियों मे शामिल लोगों को राजनीति से बाहर करो। तब भू से मतलब भूमिहार, रा से राजपूत, बा से ब्राह्मण और ल से लाला यानी कायस्थ के बारे में यह जुमला चलाया गया था।

आरजेडी ही नहीं बिहार की अन्य पार्टियों ने भी जातिगत जुमले खूब उछाले। लालू प्रसाद के खिलाफ नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के लव कुश समीकरण यानी कुर्मी-कोइरी वोट बैंक के लिए नया जुमला गढ़ा था। सियासत के मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले दिवंगत नेता रामविलास पासवान के लोगों ने एक जुमला उछाला था - "ऊपर आसमान, नीचे पासवान", क्योंकि सत्ता में आने वाले संभावित दलों के बारे में उन्हीं को मालूम होता था।

यूपी में अखिलेश के पीडीए से पहले अजगर, गजब और बीडीए का बड़ा दांव

उत्तर प्रदेश में समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव ने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटरों को साधने की रणनीति बनाई है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में सपा ने गजब यानी गुर्जर, अहीर (यादव), जाट और ब्राह्मण को मिलाकर नया समीकरण बनाया था।

वहीं, बसपा ने बीडीएम यानी ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम गठजोड़ बनाया था। हालांकि, दोनों ही जातीय समीकरण कामयाब नहीं हो पाए। यूपी में सबसे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अजगर यानी अहीर, जाट, गुर्जर और राजपूत जातियों का एक सियासी गठबंधन बनाया गया था। सबसे पहले सर छोटू राम ने किसान-गठबंधन के रूप में इसे पेश किया था और बाद में चौधरी चरण सिंह ने 1970 के दशक में इसका इस्तेमाल किया था।

कांशीराम-मायावती का तिलक तराजू तलवार और ब्रह्मा विष्णु महेश का जुमला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम और मायावती की पार्टी बसपा का नारा था "चढ़ गुंडन की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर"। बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग से पहले "तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार" जैसा हिंसक नारा दिया था।

बाद में मायावती ने समीकरण को बदला और कहा, 'हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा,विष्णु, महेश है' और 'पंडित शंख बजायेगा, हाथी बढ़ता जायेगा'। इसी तरह यूपी में सपा और बसपा गठबंधन के बाद बने नए सियासी समीकरण में 'मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गया जयश्री राम' नारा लगाया जाने लगा था। इसके जवाब में बीजेपी ने नारा दिया था 'मिट गए मुलायम-कांशीराम, सदा रहेंगे प्रभु श्रीराम'।

गुजरात में खाम, बंगाल में मां माटी मानुष, महाराष्ट्र में माधव का सियासी पैंतरा

गुजरात में 1980 के दशक में कांग्रेस नेता माधव सिंह सोलंकी ने खाम (क्षत्रिय-हरिजन-आदिवासी और मुस्लिम) समीकरण बनाकर बहुत बड़ी जीत हासिल की थी। वहीं, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने- 'मां, माटी, मानुष' के समीकरण से वामपंथियों का गढ़ ढाह दिया और अपने पांव जमा लिए। आज भी टीएमसी इस नारे को अपने साथ चिपकाए हुए है।

महाराष्ट्र में माली, धनगर और वंजारी (बंजारा) के माधव समीकरण से भाजपा ने बड़ा दांव खेला। शिवसेना के समय लुंगी भगाओ समीकरण ने मुंबईकरों और मराठों को दक्षिण के नेताओं के खिलाफ एक मंच पर ला दिया था।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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