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कोचिंग सिटी कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की प्रतिष्ठा दांव पर, “ओम शांति” बना चर्चा का विषय

Kota Lok Sabha Seat: कोटा संसदीय क्षेत्र से सांसद व निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के ओम बिड़ला को इस बार कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने बिड़ला के सामने चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। हालांकि पहले दौर में कम मतदान से चिंतित ओम बिड़ला को वैश्य समुदाय के ही कांग्रेसी नेता शांति कुमार धारीवाल से अंदरूनी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

कोटा में "ओम शांति" की चर्चा

वैश्य समुदाय से आने वाले भाजपा नेता ओम बिड़ला और कांग्रेसी नेता शांति कुमार धारीवाल लंबे समय से कोटा की राजनीति में अपनी अपनी पार्टियों में हावी हैं। दोनों प्रतिद्वंदी पार्टियों में होते हुए भी एक दूसरे के राजनीतिक और व्यवसायिक हितों में सहयोग करते रहते हैं। कोटा में इस आपसी तालमेल को "ओम शांति" कह कर समझ लिया जाता है।

Kota Lok Sabha Seat bjp candidate Speaker Om Birla vs congress prahlad gunjal

पांच महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में कोटा उत्तर की सीट पर कांग्रेस के शांति धारीवाल के सामने भाजपा से प्रहलाद गुंजल मैदान में थे। ऐसी चर्चा है कि जब शांति धारीवाल को अपनी स्थिति कमजोर नजर आई तो उन्होंने ओम बिड़ला से मदद मांगी। और "ओम शांति" की जोड़ी के आपसी तालमेल के कारण शांति धारीवाल कड़े मुकाबले में गुंजल को दो हजार वोटों से हराने में सफल रहे। वर्षों तक बीजेपी में रहे प्रहलाद गुंजल ने विधानसभा चुनाव में अपनी हार के लिए ओम बिड़ला के असहयोग को जिम्मेदार मानकर पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस का दामन थाम लिया। किसी मजबूत उम्मीदवार की तलाश कर रही कांग्रेस ने गुंजल को ही लोकसभा चुनाव के लिए कोटा से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शांति धारीवाल, जो प्रहलाद गुंजल के विरोध में चुनाव लड़ते रहे हैं, उन्हें यह पसंद नहीं आया।

धारीवाल ने गुंजल से मांगी क्लीन चिट

धारीवाल और गुंजल अब तक अपनी पार्टियों के मंच से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे हैं, लेकिन अब पासा पलट गया है। अब कांग्रेस में शामिल होकर प्रहलाद गुंजल लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में शांति धारीवाल कोई भी मौका मिलते ही प्रहलाद गुंजल के खिलाफ सार्वजनिक मंच से टीका टिप्पणी कर देते हैं। निश्चित रूप से इससे गुंजल की स्थिति कमजोर होती है और उनके प्रतिद्वंदी ओम बिड़ला को लाभ मिल रहा है। इस कारण जनता में "ओम शांति" की जोड़ी के आपसी तालमेल की चर्चाओं को बल मिला है।

ऐसे में कांग्रेस का आम कार्यकर्ता पशोपेश में पड़ गया है कि वह करे तो क्या करें, किसका साथ दे और किसका साथ ना दे। भाजपा प्रत्याशी बिड़ला को लाभ पहुंचाने वाली धारीवाल की बयानबाजी से कांग्रेस आलाकमान भी नाराज है। लेकिन राजनीति में अपनी आखिरी पारी खेल रहे 80 वर्षीय धारीवाल हमलावर मूड में हैं।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कोटा डीसीसी की बैठक में धारीवाल ने कहा कि गुंजल को रिवर फ्रंट और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में धारीवाल पर लगाए आरोपों के लिए माफी मांगनी होगी और क्लीन चिट देनी होगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गुंजल भाजपा में थे, तब सांप्रदायिक थे। ऐसे में अब उन्हें सेकुलर होना पड़ेगा। इस बयानबाजी के बाद शुरू हुआ विवाद आज भी जारी है। ऐसे में कांग्रेसियों का भी मानना है कि इस विवाद का फायदा अप्रत्यक्ष रूप से बिरला को मिल रहा है और धारीवाल यही चाहते हैं।

विधानसभा चुनाव में बराबरी की स्थिति

वर्तमान में कोटा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से दो बूंदी जिले की केशोरायपाटन (एससी) और बूंदी विधानसभा शामिल हैं। केशोरायपाटन से कांग्रेस के चुन्नीलाल बैरवा व बूंदी से कांग्रेस के हरिमोहन शर्मा विधायक हैं। इसके अलावा कोटा की पीपलदा से कांग्रेस के चेतन पटेल, सांगोद से भाजपा के हीरालाल नागर, कोटा उत्तर से कांग्रेस के शांति धारीवाल, कोटा दक्षिण से भाजपा के संदीप शर्मा, लाडपुरा से भाजपा की कल्पनादेवी व रामगंजमंडी (एससी) से भाजपा के मदन दिलावर विधायक हैं। दिलावर राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री भी हैं‌। इस प्रकार आठ में से चार विधानसभा पर भाजपा और चार पर कांग्रेस के विधायक काबिज है। ओम बिड़ला 2003 से 2014 तक कोटा दक्षिण के विधायक रह चुके हैं‌।

अब तक सात बार जीती भाजपा

आजादी के बाद से अब तक हुए 17 लोकसभा चुनावों में कोटा संसदीय क्षेत्र में भाजपा सात बार विजय हासिल कर पाई है, हालांकि 1952 और 1957 में कांग्रेस के नेमीचंद्र कासलीवाल चुने गए‌। 1962, 1967 और 1971 में भारतीय जनसंघ के ओंकारलाल बैरवा, 1977 व 1980 में जनता पार्टी से कृष्ण कुमार गोयल, 1984 में कांग्रेस से शांति धारीवाल, 1989, 1991 और 1996 में भाजपा के दाऊदयाल जोशी, 1998 में कांग्रेस के रामनारायण मीना, 1999 और 2004 में भाजपा के रघुवीर सिंह कौशल, 2009 में कांग्रेस के इज्यराज सिंह तथा 2014 व 2019 से भाजपा के ओम बिड़ला इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

2024 चुनाव में बिड़ला अपनी जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में हैं। कांग्रेस उम्मीदवार प्रहलाद गुंजल के साथ गुर्जर मतदाताओं का समर्थन होते हुए भी बिड़ला को धारीवाल और गुंजल के आपसी विवाद में अपनी जीत की राह दिख रही है। उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में ओम बिड़ला ने कांग्रेस के इज्यराज सिंह को दो लाख मतों से हराया था। बिड़ला को 644822 व सिंह को 444040 मत मिले थे।

वहीं 2019 में ओम बिड़ला ने कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 2 लाख 79 हजार 677 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार चुनाव में बिड़ला पर भी बड़े पद पर होने के बाद भी कोटा का समुचित विकास नहीं करने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन गुंजल और धारीवाल का आपसी द्वंद जनता की नाराजगी पर भारी पड़ता लग रहा है।

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