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Abaya and Hijab: जानिये अबाया, हिजाब और बुर्के में अंतर, किन देशों में है इन लिबासों पर प्रतिबंध?

अबाया, हिजाब और बुर्का के अलावा भी कई इस्लामिक लिबास होते हैं। कुछ देशों ने इन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है जबकि ईरान में इसके खिलाफ आंदोलन चल रहा है। भारत में इन पर अभी भी एक राय नहीं बन सकी है।

Know the difference between Abaya, Hijab and Burqa, in which countries these dresses are banned?

Abaya and Hijab: श्रीनगर का विश्व भारती हायर सेकेंडरी स्कूल आजकल सुर्खियों में बना हुआ है। मगर ये सुर्खियां किसी रिजल्ट को लेकर नहीं बल्कि छात्राओं के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर हैं। इन छात्राओं का कहना है कि उन्हें स्कूल के अंदर अबाया नहीं पहनने दिया जा रहा है। आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने उनसे कहा है कि अगर अबाया पहनना है, तो मदरसे चले जायें। जबकि स्कूल प्रशासन का कहना है कि छात्राएं अबाया पहनने की जिद करके माहौल खराब कर रही हैं।

स्कूल की प्रिंसिपल मेमरोज शफी ने कहा कि छात्राओं को यह कहा गया है कि वह घर से स्कूल आते समय अबाया पहन सकती है, लेकिन स्कूल परिसर में दाखिल होते ही उन्हें इसे उतारना होगा। उन्होंने कहा कि हमने उन्हें एक लंबा हिजाब या दुपट्टा पहनने को कहा है, जोकि स्कूल यूनिफार्म का हिस्सा है। प्रिंसिपल ने कहा कि लड़कियां रंग-बिरंगे अबाया पहनकर स्कूल आ जाती हैं और स्कूल यूनिफार्म के नियमों का उल्लंघन करती हैं। गौरतलब है कि स्कूल की प्रिंसिपल खुद एक महिला है और इस्लाम धर्म का अनुसरण करती है।

स्कूल के इस फैसले के बाद राजनैतिक दलों की भी प्रतिकिया आनी शुरू हो गयी है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने स्कूल प्रशासन के इस फैसले की निंदा कर इसे धार्मिक आजादी पर हमला करार दिया है। जबकि एक आतंकी संगठन ने स्कूल के प्रिंसिपल को 'दक्षिणपंथी' करार देते हुए उन्हें निशाना बनाने की धमकी तक दे डाली है।

फिलहाल स्कूल की प्रिंसिपल ने खेद जताते हुए कहा कि अगर स्कूल के इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों की भावनाओं को ठेस पहुंची हैं, तो मैं बिना शर्त माफी मांगती हूं। उन्होंने कहा कि छात्राएं अबाया पहनकर स्कूल में आने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।

अबाया, बुर्के और हिजाब में अंतर

अबाया उत्तरी अफ्रीका और अरब देशों में मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली एक पारंपरिक पोशाक है। कई मुस्लिम देशों सहित भारत में भी मुस्लिम महिलाएं अबाया पहनती हैं। आमतौर पर यह ढीला-ढाला सा और काले रंग का होता है। इसे सामान्य कपड़ों के ऊपर ही पहना जाता है। इसमें महिलाओं का शरीर कंधे से पैर तक ढका रहता है। केवल हाथ और पैर की उंगलियों सहित उनका सिर दिखाई देता हैं। ज्यादातर महिलाएं इसके साथ एक स्कार्फ भी पहनती हैं, जो उनके बालों को ढकता है।

हालांकि, अबाया और बुर्के में थोड़ा अंतर होता है। बुर्का आमतौर पर पूरे शरीर को ढकता है और शरीर का कोई भी हिस्सा दिखाई नहीं देता। इसमें सिर्फ महिलाओं की आंखों के पास एक जालीनुमा कपड़ा लगा रहता है, जिसके जरिए वह बाहर देख सकती हैं। जहां तक हिजाब का प्रश्न है, उसे केवल सिर, गला और कानों को ढकने के लिए पहना जाता है। इसके अलावा, कई देशों में चादर, अल-अमीरा और शायला जैसे इस्लामी लिबास प्रचलन में हैं।

सऊदी अरब और ईरान के स्कूलों में अबाया

दिसंबर 2022 में 'एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इवैल्यूएशन कमीशन (ईटीईसी)' ने अपने एक आदेश में कहा था कि सऊदी अरब की छात्राओं को परीक्षा हॉल में अबाया पहनकर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। परीक्षा के दौरान सिर्फ उन्हीं छात्राओं को परीक्षा देने की अनुमति होगी, जोकि स्कूलों और कॉलेजों द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म पहनकर परीक्षा देने आयेंगी।

इस कमीशन का गठन साल 2017 में किया गया था और यह सऊदी अरब के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसलिए सऊदी अरब में शैक्षिक पाठ्यक्रम सहित स्कूलों एवं कॉलेजों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी इस कमीशन पर है।

पिछले साल से शिया बहुल ईरान में हिजाब सहित महिलाओं पर थोपे जा रहे किसी भी इस्लामिक लिबास के खिलाफ जबरदस्त हिंसक प्रदर्शन जारी है। यह टकराव वहां की महिलाओं का सरकार एवं धर्म-गुरुओं के बीच है। ईरानी महिलाओं का कहना है कि उन्हें हिजाब सहित इस्लामिक लिबासों से आजादी चाहिए। जबकि सरकार तथा धर्म-गुरुओं को महिलाओं की यह मांग इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ नजर आती है। गौरतलब है कि इस टकराव में 500 से अधिक ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें महिलायें भी शामिल हैं। हजारों महिलायें एवं पुरुष दोनों जेलों में बंद हैं।

पर्दे जैसे लिबासों पर इस्लामिक विद्वानों की राय?

विजडम फाउंडेशन की निदेशक जीनत शौकत अली का कहना है कि पवित्र कुरान में हिजाब का जिक्र है, लेकिन अबाया या बुर्के का कोई जिक्र नहीं है। कुरान में सात बार हिजाब का जिक्र है और इस शब्द के कई अर्थ हैं, लेकिन उसमें से कोई भी अर्थ सीधे तौर पर महिलाओं के लिबास से जुड़ा हुआ नहीं है। पैगम्बर मोहम्मद पहनावे में शालीनता की बात जरूर किया करते थे।

जबकि इस्लामी उलेमाओं ने मुस्लिम महिलाओं के पर्दे जैसे लिबासों पर अलग-अलग राय जाहिर की हैं। कुछ उलेमाओं का कहना है कि सुन्नी इस्लाम के चारों स्कूल ऑफ थॉट्स - हनफी, हंबली, सलफी और मलिकी में बताया गया है कि महिलाओं को अपने बालों को गैर-महरम के सामने ढकना होगा।

इस्लाम के पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने अपने अनुयायियों से कहा था कि उन्हें अपनी निगाहें नीचे रखनी चाहिए। पुरुषों और महिलाओं दोनों को शालीनता का ध्यान रखना होगा। उन्होंने अपनी बीवियों और बेटियों को भी सलाह दी थी कि वे अपनी नजरें नीचे रखें और सिर को हिजाब से ढकें। इसपर इस्लामी उलेमाओं की राय है कि पैगम्बर मोहम्मद के इस निर्देश से यह साफ है कि यहां केवल हिजाब (स्कार्फ) की बात हो रही है। इसलिए इसे किसी भी तरह से बुर्का या अबाया से नहीं जोड़ा जा सकता।

जब हिंदुस्तान में इस्लाम आया और यहां के लोगों ने इस्लाम अपनाना शुरू किया, तो शुरुआती दौर में मुस्लिम महिलाएं अपने शरीर पर चादर लपेटा करती थीं। मुसलमानों के दूसरे खलीफा हजरत उमर ने अपने दौर में मुस्लिम महिलाओं को चादर लपेटकर घरों से बाहर निकलने पर जोर दिया था। बाद में, कुछ लोगों ने चादर की सिलाई करके इसे बुर्के का रूप दे दिया और धीरे-धीरे यह प्रचलन में आ गया।

बुर्का या अबाया पर प्रतिबंध

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    ● फ्रांस ने साल 2011 में सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को ढकने वाले इस्लामी लिबासों पर प्रतिबंध लगाया था।
    ● जुलाई 2011 से बेल्जियम में भी पूरा चेहरा ढकने वाले लिबासों पर प्रतिबंध है।
    ● साल 2016 में जर्मनी की तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा था कि जहां तक संभव हो देश में चेहरा ढकने वाले हर तरह के लिबासों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। हालांकि, जर्मनी ने इस पर कोई कानून तो पास नहीं किया, लेकिन वाहन चलाते वक्त वहां पर चेहरा ढकना प्रतिबंधित है।
    ● चीन ने 2017 में मुस्लिम बहुल प्रांत शिंजियांग में चेहरे ढकने वाले सभी तरह के इस्लामी लिबासों को प्रतिबंधित कर दिया था।
    ● साल 2018 में डेनमार्क की संसद ने चेहरा ढकने वाले लिबासों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    ● साल 2019 में नीदरलैंड सरकार ने सार्वजनिक परिवहनों, सरकारी भवनों और अस्पतालों में चेहरा ढकने वाले मुस्लिम लिबासों को प्रतिबंधित किया था।
    ● अप्रैल 2021 में श्रीलंका सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों का हवाला देते हुए चेहरे को ढकने वाले लिबासों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    ● कैमरून, इटली, ऑस्ट्रिया, नार्वे, स्विट्जरलैंड, बुल्गारिया और स्पेन में भी बुर्का, अबाया या हिजाब पहनने पर प्रतिबंध है। वहीं, अजरबैजान, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया जैसे मुस्लिम देशों के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थाओं में चेहरा ढकने वाले इस्लामी लिबासों पर पूर्ण प्रतिबंध है।

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